प्रेरक: बच्चों की मुस्कान के खातिर

दिंनाक: 07 Aug 2018 16:47:43



भोपाल(विसंके). इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मैनेजमेंट में एमबीए और यस फाउंडेशन की फैलोशिप करने के बाद 70 हजार रुपए महीने की नौकरी छोड़ कर 23 साल कीं  स्मृति शर्मा इन दिनों रातीबड़ क्षेत्र के गांवों में बच्चों के बीच काम कर रही हैं। इन गांवों में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को फिर से दाखिला दिलवाने से लेकर उनकी पढ़ाई और अन्य समस्याओं को हल करना स्मृति का रोजमर्रा का काम है। स्मृति गांव की आंगनबाड़ी की एक दीवार को स्क्रीन के रूप में एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट वीडियो प्रदर्शित करती हंै। वे अपनी स्किल का उपयोग कर इन ग्रामीणों की भाषा में कुछ वीडियो भी बना रही हैं, ताकि ग्रामीणों को उन्हीं की भाषा में जानकारियां दी जा सकें। स्मृति के इस काम में उसके कुछ मित्र मदद कर रहे हैं। मित्रों ने उसके लिए प्रोजेक्टर और अन्य उपकरणों की व्यवस्था कर ली है। वह इनके सहारे गांव में एक एम्फीथिएटर डेवलप कर रही है, ताकि इस पर फिल्म दिखाई जा सके। 


स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को दिलाया प्रवेश, सिखा रहीं वीडियो बनाना, अब गांव में फिल्म दिखाने बनाएंगी एम्फीथिएटर 

अपनी पसंद का ऐसा काम करना था, जहां समाज के वंचित लोगों के लिए कुछ सकारात्मक कार्य किया जा सके 

यह था टर्निंग पॉइंट : मूल रूप से पिपरिया की रहने वालीं स्मृति बताती हंै कि वे भी एक आम लड़की की तरह करियर बनाने के लिए इंदौर गई थीं। वहां बीकॉम करने के बाद डीएवीवी के ईएमआरसी में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मैनेजमेंट में एमबीए में एडमिशन लिया। इंदौर में भंवरकुआं चौराहे के पास साईं बाबा के मंदिर जाती थीं। वहां पीछे की बस्ती के बच्चे और उनकी हालत देखकर मन दु:खी होता था। कॉलेज में असाइनमेंट के लिए जब एक डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाना था तो उसी बस्ती का चयन किया। वहीं लगा कि समाज के वंचित लोगों के लिए कुछ करना चाहिए। इसके बाद कैंपस इंटरव्यू के जरिए नेटवर्क-18 ग्रुप के चैनल ‘रिश्ते’ में सिलेक्शन हो गया, लेकिन ज्वाइन करने से मना कर दिया। इसके बाद यस फाउंडेशन की फैलोशिप की। फैलोशिप कंप्लीट करने के बाद वहां 70 हजार रुपए महीने की नौकरी करने की बजाय उसने अपनी पसंद का ऐसा काम तलाशना शुरू किया, जहां समाज के वंचित लोगों के लिए कुछ पॉजिटिव किया जा सके। स्मृति के पिता आरवी शर्मा सिवनी मालवा में असिस्टेंट डेवलपमेंट ऑफिसर हैं। 

भोपाल आकर पूरी हुई तलाश 

मित्रों और परिजन से चर्चा करके वह भोपाल के केकड़िया गांव में आ गईं। यहां ब्रिटेन से लौटे अमिताभ सोनी पहले से ही बच्चों के एजुकेशन के लिए काम कर रहे हैं। अमिताभ के साथ वे भी यहां अक्टूबर से बच्चों और महिलाओं के बीच सक्रिय हो गईं। 

20 बच्चों को एडमिशन दिलाया 

स्मृति ने गांव के 20 बच्चे जो घर के कामकाज के कारण पढ़ाई छोड़ने का मन बना रहे थे, उन्हें शारदा विहार स्कूल में एडमिशन दिलवाया। इसके लिए उनके मां- पिता की लंबी काउंसिलिंग करना पड़ी।