आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 05 Jul 2018 14:22:44


तीर्थ करने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। सबसे अच्छा और बड़ा तीर्थ आपका अपना मन है, जिसे विशेष रूप से शुद्ध किया गया हो।


आदि शंकराचार्य