सामुदायिक बीज बैंक के तहत देवरा गाँव में बीज मेला सम्पन्न

दिंनाक: 24 Jul 2018 16:23:05


भोपाल(विसंके). विज्ञान के नित्य नवीन प्रयोग एवं आविष्कार हो रहे है। इन आविष्कारों द्वारा उपलब्ध तकनीकी का अधिक से अधिक लाभ ग्रामवासी,किसान को होना चाहियें, क्योकि मानव जीवन की आजीविका के दो प्रमुख साधन है- कृषि एवं उद्योग।


       एकात्म मानववाद के चिन्तक पं. दीनदयाल उपाध्याय जी को उनके अभिन्न सखा राष्ट्रऋषि नानाजी ने सच्ची श्रंद्धजली देने के उद्देश्य से उन्हीं के नाम से दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना कर संस्थान के विविध प्रकल्पों के माध्यम से पंडित जी चिन्तन को व्यवहारिक धरातल पर उतारा नानाजी जब तक भौतिक रूप से इस संसार में रहे देश समाज ,गाँव के विकास में ही लगें रहे। अभी भी उस ऋषी के अदृश्य शक्ति नित नये-नये कार्य करा रही है। कार्यो की इसी श्रृंखला में म.प्र. के सतना जिले के अंतर्गत देवरा गाँव में दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट एवं बायोडाबरसिटी इन्टर नेशनल के संयुक्त तत्वाधान में सामुदायिक बींज बैंक परियोजना के तहत किसान बीज मेंला आयोजित किया गया।


मेले का शुभारम्भ दीपप्रज्जवल देवार्चन एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय एवं राष्ट्रऋषि नानाजी के तैल चित्रों में पुष्पार्चन के साथ हुआ कार्यक्रम की अध्यक्षता देवरा गाँव के सरपंच श्री वृन्दावन कुशवाहा जी ने की एवं मुख्य अतिथि के दायित्व का निर्वहन संस्थान के सचिव डॉ. अशोक पाण्डेय जी ने किया कार्यक्रम की भूमिका डॉ. अशोक तिवारी जी ने रखीं। बीज बैंक का मुख्य उद्देश्य किसानों को उत्तम एवं अच्छे उत्पादक बीजों के निर्धारण में सहयोग करना , जलवायु परिवर्तन के अनुसार किसानों को फसल बोनें में बीज के निर्धारण में सहयोग करना ,  सामुदायिक बीज बैक के माध्यम से स्वयं सहायता समूह का गठन करके बीज बैंक को चलाना किसान बीज से नानाजी का कहना था कि किसान आत्म निर्भर बने किसान आपस में बीजों को अदला बदली करके बीज बोने में आत्म निर्भर बने किसान को बाजार बीज से न खरीदना पडे इसके लिए बीज बैक स्थापित किया गया। किसान की अपनी खाद हो , किसान का अपना पानी हो, किसान का अपना बीज हो, किसान को अपनी जमीन हो, किसान का अपना उद्यान हो तभी हमारा देश पुनः सोने की चिडिया बन सकता है ऐसे विचार एकात्म मानववाद के पे्ररणता पं0 दीनदयाल उपाध्याय थे। उनके छूटे हुये कार्यो को राष्ट्रऋषी नानाजी ने कृषिविज्ञान केन्द्रों एवं गाँव के प्रयोगशाला से 2.50 एकड मॉडल प्रस्तुत किया जिससे छोटा परिवार अपना जीवनयापन कर सकता है।


       किसानों के अक्सर बीजों में नमी के कारण कीडे लग जाते है जिससे उसके बीज खराब को जाते है। बीज खराब न हो इसके लिए एक विशेष प्रकार का केमिकल जीवोलाईट किसानों को दिया जाता है किसान अपने बीज में रखता है यह लगभग 80 प्रतिशत नमी को अवशेषित करके बीज को कीडों से बचाता है इस मेले में ग्रामवासियों ने बढचढ कर भाग लिया एवं नवीन-नवीन जानकारियाँ प्राप्त की। मुख्य अतिथि डॉ. पाण्डेय जी ने संबोधित करते हुये कहा कि भारत हमारा  कृषि प्रधान देश है यहाँ की लगभग 75 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है। हमारे किसान भाई विभिन्न प्रकार की दलहनी, तिलहनी फसलों का उत्पादन करते हुये देश की अन्न की आवश्यकताओं को पूरा करते है। वर्तमान समय में विभिन्न प्रकार के रासायनिक खादों का प्रयोग किये जाने के कारण गाँव शहर खेत, दूषित हो रहे है। दूषित होने के कारण मनुष्य बीमार पड रहा है। खेत की उर्वरा शक्ति समाप्त हो रही है। खेतो को पुनः हमे आर्गनिक खादों के माध्यम से उपजाउपन बढाना हैं किसान को हरी खाद के लिए प्रोत्साहित करना है। किसान को स्वतः की खाद उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करना है किसान को अपनी परम्परागत फसलों जैसे- ज्वार, बाजारा, रागी, कोदा, देशी धान, सावा के उत्पादन को प्रोत्साहन करना होगा। एक बार भारत में अकाल पडा था उस समय गोडा उ.प्र. के किसानों ने भूखे रहकर भी अपने बीजों को सुरक्षित एवं सरक्षित रखा। हमारे क्षेत्र में किसानों के द्वारा महुआ आंवला, बहेरा आदि उत्पादो को एकत्रित करके विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ बनाते है। वर्तमान में किसान बहुत जागरूक हो चुका है, राजापुर चित्रकूट में एक किसान ने पेठाकद्दू की खेती की और इस कद्दू को आगरा में पेठा बनाने को भेजा। किसान को 8 लाख की आमदनी हुई। इसी प्रकार से करौदा से करौदा कैण्डी बनाकर, आँवला सुपाडी, आँवला लड्डू बनाकर किसान आत्मनिर्भर बन सकता है। इस प्रकार गाँव का व्यक्ति मेहनत करके बहुत कुछ कर सकता हैं और कृषि के क्षेत्र में महत्वपूण्र परिवर्तन ला सकता है। इससे भारत की आर्थिक स्थित मजबूत होगी। अन्त में कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री वृन्दावन कुशवाहा जी ने कहा कि संस्थान द्वारा संचालित बीज बैंक में अधिक से अधिक जुडे एवं अपने बीज को सुरक्षित रखे। कार्यक्रम में समाजशिल्पी दम्पति श्री उदयप्रताप यादव जी एवं श्री अनुसुइया कुशवाहा जी, श्री आशीष त्रिपाठी, श्री रामकुशल द्विवेदी, श्री रामविश्वास कुशवाहा, श्री होली प्रसाद द्विवेदी आदि किसान कार्यक्रम में उपस्थित रहे। सर्वे भवन्तु सुखनः के बाद कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।