पत्रलेखन के माध्यम से दें समाज में होने वाली घटनाओं पर प्रतिक्रिया - श्री तोमर

दिंनाक: 07 Jan 2019 17:07:02

मामा माणिकचन्द वाजपेयी स्मृति न्यास द्वारा आयोजित पत्रलेखन एवं नागरिक पत्रकारिता प्रतियोगिता एवं सम्मान समारोह


भोपाल(विसंके). पत्र लेखन बहुत ही महत्वपूर्ण विधा है। हमें इसकी शक्ति को पहचानना चाहिए। अनेक महत्वपूर्ण मौकों पर पत्र लेखकों द्वारा कई बड़े परिवर्तन अपने पत्र के माध्यम से कराए हैं। हमें समाज में जो भी अप्रिय लगे पत्र लेखन के माध्यम से उसके बारे में अवश्य लिखना चाहिए। पत्र को कोई भी समाचार पत्र प्रकाशित भले ही न कर,े लेकिन उसका असर जरूर होता है। उक्ताशय के विचार वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रेमचंद सृजनपीठ उज्जैन के पूर्व निदेशक जगदीश तोमर ने रविवार को मामा माणिकचन्द वाजपेयी स्मृति न्यास द्वारा आयोजित पत्रलेखन एवं नागरिक पत्रकारिता सम्मान समारोह के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता न्यास के अध्यक्ष दीपक सचेती ने की। वरिष्ठ स्तम्भ लेखक दिनेश चाकणकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।


राष्ट्रोत्थान न्यास भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार श्री तोमर ने मामा जी को नमन करते हुए कहा कि मामाजी तिलक जी, माखनलाल चतुर्वेदी, गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे महान पत्रकारों की श्रेणी के पत्रकार थे, जिन्होंने हमेशा राष्ट्रहित को ध्येय मानकर ही पत्रकारिता की है। श्री तोमर ने कहा कि वर्तमान में पत्रकारिता के सामने अपने राष्ट्रीय स्वाभिमान, संस्कृति एवं अस्मिता को बचाने की बहुत बड़ी चुनौती है। क्योंकि वर्तमान में बड़े स्तर पर तथाकथित पत्रकार राष्ट्रहित को ताक पर रखकर देश में तो पत्रकारिता कर ही रहे हैं। साथ ही विदेशों में भी भारत विरोधी तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। पत्र लेखक अखबार नहीं खोल सकते, लेकिन अखबारों में पत्र के माध्यम से दखल तो कर ही सकते हैं। वरिष्ठ स्तम्भ लेखक दिनेश चाकणकर ने कहा कि मामाजी का व्यक्तित्व बहुत ही सहज व सरल था, मामाजी के मार्गदर्शन में ही पत्रलेखन से शुरुआत कर अनेक नामी गिरामी पत्रकार बड़े-बड़े अखबारों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को भी समय-समय पर समाज में घटित होने वाली घटनाओं पर पत्र लेखन के माध्यम से प्रतिक्रिया देनी चाहिए। कार्यक्रम के प्रारंभ में एकलगीत नारायण प्रजापति ने प्रस्तुत किया तथा कार्यक्रम की रूपरेखा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ग्वालियर विभाग के प्रचार प्रमुख सुधीर शर्मा ने रखी। कार्यक्रम का संचालन रमेश सेन ने किया तथा आभार प्रदर्शन जवाहर प्रजापति ने किया।  स्पर्धा के निर्णायक वरिष्ठ पत्रकार हरीश उपाध्याय एवं दिनेश राव रहे। 


पत्रलेखन में वाजपेयी तो स्तंभलेखन में भूमिका रहीं प्रथम


पत्रलेखन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान राजकिशोर वाजपेयी, द्वितीय स्थान सुरेश हिन्दुस्तानी एवं तृतीय स्थान आदेश भारद्वाज को मिला तथा स्तम्भ लेखन में प्रथम स्थान भूमिका धनवानी, द्वितीय स्थान विवेक पाठक एवं तृतीय स्थान सोमेश वाधवानी को मिला। सभी विजयी प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके साथ ही प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने मामा माणिकचन्द वाजपेयी स्मृति सेवा न्यास द्वारा प्रकाशित मामाजी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक समर्पण का विमोचन किया गया। इस पुस्तक में मामाजी के जीवन से जुड़े पहलुओं एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया है।