अफगानिस्तान में हिन्दू-सिक्खों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित हो – स. बृजभूषण सिंह बेदी जी

दिंनाक: 04 Jul 2018 15:14:34


जालंधर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पंजाब ने अफगानिस्तान में आत्मघाती हमले के दौरान मारे गए 19 हिन्दू-सिक्खों की घटना को कट्टरपंथ की पराकाष्ठा बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है. संघ के पंजाब प्रांत संघचालक स. बृजभूषण सिंह बेदी जी ने अफगान हिन्दू-सिक्खों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हुए भारत सरकार, संयुक्त राष्ट्र और एमनेस्टी इंटरनेशनल को घटना का कड़ा संज्ञान लेने का आग्रह किया.


प्रेस को जारी विज्ञप्ति में पंजाब प्रांत संघचालक जी ने कहा कि तीन दिन पहले अफगानिस्तान के जलालाबाद में हिन्दू-सिक्ख समुदाय के एक जत्थे पर आत्मघाती हमला किया गया. इसमें 19 लोगों की मौत हो गई, हमले में 20 लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं. मृतकों में अफगान नेता अवतार सिंह खालसा भी थे जो वहां की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय सिक्ख नेता थे.

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय पर अत्याचार की यह पहली घटना नहीं है, परंतु दुर्भाग्य की बात है कि विश्व समुदाय ने इनकी सुरक्षा को लेकर कभी गंभीरता नहीं दिखाई. कुछ दिन पहले ही वहां रणजीत सिंह नामक सिक्ख नेता की भी हत्या कर दी गई थी. अफगानिस्तान के तालिबान के प्रभाव वाले इलाके फाटा में सिक्खों से जजिया वसूलने की खबरें मिलती रही हैं और इन्हीं अत्याचारों के चलते हिन्दू-सिक्खों को उत्तर पश्चिमी सीमा प्रांत के सीमांत इलाके को छोड़ कर पेशावर में शरण लेनी पड़ी है. वहां से आए सिक्ख अक्सर शिकायत करते हैं कि उनके परिवारों के किसी सदस्य के देहांत के समय निकलने वाली शवयात्रा के दौरान कट्टरपंथी उन पर पत्थर फैंकते हैं.

संघचालक जी ने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबानियों के कट्टरपंथी व्यवहार के चलते आज वहां केवल एक हजार के करीब ही हिन्दू-सिक्ख जनसंख्या बची है, जबकि 70 के दशक में यहां 80 हजार हिन्दू-सिक्ख निवास करते थे.

दुनिया का इतिहास साक्षी है कि भारत ने समय-समय पर दुनिया भर से आए पीड़ितों को अपने यहां शरण दी है. अगर अफगान हिन्दू-सिक्ख भारत में शरण लेना चाहें तो केंद्र सरकार को तुरंत इनके सुरक्षित भारत प्रवेश और यहां पर पुनर्वास के प्रयास करने चाहिये. अगर ये लोग अपने ही गृह क्षेत्र में रहना चाहें तो न केवल भारत बल्कि संयुक्त राष्ट्र और एमनेस्टी इंटरनेश्नल को वहां की सरकार पर दबाव बना कर इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करवानी चाहिए.