आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 23 Jul 2018 14:28:59


धर्म और व्यावहारिक जीवन अलग नहीं हैं । संन्यास लेना जीवन का परित्याग करना नहीं है। असली भावना सिर्फ अपने लिए काम करने की बजाए देश को अपना परिवार बनाकर मिल-जुलकर काम करना है। इसके बाद का कदम मानवता की सेवा करना है और अगला कदम ईश्वर की सेवा करना है


- लोकमान्य बालगंगाधर तिलक