धर्मसंसद में शबरीमला मंदिर आंदोलन और हिन्दू समाज को तोड़ने के प्रयासों पर प्रस्ताव पारित ।

दिंनाक: 01 Feb 2019 12:05:47


प्रयागराज में आयोजित कुम्भ देश भर के साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए गंगा में डुबकी लगाने के साथ धर्म सम्बन्धी विषयों पर चर्चा परिचर्चा का भी केंद्र है। इसी क्रम में 31 जनवरी 2019 को प्रयागराज में विश्व हिन्दू परिषद द्वारा धर्मसंसद आयोजित की गई, इस धर्मसंसद में भारत भर के साधु-संतों से देश में चल रही धार्मिक विषयों पर चर्चा के बाद दो प्रस्ताव पारित किये।

 


पहले प्रस्ताव का विषय - 'शबरीमला में परम्परा और आस्था की रक्षा करने का संघर्ष- अयोध्या आन्दोलन के समकक्ष' रहा। इस प्रस्ताव को स्वामी परमात्मानंद ने प्रस्तावित किया और स्वामी अयप्पा दास ने इसका अनुमोदन किया।

इस प्रस्ताव में यह बात कही गई की शबरीमला सहित भारत के प्रत्येक मंदिर का अपना इतिहास एवं विशिष्ट परंपरा हैं, जो भारत के ऋषि मुनियों द्वारा स्थापित है। सदियों से हिंदू समाज इन परंपराओं के आधार पर श्रद्धा से पूजन करता आया है मगर पिछले कुछ वर्षों में यह माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि हिंदुओं की परंपराएं रूढ़ है और इन्हें कलंकित करने का प्रयास किया जा रहा है, सबरीमाला मंदिर इसका ताजा उदाहरण है। कभी पर्यावरण तो कभी आधुनिकता के नाम पर इस तरह के विवाद जानबूझकर खड़े किए जाते हैं और हिंदू परंपराओं के प्रति समाज में और अश्रद्धा और अविश्वास का निर्माण कर बदनाम किया जाता है ।

प्रस्ताव में सबरीमाला मंदिर में 1950 में ईसाईयों द्वारा आग लगाए जाने और 1983 में मंदिर की जमीन पर क्रॉस गाड़े जाने तथा अभी भी हजारों मुस्लिम महिलाओं द्वारा 'महिला दीवार' सबरीमाला के विरुद्ध बनाए जाने जैसी घटनाओं का जिक्र किया गया और कहा गया कि यह हिंदू समाज के प्रति षड्यंत्र को दिखाते हैं।

प्रस्ताव में केरल सरकार पर न्यायपालिका की आड़ में भगवान अय्यप्पा के भक्तों पर दमन चक्र चलाने की बात कही गई, जिसके कारण 5 भक्तों को जान से हाथ धोना पड़ा, सैकड़ों भक्त गिरफ्तार किए गए 5000 प्रकरणों के माध्यम से लगभग 15000 भक्तों को गिरफ्तार करने का षड्यंत्र रचा गया। लाखों अयप्पा भक्तों ने श्रृंखला बनाकर अपने प्रदर्शनों के माध्यम से मंदिर की पुरातन परंपरा को बनाए रखने के लिए संघर्ष किया, किंतु केरल सरकार द्वारा संतों का अपमान करने के लिए जिनकी श्रद्धा नहीं है उनको रात में भेष बदल कर जबरन छल पूर्वक दर्शन करवाए गए।

स्वामी परमात्मा नंद जी ने प्रस्तावित किया कि भारत का संत समाज अय्यप्पा भक्तों विशेष तौर पर हिंदू महिलाओं, एन.एस.एस., के.पी.एम, एस.,एस.एन. डी.पी., आर्य समाज, पीपुल ऑफ धर्मा तथा अन्य कई हिंदू संगठनों के इस पावन संघर्ष का अभिनंदन करता है जिन्होंने सबरीमाला के संघर्ष को अयोध्या आंदोलन के समकक्ष खड़ा कर दिया है।

इतना सब कुछ होने के बाद हिंदू समाज की धारणा बनी है कि केरल की वामपंथी सरकार जेहादी तत्वों, वामपंथी अराजक गुंडों तथा प्रशासन के माध्यम से भगवान अय्यप्पा के भक्तों पर दमनचक्र चला रही है ।धर्म संसद ने केरल सरकार को हिन्दू परंपराओं व मान्याताओं के पालन में हस्तक्षेप नहीं करने को कहा साथ हीं केरल सरकार की इस दमनचक्र के विरोध में समस्त हिन्दू समाज से एक होकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया ।


हिन्दू समाज को तोड़ने का प्रयास

दूसरे प्रस्ताव में हिंदू समाज के विघटन के षड्यंत्र पर चर्चा हुई इस प्रस्ताव में कहा गया कि हिंदू समाज की एकता को तोड़ने के लिए इस्लामिक शक्तियां, चर्च तथा साम्यवादी संगठन हमेशा से षडयंत्र करते रहे हैं। अब कुछ राजनैतिक दल व संगठन भी अपने स्वार्थों के कारण लोकलुभावन नारे देकर, हिंसा का सहारा लेकर इन षडयंत्रों को बढ़ा रहे हैं ।

इनके काम करने का तरीका देखकर ऐसा लगता है कि यह देश में अशांति भी फैला सकते हैं। भीमा कोरेगांव हिंसा में दलित-मराठा विवाद पैदा किया जाता है और झारखंड में पत्थलगड़ी के नाम पर माओवादी और चर्च वहां के जनजाति समाज को इस हिंदू समाज से अलग करने के लिए प्रयास करते हैं, सहारनपुर में बाबा साहब अंबेडकर की शोभायात्रा पर हमला करके दलित-सवर्ण के बीच विवाद पैदा किया गया, वहीं गुजरात में परंपरागत व्यवसाय में लगे अनुसूचित जाति के युवक पर हमला करवा कर सामाजिक माहौल खराब करने का प्रयास किया गया। 

पिछले कुछ समय में शहरी नक्सलीयों के राष्ट्र विरोधी षडयंत्र लगातार समाज के सामने आ रहे हैं। इनके द्वारा हिंदू समाज को बदनाम करने, आतंकवादी व राष्ट्र विरोधी लोगों को प्रोत्साहित करने, भारत के गौरवशाली इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश करने,जनजाति क्षेत्रों में नक्सलियों की हर प्रकार से सहायता करने यहां तक कि देश के प्रधानमंत्री की हत्या करवाने तक की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। इसके साथ ही यह लोग हिंदू समाज में विभिन्न विवाद उत्पन्न करके नफरत फैलाना चाहते हैं तथा केरल और बंगाल जैसी सरकारें अपनी संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करके विभिन्न आधारों पर हिंदू समाज का विघटन और दमन का प्रयास कर रही हैं।

कुछ वर्षों से दलित और मुस्लिम गठजोड़ करने का प्रयास भी असफल हो रहा है, जिन जेहादियों को बाबा साहब अंबेडकर ने स्वयं बर्बर तथा अविश्वसनीय कहा था, अब उन्हीं के नाम से यह दुष्चक्र किया जा रहा है जिसे उजागर करने की जरूरत है।

प्रस्ताव में कहा गया कि भारत के हिंदू समाज ने हमेशा उँच-नीच, जात-पात, छुआछूत, मत-पंथ और संप्रदाय से ऊपर उठकर सामाजिक कार्यों में भाग लिया है तथा समय समय पर ऐसे कुतर्कों का मुंह तोड़ जवाब दिया है।

स्वामी गोविंद देव गिरी जी ने यह प्रस्तावित किया कि हिंदू समाज क्षेत्रवाद, भाषावाद, प्रांतवाद, जातिवाद व छद्म धर्मनिरपेक्षता के नाम पर देश को तोड़ने का जो प्रयास किया जा रहा है उससे भ्रमित ना होते हुए ऐसे प्रयासों का विरोध करें। जिन राजनीतिक दलों के द्वारा ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं उनसे सचेत रहे और उन्हें उचित जवाब दें । स्वामी जितेन्द्रानन्द ने इस प्रस्ताव का अनुमोदन किया ।