संस्कृत सभी भाषाओं की जननी - महर्षि कात्यायन

दिंनाक: 27 Aug 2018 16:20:35


भोपाल(विसंके). पच्चीस भाषाओं के जानकार महर्षि अभय कात्यायन ने कहा कि संस्कृत ही विश्व की समस्त भाषाओं की जननी है। संस्कृत को सीखने के बाद हम दुनिया की किसी भी भाषा को सीख सकते हैं। संस्कृत भाषा ने ही कैलेण्डर दिया। इस भाषा के महत्व के कारण ही इंग्लैंड में स्कूलों में इसे पढ़ाया जा रहा है।


               माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय एवं संस्कृत भारती न्यास, म. प्र. के संयुक्त तत्वावधान में संस्कृत सप्ताह अंतर्गत ‘संस्कृत भारतम् अस्माकं गौरवम्’  विषय पर आयोजित व्याख्यान में श्री कात्यायन ने कहा कि पत्रकारों को सही शब्दों का चयन करना चाहिए, क्योंकि वर्तमान शब्दावली में पोलिटिक्स को राजनीति, कल्चर को संस्कृति, मैरिज को विवाह, लिटरेचर को साहित्य का अनुवाद मान लिया गया है। यह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे भारतीय ग्रंथों में जिस मनोविज्ञान का वर्णन है वह कल्याणकारी है, लेकिन हम मनोविज्ञान में पश्चिम के विद्वानों द्वारा दिये गये सिद्धांतों को पढ़ा रहे हैं। संस्कृत भाषा के ज्ञान के अभाव में हिंदी की भी दुर्दशा हो रही है। हमारे देश में मातृभाषा में शिक्षा नहीं दी जा रही है।

               कार्यक्रम में संस्कृत के प्राध्यापक डॉ. नीलाभ तिवारी ने कहा कि संस्कृत मूल भाषा है इसका सिंचन आवश्यक है। यह भारतीय ज्ञान भंडार को प्राप्त करने की चाबी है। हमारे ऋषि शोधार्थी थे और उनके द्वारा दिये गये मंत्र, सूक्त शोध के निष्कर्ष हैं।

               कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति श्री जगदीश उपासने ने कहा कि भारतीयों की हालत कस्तूरी मृग की तरह है। संस्कृत भाषा में विपुल ज्ञान उनके पास है लेकिन बाहर की दुनिया में हम ज्ञान खोज रहे हैं। संस्कृत सरल भाषा है | भारत की सभी भाषाएं संस्कृत से ही निकली हैं। विद्यार्थियों को संस्कृत अवश्य पढ़ना चाहिए।