आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 03 Aug 2018 12:58:05


ख्याति-प्रेम वह प्यास है जो कभी नहीं बुझती । वह अगस्त ऋषि की भांति सागर को पीकर भी शांत नहीं होती


  •  - मुंशी प्रेमचंद