पेड और फेक न्यूज़ से राजनीतिक दल भी चिंतित - श्री रावत

दिंनाक: 29 Aug 2018 15:06:06


भोपाल(विसंके). देश के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त श्री ओ.पी.रावत ने कहा कि आज मीडिया ही चुनाव पर छाया हुआ है। विश्‍वभर के प्रजातंत्र देशों में जनमत को किस तरह से 'डाटा हार्वेस्टिंग' करके प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, इसके उदाहरण हमारे सामने हैं। आने वाले समय में हमारे देश में  भी चुनाव होना है। चुनाव में पेड न्‍यूज़ और फेक न्‍यूज़ का मुद्दा आम है। राजनीतिक दल भी इसे लेकर चिंतित हैं। इसके निपटने के लिए चुनाव आयोग ने कई कदम उठा रहा है।


     श्री रावत मंगलवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय के सत्रारंभ-2018 में 'निर्वाचन और मीडिया' विषय पर विद्यार्थियों को सम्‍बोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि फेक न्‍यूज़ का उदाहरण हमारे पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है, जब महाभारत युद्ध में घोषणा की गई कि 'अश्‍वत्‍थामा मारा गया' और इसके बाद के शब्‍द शंख ध्‍वनि में नहीं सुनाई दिए। लेकिन आज फेक न्‍यूज़ का ट्रेंड बहुतायत में है।  क्‍या सही है और क्‍या गलत है यह पता ही नहीं लग पाता।

     उन्‍होंने कहा कि पेड न्‍यूज़ को लेकर के मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी बनाई गई है, जिसमें पेड न्‍यूज़ को पता करने की प्रक्रिया तय की गई है। चुनाव आयोग से सोशल मीडिया चला रही कंपनियों ने कहा कि वे चुनाव प्रभावित नहीं होने देंगे और चुनाव के 48 घंटे पहले चुनाव से संबंधित कोई सामग्री सोशल मीडिया पर प्रकाशित नहीं करेंगी। श्री रावत ने कहा कि आने वाले 4 राज्‍यों के चुनाव के दौरान इसका परीक्षण हो जाएगा और इसके बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में भी यह सुनिश्चित हो जाएगा कि सोशल मीडिया से चुनाव प्रभावित न हो।

     उन्‍होंने कहा के संविधान के अनुच्‍छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को निष्‍पक्ष चुनाव निदेशन, अधीक्षण और नियंत्रण के लिए शक्ति दी गई है। उच्‍चतम न्‍यायालय ने इसी अनुच्‍छेद के तहत चुनाव आयोग को शक्ति प्रदान की है कि जब भी कोई परिस्थिति ऐसी आती है जिससे निपटने के लिए स्‍पष्‍ट कानून न हो तो चुनाव आयोग कानून भी बना सकता है। इस 'प्‍लेनरी पॉवर' के कारण ही चुनाव आयोग ने एक राज्‍य में चुनाव के पहले 90 करोड़ रुपये बांटे जाने की घटना के बाद चुनाव न कराने का फैसला लिया था।

     विद्यार्थियों के प्रश्‍नों का जवाब देते हुये श्री रावत ने कहा कि आज हमारे देश में हर काम सूचना प्रौद्योगिकी को लेकर हो रहा है। तब हम वापस मत पत्र से कैसे चुनाव करवा सकते हैं। क्‍या हम वापस बूथ केप्‍चरिंग वाले दौर में जाना चाहते हैं? उन्‍होंने कहा की तकनीक के उपयोग से चुनाव सरल और सुलभ हो गए हैं। भारत में उपयोग की जा रही ईवीएम मशीन विश्‍वभर में अनोखी है और वीवीपेट से जुड़ने के बाद वहीं मतों की संख्‍या को दोबारा जांच सकते हैं। ईवीएम में टेम्‍परिंग नहीं हो सकती, उसमें ऑसीलेटरी सर्किट नहीं हैं। इस कारण मशीन को किसी दूसरी मशीन से नहीं जोड़ा जा सकता। टेम्‍परिंग किये जाने पर वह लॉक हो जाएगी।

     उन्‍होंने कहा कि चुनावी खर्च पर नियंत्रण के लिए व्‍यापक विचार-विमर्श किए जाने की जरूरत है। चुनाव आयोग, चुनाव में धन का दुरूपयोग किये जाने पर नियंत्रण पर लगातार प्रयास कर रहा है। नोटा को लेकर पूछे गये प्रश्‍न पर उन्‍होंने कहा कि उच्‍चतम न्‍यायालय के आदेश के तहत् नोटा लागू किया गया था। 'एक देश एक चुनाव' के सवाल पर उन्‍होंने कहा कि देश में एक साथ चुनाव कराने के लिये लगभग 32 लाख ईवीएम मशीन चाहिए। अभी आयोग के पास 15-16 लाख मशीनें हैं। इसके अलावा संवैधानिक प्रावधानों में भी संशोधन आवश्‍यक है। एक साथ चुनाव कराने के लिए केन्‍द्रीय पुलिस बल भी बड़ी संख्‍या में चाहिए।

     अपराधियों के चुनाव लड़ने को लेकर उन्‍होंने कहा कि इस बारे में आयोग ने एक जनहित याचिका पर जवाब दिया है कि सभी प्रकार के दोषी, जिनको सजा हो चुकी है उनको आजीवन चुनाव लड़ने रोका जाए और जिनके विरुद्ध आरोप-पत्र जारी हो चुका है उन पर भी चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि सोशल मीडिया से प्रसारित होने वाली चुनाव संबंधित सामग्रियों को लेकर विशेषज्ञ समूह बनाये जाएं, जिसकी रिपोर्ट आने वाली है।

     कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए कुलपति श्री जगदीश उपासने ने कहा कि हमारा चुनाव आयोग दुनिया के उच्‍चतम चुनाव आयोगों में से एक है। कार्यक्रम का संचालन कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा ने किया। कुलपति श्री उपासने ने श्री रावत शॉल, श्रीफल एवं स्‍मृति चिह्न भेंट कर सम्‍मानित किया।

 

मीडिया को जवाबदेह बनाने की जिम्‍मेदारी युवा पत्रकारों पर - श्री महाजन


एमसीयू के नवागत विद्यार्थियों के प्रबोधन का सत्रारंभ समारोह प्रारंभ


राज्‍यसभा टी.वी. के सम्‍पादक श्री राहुल महाजन ने कहा कि पहले पत्रकारों को सम्‍मान मिलता था, लेकिन अब परिस्थिति बदलती जा रही है। आम जनता पत्रकारों को उस नजर से नहीं देखती, शक की नजरों से देखने लगी है। पत्रकारिता ही एक ऐसा पेशा है, जिसमें लोगों की भलाई करने के लिए सबसे ज्‍यादा जगह है। उन्‍होंने विद्यार्थियों से कहा कि इस पेशे को साफ़-सुधरा बनाने की जिम्मेदारी नये पत्रकारों की है। पत्रकारों को लिखना कोई भी सीखा सकता है परन्तु पत्रकारिता में सही राह पर चलने का प्रण हमें खुद लेना पड़ेगा।

          श्री महाजन ने यह विचार माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय के सत्रारंभ समारोह में मुख्‍य वक्‍ता के रूप में व्‍यक्‍त किए। शुभारंभ सत्र के मुख्‍य अतिथि वरिष्‍ठ पत्रकार और सम्‍पादक श्री महेश श्रीवास्‍तव ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता विदेशी पत्रकारिता से अलग है। हमें विदेशी पत्रकारिता से तकनीक और नवाचार सीखना चाहिए लेकिन व्‍यवसायिकता से दूर रहना चाहिए। पत्रकारिता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाये, लेकिन लोकहित और राष्‍ट्र कल्‍याण की बात है तो पत्रकार को सकारात्‍मक भी देखना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो पत्रकार समाज के भी प्रतिपक्ष बन जाते हैं।

          उन्‍होंने कहा कि पत्रकारिता धर्म है, इसे धारण किया जाता है, ज्ञान की तरह सम्‍प्रेषण किया जाता है, सत्‍य इसमें संघर्ष की प्रेरणा देता है और संघर्ष अभय प्रदान करता है। उन्‍होंने कहा कि पत्रकार जीवनभर शिष्‍य बना रहता है लेकिन गुरु की गरिमा को प्राप्‍त करता है। वह पूर्ण नहीं है लेकिन अपूर्ण भी नहीं होता है।

          कार्यक्रम के अध्‍यक्षीय उद्बोधन में कुलपति श्री जगदीश उपासने ने कहा कि हम किसी भी माध्‍यम से भाषा को समृद्ध कर सकते हैं। पत्रकारिता में सारी ताकत शब्‍दों में ही है, शब्‍द के सहारे पत्रकार अपनी अभिव्‍यक्ति करते हैं। तथ्‍यों की शुद्धता रहना चाहिए और अपने विचार देते समय लोकहित, जनहित का ध्‍यान रखना चाहिए। किताब पढ़ने के साथ ही सुनने एवं ऑनलाइन माध्यमों के माध्यम से भी आधुनिक समय में शब्द भंडार को बढ़ाया जा सकता है। एक अच्छे वक्ता की ताकत उसका शब्द भंडार होती है। उन्‍होंने अमेरिका में हुए ट्विन टावर पर हुए हवाई हमले का उल्‍लेख करते हुए देशहित के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्‍होंने बताया कि इस हमले में केवल हमले की फोटो सामने आयी जो एक फ्रीलांसर विडियोग्राफर ने खींची थी और दूसरी फोटो ग्राउण्‍ड जीरो पर श्रृद्धांजलि  कार्यक्रम की थी। इसके बीच घटी घटना को मीडिया ने बिल्कुल नही दिखाया। इसके पीछे अमेरिका के पत्रकारों की राष्ट्रहित में खड़े होने की मंशा थी।

          उन्‍होंने कहा कि हमेशा जनपक्षीय पत्रकारिता करना चाहिए। पत्रकार को कॉपी लिखना, टाईपिंग अनुवाद करना और कम्‍प्‍यूटर पर काम करना आना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि पत्रकार के पास ही वह कौशल होता है, जिसमें वह समाज को अपना विचार बनाने के लिए तथ्‍य सामने रखता है। अभी तक पत्रकारिता इसलिए समृद्ध हुई क्‍योंकि उसने जनता के हित को नहीं छोड़ा लेकिन अब घालमेल होने लगा है।

          कार्यक्रम में कुलपति श्री उपासने ने श्री श्रीवास्‍तव, श्री राहुल महाजन को शॉल,श्रीफल एवं प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्‍मानित किया। मंच पर कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा भी उपस्थित थे।  विश्‍वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी ने कार्यक्रम का संचालन किया। प्रारंभ में विद्यार्थियों ने सरस्‍वती वंदना प्रस्‍तुत की।

भारत अपनी उत्‍पादन क्षमता बढ़ाए- श्री शर्मा

          सत्रारंभ समारोह में 'बदलता आर्थिक परिदृश्‍य और भारत' विषय पर विद्यार्थियों को सम्‍बोधित करते हुए पेसिफिक विश्‍वविद्यालय, उदयपुर के कुलपति श्री भगवती प्रकाश शर्मा ने कहा कि भारतीय युवा सम्‍पूर्ण विश्‍व की आशा की किरण है। क्‍योंकि भारत के पास युवाओं की फौज है और दुनियां के फॉच्‍यून 500 कंपनियों के सी.ई.ओ. और प्रमुख भारतीय या भारतीय मूल के हैं।

          आज इटली, ब्राजील और फ्रांस को पीछे छोड़कर भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था विश्‍व की छठी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बन गई है। क्रय क्षमता में भारत विश्‍व में चीन, अमेरिका के बाद तीसरे स्‍थान पर है। वहीं उत्‍पादन के मामले में चीन पहला, अमेरिका दूसरा और जापान तीसरे स्‍थान पर है। भारत को जरूरत है कि वो अपनी उत्‍पादन क्षमता को बढ़ाये और विश्‍व का अग्रणी बने। भारत में हर साल सवा करोड़ युवाओं को रोजगार की जरूरत है, इसलिए उद्यमिता को प्रोत्‍साहित किया जाना चाहिए।

          उन्‍होंने कहा कि विश्‍व की अर्थव्‍यवस्‍था में प्रतिष्ठित स्‍थान पाना है तो युवाओं में उद्यमिता का बीजारोपण भी करना होगा। उन्‍होंने तकनीकी राष्‍ट्रवाद की भी चर्चा की, जिनमें कोरिया, चाइना और जापान विश्‍व के अग्रणी देश हैं। उन्‍होंने अर्थशास्‍त्रीय राष्‍ट्रवाद पर भी चर्चा की और कहा कि दुनिया में 'ट्रेड वॉर' चल रहा है। हर विकसित देश अपने से छोटे देशों को व्‍यापार के जरिये गुलाम बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्‍होंने बताया कि जापान में सिर्फ 4 प्रतिशत विदेशी कारें बिकती हैं, जिसे वही लोग खरीदते हैं, जिन्‍हें कार संग्रह का शौक है। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के उत्‍थान के लिए भी इसी तरह के अर्थशास्‍त्रीय राष्‍ट्रवाद की आवश्‍यकता है। आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का होगा। ऐसे में भारत को जरूरत है कि वो अपना तकनीकी विकास कर निर्यात शक्ति को बढ़ाए और आने वाली राष्‍ट्रव्‍यापी बेरोजगारी से लड़ने के लिए खुद को तैयार करे। सत्र का संचालन मीडिया प्रबंधन, विभागाध्‍यक्ष डॉ. अविनाश वाजपेयी ने किया।

मीडिया ने हमेशा निभाई अपनी भूमिका- श्री भटनागर

          सत्रारंभ कार्यक्रम के चतुर्थ सत्र में "जम्मू कश्मीर : वर्तमान व भविष्य" विषय पर बोलते हुए जम्मू व कश्मीर अध्ययन केंद्र के निदेशक एवं हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी के पूर्व संपादक श्री आशुतोष भटनागर ने बोलते हुए कहा कि जम्मू व कश्मीर पत्रकारिता में रुचि का विषय रहा है। जब-जब  देश किसी चौराहे पर आकार खड़ा हुआ मीडिया ने अपनी भूमिका निभाई। आज जम्मू कश्मीर को लेकर जो विवाद है वो सूचनाओं के अभाव के कारण है। आज केवल राज्‍य का 47 प्रतिशत हिस्सा ही भारत के पास है जबकि 35 प्रतिशत हिस्‍सा पाक अधिकृत जम्‍मू एवं कश्‍मीर के रूप में पाकिस्‍तान के कब्‍जे में है, बाकी हिस्‍सा चीन के कब्‍जे में है। सत्र का संचालन संचार शोध विभागाध्‍यक्ष डॉ. मोनिका वर्मा ने किया।

पूर्वाग्रह त्‍यागकर करें पत्रकारिता- श्री अंसारी

'टीवी एंकरिंग की चुनौतियां' विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए आज तक के प्रसिद्ध एंकर श्री सईद अंसारी ने कहा आज तकनीक ने सभी को पत्रकार बना दिया है, ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती यही है कि हम अपनी निष्पक्षता को बनाए रखें। एक पत्रकार के नाते आप सभी के दर्द को समझें। धर्म-समुदाय से ऊपर उठकर विश्वास के साथ पत्रकारिता करें और ऐसा तभी संभव है जब आप ईमानदार होंगे। हर पत्रकार चाहता है कि रिपोर्टिंग के दौरान उसे सम्मान मिले। ऐसा तभी होगा जब आप सभी विचारधाराओं से ऊपर उठकर, किसी भी तरह के पूर्वाग्रह को त्यागकर, तथ्यों की अच्छे से जांच-पड़ताल कर निष्पक्ष पत्रकारिता करेंगे।

          टेलीविजन पत्रकारिता में आपको किसी भी समय रिपोर्टिंग और एंकरिंग के लिए खड़ा कर दिया जाता है। किसी भी विषय पर आपको कभी भी बोलना पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए आपको तकनीकी रूप से सक्षम होना पड़ेगा। खूब पढ़ें और सवाल पूछना कभी ना भूलें, चाहे आप कितनी ही भीड़ में क्यों न हो।सत्र का संचालन विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के विभागाध्‍यक्ष डॉ. पवित्र श्रीवास्‍तव ने किया।

साइबर सिक्‍योरिटी आज सबसे बड़ी चिंता - श्री अग्रवाल

          'वैश्विक आतंकवाद, सूचना प्रौद्योगिकी और संचार' विषयक सत्र में श्री विवेक अग्रवाल ने कहा कि आज के समय में साइबर सिक्‍योरिटी सबसे बड़ा चिंता का विषय है। आज आई.एस.आई.एस., लिट्टे जैसे तमाम आतंकवादी संगठन इंटरनेट एवं साइबर सिस्‍टम का दुरूपयोग कर अपनी आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। आतंकवादी संगठन युवाओं को जोड़ने के लिए विभिन्‍न सोशल मीडिया ऐप, ऑनलाइन गैम्‍स का सहारा ले रहे हैं, जिनके जाल में युवा धर्म के नाम पर फंस जाता है। हैकिंग के माध्‍यम से किसी भी बैंकिंग सिस्‍टम, ए.टी.एम. हेल्‍थ सिस्‍टम, वाटर सप्‍लाई सिस्‍टम, बिजली सप्‍लाई सिस्‍टम को आसानी से चंद सेकण्‍डों में हैक किया जा सकता है। हमें इंटरनेट एवं तकनीक के दुरूपयोग एवं नुकसान के बारे में जागरूक रहने की आवश्‍यकता है। कार्यक्रम का संचालन नवीन मीडिया प्रोद्योगिकी विभाग की विभागाध्‍यक्ष डॉ. पी.शशिकला ने किया।