पशु तस्करी के मुनाफे का इस्तेमाल होता है आतंकी गतिविधियों में

दिंनाक: 22 Aug 2018 17:34:22


झारखण्ड में पशु तस्करी कोई नई बात नहीं है। पश्चिमी और अरब देशों में बीफ की भारी खपत ने इस अवैध कारोबार को एक वैश्विक आयाम प्रदान किया है। इस धंधे के साझेदार दुनिया भर में है और रसूखदार भी हैं। इस काम से होने वाले मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा आतंकी गतिविधियों की फंडिंग के लिए भी होता हैं। झारखंड पुलिस के खुफिया विभाग केे एक अधिकारी से मिली जानकारी होश उड़ा देने वाली है। उनका कहना है कि पशु तस्करी के पैसे का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए होने की बात सामने आई है।


इस अवैध कारोबार पर अलग -अलग जिलों के स्थानीय अख़बार समय-समय पर खबर भी छापते हैं लेकिन इन खबरों का असर एक-दो हफ्ते से ज्यादा नहीं टिक पाता है, और यह धंधा लगातार कई दशकों से यूं ही बिना किसी रोक-टोक के अपनी रफ़्तार से चल रहा है। वैसे तो झारखण्ड से बंगाल मवेशी तस्करी के कई रास्ते हैं लेकिन एक अनुमान के हिसाब से केवल धनबाद जिले के मैथन -बरकार बॉर्डर से लगभग दो सौ मवेशी लदे ट्रकों / कंटेनरों को बंगाल में प्रवेश कराया जाता है और बंगाल से वापस झारखण्ड में कंटेनरों में गो मांस लाया जाता है जिसकी खपत झारखण्ड, बिहार सहित उत्तरप्रदेश में होती है।

झारखण्ड ही नहीं बिहार राज्य में भी इस अवैध कारोबार की असली कर्त्ता-धर्ता 'सोसाइटी फॉर दी प्रिवेंशन ऑफ़ क्रुएल्टी टू एनिमल्स(SPCA)' नामक संस्था है। यह संस्था वास्तव में एक एनजीओ है जो दुनिया भर में पशु क्रूरता पर काम करती है। इस संस्था के नाम पर अलग—अलग राज्यों में लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है। सबके रजिस्ट्रेशन अलग-अलग होते हैं और सबका इलाका भी बंटा हुआ होता है। इनके बारे में एक आम धारणा यह है की यह एक सरकारी संस्था है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। झारखंड में एसपीसीए के नाम पर दो लोग अनिल कुमार सिंह और तरुण कुमार स्वयं को को एसपीसीए इंस्पेक्टर कहते हैं और पुलिस की वर्दी में घूमते है, यह लोग क्षेत्र में बकरी इंस्पेक्टर या मवेशी डॉक्टर के नाम से भी विख्यात हैं। पुलिस जैसी वर्दी पहन कर घूमने के कारण आम जन में यहां तक की कई अधिकारियों में भी यह ग़लतफहमी है की एसपीसीए कोई सरकारी संस्था है और इसके लोग सरकारी अधिकारी हैं।

पिछले वर्ष पाकुड़ जिले में पुलिस कार्रवाई में एक ऐसे ही फर्जी इंस्पेक्टर अलोक कुमार मिश्र को रंगे हाथों पकड़ा गया था। वहीं चार अन्य लोगों को जो स्वयं को एसपीसीए इंस्पेक्टर बताते थे उन्हें गो तस्करों की निशानदेही पर अभियुक्त बनाया गया था जिसमें दुमका जिले के संजीव कुमार मिश्र, गोड्डा जिला का राम प्रकाश सिंह और बांका जिला का सुधीर सिंह और राजेश सिंह शामिल था। हाल में ही कुछ वीडियो और ऑडियो भी सामने आए हैं जिसमें एसपीसीए के नाम पर स्वयं को इंस्पेक्टर बताने वाले दो लोग पैसे के लेन—देन की बात कर रहे हैं।

साभार :- पाञ्चजन्य