युवाओं का लेफ्टविंग हो न राइटविंग, केवल इंडिया विंग

दिंनाक: 13 Aug 2018 15:52:05


भोपाल(विसंके).  सामाजिक संवाद की गुणवत्ता बढ़ाने में सोशल मीडिया की भूमिका विषय पर युवाओं के साथ चर्चा में फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि युवाओं का कोई लेफ्टविंग या राइटविंग नहीं होना चाहिए, उनके लिए सिर्फ इंडिया विंग होना चाहिए। यंग थिंकर्स फोरम और राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव में युवा प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए श्री अग्निहोत्री ने कहा कि युवाओं को देश के लिए विचार करना चाहिए। सोशल मीडिया की भूमिका पर चर्चा करने के लिए राजनीतिक विश्लेषक एवं लेखक शुभ्रास्था, प्रज्ञता के संस्थापक आशीष धर और ओप इंडिया के संस्थापक राहुल रौशन भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।


            राजनीतिक विश्लेषक शुभ्रास्था ने युवाओं से चर्चा में कहा कि आपके विचारों पर यदि कोई आपको किसी एक विचारधारा से बाँधना चाहता है, तब परेशान होने की जरूरत नहीं। उसे ऐसा करने दीजिए, लेकिन आप अपनी परिभाषा स्वयं लिखें। उन्होंने बताया कि आज की स्थिति में यदि मैंने भगवा चुनरी ओढ़ रखी हो तो मेरी हर बात को संघ से जोड़ा जाएगा और भगवा रंग को लक्षित किया जाएगा। किंतु यही बात यदि कोई कम्युनिस्ट बोलेगा तो उसे विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहा जाएगा। उन्होंने कहा कि संवाद में संयम और सौहार्द होना चाहिए। जब आप किसी गंभीर विषय पर लिख-बोल रहे हैं, तो वहाँ पर अपशब्दों को उपयोग आपके चरित्र और विचार की कमजोरी को दर्शाते हैं। लोकतंत्र में आपको सब प्रकार की स्वतंत्रता है, किंतु सीमा पर खड़े जवान को गाली नहीं दे सकते।

देश में तीन तरह के लोग : थिंक टैंक प्रज्ञाता के संस्थापक आशीष धर ने बताया कि देश में तीन तरह के लोग होते हैं। एक, जो देश पर गर्व करते हैं। दो, जो देश के विरुद्ध होते हैं। तीसरे, जो किसी के साथ नहीं होते। इस वर्ग को इस बात की कतई चिंता नहीं होती कि देश किस दिशा में जा रहा है। यह सिर्फ रोज सुबह उठते हैं, खाना खाते हैं, नौकरी पर जाते हैं और लौटकर टीवी देखते हैं, सो जाते हैं। किंतु, यह देश के मतदाता हैं। पाँच साल में एक बार अपने मताधिकार का उपयोग करते हैं। इसलिए लिए यह वर्ग हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इन्हें मुख्यधारा से जोडऩा आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संवाद में व्यंग्य अपने विचार को अभिव्यक्त करने का सबसे सशक्त औजार है। इससे आप किसी का नाम लिए बिना ही आप अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं।

मीडिया पर निगरानी रखने की जरूरत :


मीडिया की भूमिका पर अपनी बात रखते हुए राहुल रौशन ने कहा कि मीडिया समाज में वॉचडॉग की भूमिका जरूर निभाता है, लेकिन आज उसकी भी निगरानी करने की जरूरत है। मीडिया को निर्णायक नहीं माना जाना चाहिए। युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यधारा के मीडिया पर नजर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर आप अपनी बात कहें, उसके बाद लोग क्या कहते हैं, उससे आप अपनी सोच को प्रभावित न होने दें।

अतीत को कोसे नहीं, उससे सीखें :


'सामाजिक समावेश और सांस्कृतिक अखण्डता' विषय पर चर्चा में थिंक टैंक इंडिक कलेक्टिव के संस्थापक साई जे. दीपक ने कहा कि हमें अपने अतीत को कोसना नहीं चाहिए बल्कि उससे कुछ सीखना होगा। जब तक हम अपने अतीत से अच्छी चीजें नहीं सीखेंगे, तब तक हमारा आगे बढ़ाना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि भारत हमारा ऐसा देश है, जहां प्रत्येक 10 किमी में भाषा और संस्कृति बदल जाती है। यह गर्व की बात है कि भाषा और संस्कृति की विविधता के बाद भी हम सब एक हैं। जबकि ब्रिटेन जैसे देशों में जहाँ एक ही धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं, वह विखंडित हो गए। इस सत्र की अध्यक्षता कर रहे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि देश में बौद्धिक आतंकवाद आ गया है। इस बौद्धिक आतंकवाद को लाने वाले लोग वही हैं, जो लोकतंत्र के हिमायती हैं। उन्होंने कहा कि आज हमारे देश के दुश्मन सिर्फ आम आतंकी नहीं हैं, बल्कि बौद्धिक आतंकी भी हैं। युवाओं की लड़ाई ऐसे ही लोगों से है। अपनी संस्कृति का संरक्षण करने के लिए उन्होंने युवाओं का आह्वान किया। वहीं, देश की आतंरिक सुरक्षा विषय पर यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव में आए युवाओं को संबोधित करते हुए आंतरिक सुरक्षा विशेषज्ञ आरवीएस मणि ने कहा कि देश की सुरक्षा प्रत्येक नागरिक के लिए सबसे पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सीमा पर सुरक्षा में लगे सैनिक हम सभी के लिए देव तुल्य हैं।


इन विषयों पर भी हुआ विमर्श :

यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव में दूसरे दिन विभिन्न समानांतर सत्र आयोजित हुए, इन सत्रों में प्रमुख रूप से प्रतिभागी युवाओं ने अपने विचार रखे। सेवा, समाज सुधार, महिला नेतृत्व, बौद्धिक नेतृत्व, उद्योग एवं व्यापार और शैक्षणिक परिसर में युवाओं की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। इन विषयों पर चर्चा करने के लिए अमिताभ सोनी, आलोक दुबे, कविता पाटीदार, अनुराग नागाइच, आशीष अग्रवाल और रितेश गोयल उपस्थित थे। इसके साथ ही प्रमुख थिंक टैंक के प्रतिनिधियों ने भी युवाओं के साथ चर्चा की। इनमें प्रज्ञाता के आशीष धर, सृजन फाउंडेशन से राहुल दीवान, इंडिया फाउंडेशन से रजत सेठी, निमित्तकम से ओमेन्द्र रत्नु, इंडिया इंस्पायर से हर्षित जैन और गरुड प्रकाशन से अंकुर जैन प्रमुख थे।