आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 31 Aug 2018 13:58:12


कुरुते गंगासागर गमनं

व्रत परिपालनम् अथवा दानम् ।

ज्ञान विहीनम् सर्वम् तेन

मुक्ति न भवति जन्म शतेन ।।

अर्थात,  चाहे तीर्थ जायें,उपवास करें या दान करें ,

ज्ञान नहीं है तो यह फलदायी नहीं होगा,

             और सौ जन्मों में भी उद्धार नहीं होगा  ।

  • आदि शंकराचार्य