आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 09 Jul 2018 13:53:49


“लुढ़कते पत्थर में काई नहीं लगती” वास्तव में वे धन्य हैं. जो शुरू से ही जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं | जीवन की संध्या होते-होते उन्हें बड़ा संतोष मिलता है कि उन्होंने निरुद्धेश्य जीवन नहीं जिया तथा लक्ष्य खोजने में अपना समय नहीं गवाया | जीवन उस तीर की तरह होना चाहिए जो लक्ष्य पर सीधा लगता है और निशाना व्यर्थ नहीं जाता |


  • - स्वामी विवेकानंद