शशि थरूर के हिंदुत्व पर दिये ब्यान के निहितार्थ - कृष्णमोहन झा

दिंनाक: 23 Jul 2018 16:40:19


भोपाल(विसंके). कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर यूं तो अपने बयानों के लिए प्रायः सुर्खियों में रहते है परंतु कुछ दिनों पहले उन्होंने सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध मौत के मामले में अदालत से अग्रिम जमानत लेकर स्वयं को औऱ अधिक चर्चाओं में ला दिया था।अपनी तीसरी पत्नी सुनंदा को आत्महत्या के लिए उकसाने की जांच ने ही उन्हें अग्रिम जमानत के लिए विवश होना पड़ा।इस सारे मामलें को शशि थरूर का निजी मामला बताते हुए कांग्रेस ने उनसे दूरी बनाकर रखने का फैसला किया है लेकिन कांग्रेस मामले में स्वयं को असहज जरूर महसूस कर रही होगी। 
अब शशि एक औऱ बयान के बाद सुर्खियों में है। शशि के इस बयान ने एक बार फिर कांग्रेस को सफाई देने पर मजबूर कर दिया। कांग्रेस ने थरूर के उस बयान से पल्ला झाड़ते हुए उसे उनकी निजी राय करार देना पड़ा।शशि थरूर ने कहा था कि 2019 में भाजपा एक बार फिर सत्ता में आ गई तो हमारा देश हिन्दू पाकिस्तान बन जाएगा। उनका मानना है कि भाजपा को पुनः बहुमत मिल गया तो वह देश के संविधान को भी बदल सकती है। थरूर कहते है कि मैं कांग्रेस का प्रवक्ता नही हूँ इसलिए यह पार्टी की राय नही है,परंतु मैं अपने बयान पर कायम हूं। थरूर के बयान पर कांग्रेस पार्टी भी यह उनकी निजी राय बताकर पल्ला झाड़ने का प्रयास कर रही है।

इधर थरूर के बयान के बाद भाजपा उनपर ही नही बल्कि पूरी कांग्रेस पर हमलावर है। भाजपा ने उन्हें न केवल पार्टी से बर्खास्त करने की बल्कि राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग भी कर डाली। परंतु थरूर आप के बयान पर के रहे।उनसे जब इस बयान के बाद उठे विवाद पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उनका कहना था कि पाकिस्तान का निर्माण धर्म के आधार पर किया गया था वहां अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव होता है। भारत इसका समर्थन नही करता लेकिन भाजपा एवं संघ की हिन्दू राष्ट्र की विचारधारा में पाकिस्तान की झलक साफ दिखती है। इसे हिन्दू पाकिस्तान कहा जा सकता है। थरूर के बयान को कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने  उनकी निजी राय बताते हुए इतना जरूर कहा कि पार्टी नेताओं को बयां देते हुए संहि शब्दों का चयन करना चाहिए।वे भी मानते है कि भारत का लोकतंत्र इतना कमजोर नही कि वे पाकिस्तान बन जाए।

शशि थरूर के बयान से कांग्रेस ने भले ही पल्ला झाड़ लिया है,लेकिन पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी एवं जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने इसका समर्थन किया है। अंसारी ने कहा कि शिक्षित लेखक ,सांसद थरूर ने जो कहा है सोच समझकर कहा होगा। शरद यादव का कहना है कि देश मे जिस तरह भाजपा जातिगत और धार्मिक उन्माद फैला रही है उससे कोई भी सोचेगा कि ये हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए चल रहे है।इसी बीच कोलकाता की अदालत में थरूर के खिलाफ एक याचिका दायर की गई है। अब अदालत ने उन्हें 14 अगस्त को पेश होने के लिए समन जारी किया है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर कांग्रेस के ऐसे अकेले नेता नही है,जिनके बयान के बाद पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। इसके पहले भी पार्टी को अपने कुछ वरिष्ठ नेताओं के विवादास्पद बयान के बाद मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। गुजरात चुनाव के दौरान वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने कांग्रेस को मुश्किल में डाल दिया था। पार्टी ने उनके बयान के बाद इससे न केवल किनारा किया बल्कि अय्यर को पार्टी से निलंबित तक किया गया। अय्यर के बयान के बाद भाजपा और पीएम मोदी ने कांग्रेस पर जो तीखे प्रहार किए उससे पार्टी को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा। अय्यर के बयान ने गुजरात मे कांग्रेस का खेल बिगाड़ने का ही काम किया। अब शशि थरूर का बयान पार्टी को असहज कर रहा है। इन नेताओं ने भाजपा को लक्ष्य कर जो बयान दिए है उससे तो भाजपा को ही हमलावर होने का मौका मिलता रहा है।अतः अब पार्टी को गम्भीरता से सोचना होगा कि उनके सभी नेताओं की एक सामूहिक राय होनी चाहिए,लेकिन दिक्कत यह है कि यह सिलसिला थमता नही दिख रहा है।

प्रश्न यह उठता है कि शशि थरूर को जो यह आशंका हुई है वह किस हद तक जायज है। उन्हें तो भाजपा के पुनः सत्ताधिन होने के बाद संविधान बदलने की भी चिंता होने लगी है।शशि थरूर जैसे विद्वान राजनेता क्या यह नही जानते कि देश मे अल्पसंख्यकों को समानता का अधिकार मिला हुआ है। केंद्र की मोदी सरकार तो यह चिंता भी कर रही है कि देश मे अल्पसंख्यकों के परिवारों की महिलाओं को भी सम्मान से जीने का हक मिले।आश्चर्य की बात है कि तीन तलाक के मुद्दे थरूर की अपनी ही पार्टी अल्पसंख्यक वोटो के लालच में सरकार की पहल का विरोध कर रही है। यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि शशि थरूर न केवल अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार है बल्कि कई पुस्तकों के लेखक भी है इसलिए उन्हें यह भी ज्ञात होगा कि पाकिस्तान की छबि आतंक पोषित देश की है जिसका भारत हमेशा विरोध करता आया है। 

दरअसल थरूर का बयान पार्टी की तुष्टिकरण की नीति का ही परिणाम है,लेकिन वे क्यों भूल जाते है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुद भी अब साफ्ट हिंदुत्व के मुद्दे पर चलने में ही पार्टी की भलाई मान रहे है। शशि थरूर को निश्चिन्त रहना चाहिए कि भाजपा के पुनः सत्ता में आने के बाद संविधान के पुनः लेखन की आशंका व्यक्त करना बेमानी है।वे हिन्दू पाकिस्तान का जुमला उछालकर भी अपनी पार्टी का कोई भला नही कर सकते है।इससे पहले भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने भी भगवा आतंकवाद का जुमला उछाल था लेकिन इससे भी पार्टी को कोई लाभ नही हुआ था ओर इससे तो भाजपा को केंद्र में आने का रास्ता मिल गया।