5 जुलाई-जन्म-दिवस / वरिष्ठ प्रचारक रामदौर सिंह

दिंनाक: 05 Jul 2018 13:59:36


भोपाल(विसंके). पहले संघ और फिर भारतीय मजदूर संघ में कार्यरत वरिष्ठ प्रचारक श्री रामदौर सिंह का जन्म पांच जुलाई, 1941 को ग्राम अन्नापुर (जिला अम्बेडकर नगर, उ.प्र.) में श्री धर्मराज सिंह तथा श्रीमती धनंजया देवी के घर में हुआ था। 1956 में बाल्यवस्था में ही वे संघ के संपर्क में आकर शाखा जाने लगे। स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद उनकी नौकरी डाक विभाग में लग गयी; पर इस दौरान वे लगातार संघ का काम भी करते रहे। 1965 में वे कानपुर में नियुक्त थे। वहां वे एक खंड में सायं शाखाओं के कार्यवाह थे।


1964 में उन्होंने फैजाबाद से प्राथमिक शिक्षा वर्ग तथा फिर 1965 में लखनऊ से प्रथम वर्ष संघ शिक्षा वर्ग किया। इस समय तक वे संघ के विचार और कार्यप्रणाली से पूर्ण समरस हो चुके थे। अतः उन्होंने नौकरी छोड़कर प्रचारक जीवन स्वीकार कर लिया। सरकारी नौकरी छोड़ने का निर्णय आसान नहीं था। परिवार में इसका विरोध भी हुआ; पर उन्होंने एक बार निश्चय किया, तो फिर मुड़कर पीछे नहीं देखा। इसके बाद उन्होंने 1967 में लखनऊ से संघ शिक्षा वर्ग द्वितीय वर्ष तथा 1969 में तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

1965 से 70 तक वे मोहमदी, बिसवां व सिंधौली में तहसील प्रचारक रहे। 1971 में उन्हें शाहजहांपुर में जिला प्रचारक की जिम्मेदारी दी गयी। इसके बाद आपातकाल तक वे यहां पर ही रहे। आपातकाल में शाहजहांपुर में भूमिगत कार्यों का संचालन करते हुए वे पकड़े गये और फिर उन्हें जेल भेज दिया गया। आपातकाल के बाद 1978 में उन्हें सीतापुर विभाग और फिर 1981 में गढ़वाल विभाग प्रचारक की जिम्मेदारी मिली। शारीरिक विषयों में तज्ञता के कारण वे कई बार संघ शिक्षा वर्ग में मुख्यशिक्षक भी रहे।

संघ के प्रचारक शाखा कार्य के साथ ही अन्य कई क्षेत्रों में भी काम करते हैं। रामदौर जी को 1983 में भारतीय मजदूर संघ में उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री के नाते भेजा गया। 1999 तक उन्होंने यह जिम्मेदारी निभाते हुए मजदूर क्षेत्र में सर्वत्र भगवा ध्वज को प्रतिष्ठा दिलायी। इसके बाद उनका कार्यक्षेत्र क्रमशः बढ़ता गया। भारतीय मजदूर संघ का काम देश के सभी उद्योगों में है। 2001 में उन्हें ‘अखिल भारतीय चीनी मिल मजदूर महासंघ’ की जिम्मेदारी दी गयी।

2005 में वे भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाये गये। अब उनका केन्द्र दिल्ली हो गया। उपाध्यक्ष के साथ ही दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर एवं हिमाचल प्रदेश में संगठन के काम को गति एवं स्थायित्व देने की जिम्मेदारी उन्हें मिली। 2011 में जलगांव में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में उन्हें गुजरात और राजस्थान के संगठन मंत्री का काम दिया गया। 2014 के जयपुर अधिवेशन में उन्हें इनके साथ ही महाराष्ट्र, विदर्भ और गोवा का काम भी मिला।

रामदौर जी को जिस क्षेत्र का काम दिया जाता था, वहां पर काम तेजी से बढ़ता था। अतः सब कार्यकर्ता उन्हें अपने क्षेत्र में प्रवास के लिए बुलाते रहते थे। प्रवास में बार-बार पानी बदलता है तथा खानपान व सोने-जागने का समय भी अनियमित हो जाता है। इस कारण वरिष्ठ प्रचारकों को कई रोग घेर लेते हैं। रामदौर जी भी मधुमेह तथा उक्त रक्तचाप आदि के शिकार हो गये। फिर भी वे स्वास्थ्य की बजाय संगठन के काम को ही प्राथमिकता देते थे।

वे 23 दिसम्बर, 2015 को उदयपुर के प्रवास से लौटकर अपने केन्द्र जयपुर आये। उस समय वे कुछ अस्वस्थता अनुभव कर रहे थे। अतः उन्हें तुरंत डॉक्टर को दिखाया गया; पर इलाज से लाभ नहीं हुआ और अति प्रातः साढ़े तीन बजे उनका निधन हो गया। इस प्रकार एक परिश्रमी, कर्मठ, समर्पित और हंसमुख स्वभाव के प्रचारक ने अंतिम सांस तक सक्रिय रहते हुए चिर विश्रांति स्वीकार की।

(संदर्भ : जयपुर संघ कार्यालय से प्राप्त जानकारी)