पूरी तरह प्लास्टिक, तम्बाकू और कचरा मुक्त भारत का यह गाँव है पूरे विश्व के लिए मिसाल

दिंनाक: 11 Feb 2019 12:41:13


हम आये दिन अपने रोज़मर्रा के कामों में प्लास्टिक और पॉलिथीन का इस्तेमाल करते हैं। यह जानते हुए भी कि यह पर्यावरण के साथ-साथ हमारे स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। इसकी एक मुख्य वजह यह भी है कि हमने इसका कोई बेहतर विकल्प नहीं ढूंढा है।

पॉलिथीन शहर की गन्दगी का प्रमुख स्रोत होने के साथ जीव-जंतुओं के लिये भी घातक है । बेचारे निर्दोष जानवर खाने के चक्कर मे इन पॉलिथीन के बैग को भी निगल लेते है जो इनके लिये जानलेवा बन जाता है। पॉलिथीन व प्लास्टिक कचरों का पूरी तरह नाश नहीं हो पाता। यह मिट्टी की उर्वरक क्षमता को भी अत्यधिक प्रभावित करते हैं। इसके कारण हमारे पर्यावरण पर अनेकों दुष्प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त नालों व नालियों में भी प्लास्टिक कचरा इकट्ठा होने से जाम होने का खतरा रहता है। बाकी नदी, नहर की क्या स्थित है इससे तो हम सब बाकिफ हैं। कचरा इक्कठा होने की मुख्य वजह प्लास्टिक ही है।

बावजूद इसके हम पॉलीबैग का धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं। इसकी एक मुख्य वजह यह भी है कि हमने इसका कोई बेहतर विकल्प नहीं ढूंढा है। हाल ही में इस समस्या को देखते हुए महाराष्ट्र में प्लास्टिक बैन की गई। पर इस बार नागालैंड के एक गाँव को प्लास्टिक के साथ तम्बाकू और कचरा मुक्त घोषित कर दिया गया है।

यह गाँव है नागालैंड की राजधानी कोहिमा से 11 किलोमीटर दूर स्थित सीशुनु गाँव। नागालैंड का यह छोटा सा गाँव तंबाकू, प्लास्टिक और कचरा मुक्त गांव घोषित किया गया है। दरअसल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीए) के तहत निर्मित एक सड़क और पगडंडी का औपचारिक रूप से उद्घाटन कुछ दिनों पहले किया गया। इसका उद्घाटन डीएसडीए कोहिमा के परियोजना निदेशक सह डीपीसी, अलेमला चिशी ने किया था। इसी दौरान कार्यक्रम के बीच में गाँव को तंबाकू, प्लास्टिक और कचरा मुक्त गांव के रूप में घोषित किया गया था। ग्रामीणों को इसे पूरे मन से लागू करने के लिए कसम खिलाई गयी।

सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि गांव परिसर के अंदर कोई तम्बाकू उत्पाद बेचा नहीं जाएगा। इसे अलावा शैक्षिक संस्थानों, कार्यालयों, सामुदायिक हॉल, बस स्टॉप और पुस्तकालय में अन्य प्रमुख सार्वजनिक संरचनाओं में धूम्रपान करने और तंबाकू उत्पाद बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि गांव तम्बाकू नियंत्रण कानून का पालन कर रहा है, सरकार, पुलिस, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) और गांव के अधिकारियों  के  एक तंबाकू नियंत्रण समिति का गठन किया है। जो यह सुनिश्चित करने के लिए रखी गयी कि यह प्रत्येक तिमाही में एक बार बैठक कर इसपर पूरा नियंत्रण रखें। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 के तहत नियमों का उल्लंघन करने के डिफॉल्टर्स को दंडित किया जाए।

मीण विकास मंत्रालय ने सिशुनू के निवासियों को बधाई दी क्योंकि गांव ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत दिए गए धन के माध्यम से सभी तीन उद्देश्यों को प्राप्त कर लिया। 

मंत्रालय नें एक ट्वीट के माध्यम से कहा कि-
"महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत सिशुनू गांव  टोबाको,  प्लैस्टिक और अपशिष्ट मुक्त हो गया। हमें यह बताते हुए गर्व हो रहा है।"

अब गांव में किसी भी प्रकार का कचरे को फेकने पर, विशेष रूप से प्लास्टिक को सार्वजनिक स्थानों में फेकने पर गांव परिषद नें  प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही इन प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना सहित अन्य दंड के नियम बनाये गए।

आपको बता दें कि पिछले महीने, नागालैंड सरकार ने प्लास्टिक वेस्ट की पूरी तरह से मुक्त करने के लिए दिसंबर 2018 के लिए समय सीमा निर्धारित की थी। अपशिस्ट प्लास्टिक के डिस्पोजल के लिए नवंबर 2015 में, नागालैंड राज्य सरकार ने सभी सड़क ठेकेदारों के लिए सड़क निर्माण के लिए बिटुमिनस मिश्रणों के साथ प्लास्टिक कचरे का उपयोग करने के लिए अनिवार्य बना दिया। यह उपाय भारत में प्लास्टिक अपशिष्ट निपटान की बढ़ती समस्या को दूर करने में मदद के लिए बहुत उपयोगी कदम माना जा रहा है।

एक ओर जहां पूरा विश्व प्लास्टिक और पर्यावरण प्रदूषण का दंस झेल रहा है। नागालैंड की राजधानी कोहिमा के निकट स्थित इस छोटे से गाँव ने ऐसी पहल कर सबके लिए एक उदाहरण पेश किया है।