आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 25 Sep 2018 15:40:36


भारतीय परंपरा मानव को 'एकात्म' मानती हैं | एकात्म, यानी जिसको बांटा नहीं जा सकता | न बांटी जा सकने वाली इकाई को 'एकात्म' कहते हैं | समाज और व्यक्ति इस प्रकार जुड़े हुए हैं, उन्हें अलग अलग नहीं किया जा सकता |


  • पं. दीनदयाल उपाध्याय