इमरान खान ने पहना है कांटों भरा ताज - कृष्णमोहन झा

दिंनाक: 16 Aug 2018 15:55:21


भोपाल(विसंके). पाकिस्तान की नेशनल असेम्बली के हॉल ही में संपन्न हुए चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें पाने वाली तहरीफ़- ए इंसाफ पार्टी के मुखिया इमरान खान जल्द ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री  के रूप में शपथ ले सकते है। इमरान की पार्टी को 272 सीटों पर हुए चुनाव  में से 115 सीटें प्राप्त हुई है। सरकार बनाने के लिए इमरान खान को 22 सदस्यों की और आवश्यकता है। यह समर्थन पाने के लिए वह कोशिशें कर रहे है, जिसमे उन्हें सफलता मिल चुकी है। चुनाव जीतने वाले 13 निर्दलीय सांसदों में से 9 सांसदों ने इमरान की पार्टी को  समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इसके आलावा छोटी 6 पार्टियों के भी समर्थन के बाद इमरान खान ने सरकार बनाने के आवश्यक बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। पार्टी ने  दावा कि इमरान को 143 सदस्यों  समर्थन प्राप्त है।


 आश्चर्य की बात यह है कि इमरान खान की कट्टर विरोधी रही पाकिस्तान मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट भी अब इमरान के पक्ष में आ चुकी है। पाकिस्तान की नेशनल असेम्बली में वैसे तो 342 सदस्य होते है ,जिनमे से 272 सीटों पर चुनाव कराए गए थे ,शेष स्थान संरक्षित होते है। इमरान की पार्टी पीटीआई के प्रवक्ता फवाद चौधरी ने दावा किया है कि संरक्षित सीटें मिलकर पार्टी के पास असेम्बली में 174 सीटें हो जाएगी। इस तरह से सदन में उनकी पार्टी के पास अच्छा खासा बहुमत है। ऐसी सम्भावना है कि इमरान खान के नेतृत्व में जो सरकार बनेगी उसमे 20 मंत्री होंगे। 

पाकिस्तान से ऐसी भी ख़बरें आ रही थी कि इमरान खान शपथ ग्रहण समारोह में पड़ौसी देशों के प्रमुखों को भी आमंत्रित करेंगे ,परन्तु समय बीतने के बाद अब इन ख़बरों पर विराम लग गया है। अब यह तय हुआ है कि इमरान इस समारोह में केवल अपने मित्रों को ही आमंत्रित करेंगे। पूर्व क्रिकेटर इमरान खान के मित्र अनेक देशों में फैले हुए है। जाहिर सी बात है कि वे सभी क्रिकेट के दिग्गज खिलाडी रहे है। भारत से सुनील गावस्कर ,कपिल देव ,नवजोत सिंह सिद्धू के आलावा फिल्म स्टार आमिर खान को आमंत्रित करने की सूचनाए आ रही है। ऐसी सूचनाए मिलते ही सबसे अधिक प्रफुल्लित नवजोत सिंह सिद्धू दिखाई दिए। उन्होंने तो अपने मित्र इमरान की तारीफों के पुल बांधने में तनिक भी देरी नहीं की। कपिल देव एवं गावस्कर ने कहा है कि यदि उन्हें आधिकारिक आमंत्रण मिलता है तो वे वहा जा सकते है ,लेकिन वे पहले सरकार की अनुमति प्राप्त करेंगे। आमिर खान ने कहा है कि उन्हें अभी तक आमंत्रण नहीं मिला है। यदि मिलता भी है तो अपनी व्यस्तता के चलते वह नहीं जा सकेंगे। केंद्र की मोदी सरकार ने इस मामले में अभी तक कोई राय व्यक्त नहीं की है ,लेकिन भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी इस पक्ष में नहीं है कि भारत के ये दिग्गज शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करे। शायद सरकार का यह मत हो सकता है कि  मित्र केवल मित्र की हैसियत से ही वहा जाए। अगर ऐसा होता है तो इन मित्रो की शपथ ग्रंग्रहण समारोह में मौजूदगी  विवाद का कोई औचित्य नहीं है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने जा रहे इमरान खान को फोन पर बधाई दी है। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान में लोकतंत्र को मजबूत करने लिए शुभकामनाएं भी दी है। पीएम मोदी की शुभकामनाओं के पीछे कुछ सन्देश ही छिपा है। इमरान चूंकि चुनावो के जरिए प्रधानमंत्री बनने जा रहे है। यह तरीका पूरी तरह लोकतान्त्रिक है। अतः अब पाकिस्तान में लोकतंत्र को मजबूत करने में उनकी जिम्मेदारी अहम है। अब देखना यह होगा कि पीएम  बनने के बाद सेना एवं उनके बीच किस तरह के संबंध रहते है। इमरान की तहरीफ़ ए इंसाफ पार्टी को यदि पूर्ण बहुमत होता एवं उन्हें  प्रधानमंत्री बनने के लिए किसी और राजनीतिक दल की आवश्यकता नहीं होती, तब यह उम्मीद की जा सकती थी कि इमरान देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री है एवं वे सेना के दबाव में काम नहीं करेंगे, परन्तु चुनाव के दौरान ही यह संकेत मिल चुके है कि इमरान खान का रिमोट सेना के हाथ में ही होगा। उन्हे स्वविवेक से काम करने की आजादी होगी यह कल्पना भी असंभव है। 

प्रधानमंत्री के रूप में सेना को निर्देशित करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का अंजाम पूरी दुनिया देख चुकी है। इमरान खान ने यदि  नवाज शरीफ के रास्ते पर चलने का जरा भी दुस्साहस किया तो वे सेना की आखों में खटकने लगेंगे। दरअसल नवाज शरीफ को पाकिस्तान की राजनीति के परिदृश्य से दूर करने के कारण ही इमरान पीएम की कुर्सी तक पहुंचे है। इसीलिए वे कम से कम एक कार्यकाल तो पूरा करना ही चाहेंगे, भले ही उन्हें अपनी सरकार के फैसलों में सेना व  आईएसआई का दखल ही स्वीकार क्यों न करना पड़े। सीधी सी बात है कि जब तक सेना का वरदहस्त इमरान पर रहेगा तब तक ही वे सत्ता का सुख भोग पाएंगे। 

इमरान खान ने चुनाव जीतने के बाद जो पहला भाषण दिया था, उसी से संकेत मिल चुके है कि वे भारत से संबंध सुधार में कितनी दिलचस्पी लेंगे। इमरान खान ने कहा था कि भारत यदि दोस्ती की तरफ एक कदम आगे बढ़ाएगा तो पाकिस्तान दो कदम आगे बढ़ाएगा। इमरान क्या नहीं जानते कि भारत ने तो हमेशा ही दोस्ती का एक कदम बढ़ाया है ,लेकिन पकिस्तान ने दो कदम आगे बढ़ाने के बदले पीछे हटाए है। इमरान ने जिस तरह कश्मीर में मानव अधिकारों की बात की एवं सुरक्षा बलों की उपस्थिति पर सवाल उठाया उससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वे उस देश के प्रति कैसा नजरिया रखते है जिसके दिग्गज क्रिकेटर उनके अभिन्न मित्र है। हालाँकि क्रिकेट  के संबंधों को राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, परन्तु खेल के बहाने ही संबंधों के सामन्यीकरण की कोई संभावनापूर्ण रास्ता निकलता है तो उस पर किसी को क्या आपत्ति हो सकती है। 

इमरान चीन के साथ कैसा प्रगाढ़ रिश्ता रखेंगे यह तो उनके पहले भाषण में ही समझ आ चुका है ,जिसमे उन्होंने चीन की तारीफों के पुल बांधे थे। चीन के नक़्शे कदम पर चलकर इमरान सेना को भी खुश रख सकेंगे। चीन ने आतंकवाद के मुद्दे पर हमेशा ही पाकिस्तान के प्रति नरमी दिखाई है और सुरक्षा परिषद् में उसका साथ दिया है। चीन से पाकिस्तान को जो आर्थिक सहायता मिलती है उसे ध्यान में रखते हुए इमरान की सरकार चीन के साथ विनम्रता से ही पेश आएगी। इमरान ने नए पाकिस्तान का जो नारा दिया है ,वह तब ही साकार हो सकता है जब देश की अर्थव्यवस्था सहित अन्य मामलों में वे सुधार ला सके। यह चुनौती आसान नही है। उन्हें नए पाकिस्तान के लिए आतंकवादी संगठनों के खिलाफ भी कार्यवाही करनी होगी। यह एक सुखद संकेत है कि इन चुनावों में हाफिज सईद जैसे आतंकी संगठन को देश की जनता ने नकार दिया है।अब इमरान से देश की जनता को यह आशा है कि वह उनकी इस इच्छा का सम्मान करे।