आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 25 Jan 2019 13:11:35


मानव स्वयं पर अनुशासन के कठोरतम बंधन तब बड़े आनंद से स्वीकार करता है , जब उसे यह अनुभूती होती है कि उसके द्वारा कोई महान कार्य होने जा रहा है ।

                              - माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी)