संघ प्रमुख की बेबाक राय से बदलेगी आम जन में संघ के प्रति धारणा!- कृष्णमोहन झा

दिंनाक: 24 Sep 2018 15:22:56


अभी तक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए समर्पित संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सारे महत्वपूर्ण कार्यक्रम उसके मुख्यालय नागपुर तक ही सीमित रहा करते थे, परंतु हाल ही में उसने अनूठी व्याख्यानमाला का आयोजन देश की राजधानी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में किया। इस व्याख्यान माला का विषय था "भविष्य का भारत  और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का द्रष्टिकोण" । यह कार्यक्रम इस अर्थ में अनूठा था कि इसमें संघ के अलोचकों को भी आमंत्रित किया गया था औऱ किसी को भी अपने विचार व्यक्त करने की  पाबंदी स्वीकार करने की विवशता नही थी। कार्यक्रम सभी के लिए खुला था। कार्यक्रम में संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत ने अपने विचार व्यक्त करते हुए संघ के ऊपर लगने वाले सारे आरोपो, संघ के कार्यक्रमों एवं नीतियों के प्रति व्यक्त की जाने वाली सारी शंकाओं का समाधान  सहज एवं सरल भाषा मे करने में जिस प्रकार सफलता अर्जित की उसकी सराहना की जानी चाहिए। संघ के ऊपर चाहे जिस तरह के आरोप लगाए जाते रहे हो ,परंतु कार्यक्रम में संघ प्रमुख के विचारों में अपने आलोचकों को करारा जवाब देने का कोई भाव नही था। उन्होंने पूरी गरिमा के साथ संघ के एजेंडे को प्रस्तुत किया ओर कही भी ऐसा प्रतीत नही हुआ कि संघ के प्रति पूर्वाग्रह रखने वालों के प्रति उन्हें शिकायत हो। उन्होंने संघ के पक्ष को जिस तरह मजबूत तर्को ,परंतु अतिशय विनम्रता के साथ प्रस्तुत किया  उससे तो संघ के विरोधी भी कायल हुए बिना नही रहे होंगे।


 संघ के जो आलोचक संघ पर संकीर्ण विचारधारा रखने का आरोप लगाते रहे है। उन्हें भी वे यह संदेश देने में सफल रहे है कि संघ के द्वार सभी के लिए खुले रहे है। व्याख्यान माला के समापन पर उन्होंने मीडिया को भी संबोधित किया और उसमे संघ प्रमुख मोहन भागवत ने उन सवालों का भी विनम्रता से जवाब देकर प्रशंसा अर्जित की जिन सवालों पर असहज होना स्वभाविक था। संरसंघचालक के उदबोधन में सबके लिए अपनत्व का भाव था। न कोई छुपाव न ,कोई दुराभाव,। संघ प्रमुख ने अपनी अनूठी संवाद शैली से हर श्रोता तक अपनी बात पहुचाने में सफल रहे है। कार्यक्रम में ऐसे भी अवसर आए जब संघ के आलोचकों को भी संघ प्रमुख के विचारों से सहमत होने में कोई संकोच नही था। भागवत ने संघ के आलोचकों को जवाब देने की बजाय संघ का द्रष्टिकोण सबके सामने रखने पर अधिक जोर दिया।

संघ का यह आयोजन अपने आप मे इतनी भव्यता एवं गरिमा से परिपूर्ण था कि उसमे खामियां ढूढने की गुंजाइस नही है। न विषय वस्तु पर सवाल उठाए जा सकते है न ही व्याख्यानमाला में दिए गए उदबोधनों पर। संघ ने यह आयोजन विरोधी विचारधारा के लोगो के लिए भी  खुला रखा था, लेकिन फिर भी विपक्षी दलों ने इससे दूरियां बनाकर रखने का फैसला पहले ही कर लिया था। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि संघ ने इसमे मीडिया को भी जोड़ा था। इससे संघ यह संदेश देने में सफल रहा कि वह अपनी पुरानी परिपाटी से हटकर आगे की राह तय करने का मन बना चुका है। 

गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी  पिछले काफी समय से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर तीखे प्रहार कर रहे है। कभी वे संघ में महिलाओं को जगह नही देने की आलोचना करते है तो कभी संघ की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से करते है। कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम जब केंद्रीय मंत्री थे तब उन्होंने संघ पर भगवा आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया था। संघ के पिछले एक कार्यक्रम में जब पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को आमंत्रित किया गया था जब भी कांग्रेस ने उन्हें कार्यक्रम में भाग न लेने का परामर्श दे डाला था। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने तो उन्हें परामर्श दिया था कि जब वे अपना उदबोधन दे तब वे संघ की खामियों पर विशेष प्रकाश डाले।  प्रणब ने तमाम आपत्तियों को दरकिनार कर संघ के कार्यक्रम में शिरकत की तो उन्होंने ऐसा कुछ भी नही कहा जो संघ की तारीफ का परिचायक माना जा सके। उन्होंने एक विद्वान वक्ता के रूप में अपने विचार रखे जिसमे तटस्थता का भाव भी छलक रहा था। उन्होंने संघ की बुराई भी नही की लेकिन फिर भी कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आश्चर्यजनक रूप से प्रतिक्रिया दी कि प्रणब  मुखर्जी ने अपने उद्बोधन में संघ को आइना दिखा दिया। 

अगर नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित उक्त व्याख्यान माला में संघ प्रमुख द्वारा व्यक्त किए गए विचारों की विवेचना निष्पक्ष भाव से की जाए तो यह निष्कर्ष निकालना गलत नही होगा कि संघ अपने अदंर महत्वपूर्ण बदलाव करने का मन बना चुका है ,जिससे उसकी स्वीकार्यता के दायरे में औऱ वृद्धि हो। लोगो में उसकी नीतियों एवं कार्यक्रमों के बारे में जानने की जिज्ञासा जाग्रत हो। संघ के आलोचक उसके प्रति पूर्वग्रही द्रष्टिकोण का परित्याग करें। निश्चित रूप से संघ ने इस कार्यक्रम के आयोजन से एक नई शुरुआत की है। संघ ने जिस उद्देश्यों के लिए अपने आप को समर्पित किया है। उसकी पूर्ति की दिशा में यह आयोजन एक महवपूर्ण पड़ाव साबित हुआ है। इस कार्यक्रम से विपक्ष ने दूरी बनाकर रखी ,इससे विपक्ष को कोई फायदा मिला या नही यह नही कहा जा सकता लेकिन ,इतना तय है कि संघ अपनी बात रखने में सफल रहा। विपक्ष के नेताओं ने यदि कार्यक्रम में आकर उदारता दिखाई होती तो निश्चित रूप से वे इस आरोप से बच सकते थे कि उनमे संघ के प्रति पूर्वाग्रह  है।

व्याख्यानमाला में डॉ. मोहन भागवत ने सबसे पहले व महत्वपूर्ण बात कही कि वैदिक काल मे हिन्दू नाम का कोई धर्म नही था औऱ जिस दिन हम कहेंगे कि मुसलमान नही चाहिए तो उस दिन हिंदुत्व भी नही बचेगा। उन्होंने कहा कि सभी मतों के तत्वाधान को हम हिन्दू कहते है। कुछ लोग कहते है कि हिन्दू मत कहो भारतीय कहो, तो इसमें भी बात एक ही है। हिन्दू शब्द कहने से भारतीय स्वभाव नही बदलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ कभी सरकार को निर्देशित नही करता है।यदि भाजपा सलाह मांगती है तो हम सलाह देते है, लेकिन दल एवं सरकार की नीतियों पर हमारा कोई दखल नही है। भागवत ने ये सवाल भी किया कि लोगो के सोचने का विषय है कि संघ के स्वयंसेवक सिर्फ भाजपा में ही शामिल होना पसंद करते है। इतना ही नही 

संघ प्रमुख ने कार्यक्रम में ऐसे विवादित मुद्दों पर भी खुलकर अपने विचार रखे जिनके बारे में हमेशा संघ की आलोचना की जाती है।गौरक्षा के नाम पर हिंसा को उन्होंने गलत ठहराया तो एससी एसटी के लिए आरक्षण का समर्थन भी किया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षित वर्गों के लोगों को ही तय करना है कि उन्हें कब तक आरक्षण चाहिए। भागवत ने कहा कि भारत मे शक्ति का केंद्र संविधान है और ये देश संविधान के अनुसार ही चलेगा। कांग्रेस भले ही संघ पर हमलावर रहती है लेकिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने यह स्वीकार करने में संकोच नही किया कि कांग्रेस का स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कुल मिलाकर संघ के मुख्यालय नागपुर से बाहर देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित हुआ यह कार्यक्रम संघ की कट्टर छवि को बदलकर उदार छवि बनाने में सफल जरूर हुआ है। यह कार्यक्रम संघ के अब तक के कार्यक्रमों में सबसे अहम कार्यक्रम माना जा सकता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जो उदार छवि पेश की है आगे भी उम्मीद की जानी चाहिए कि उनके नेतृत्व में संघ की रीति नीति में आगे चलकर ऐसे कई बदलाव देखने को मिलेंगे जो उस पर निशाना बनाने वालों में भी बदलाव लाने में प्रेरित करेंगे।