आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 27 Aug 2018 15:05:44


कोई देश तब बिखर कर टूटने लगता है जब उसके घर की फूट पतंगों की भांति टिमटिमा कर बुझने लगती है और शासन जन की उपेक्षा करने लगता है, उस सीमा तक जिस सीमा तक की बाहर के शासक से भी आशा नहीं की जा सकती |

  • आचार्य चाणक्य