युवाओं को नैतिक मूल्य एवं सभ्यता का पाठ पढाया जाना आवश्यक – टी.एन. मिश्र

दिंनाक: 14 Feb 2019 17:10:28


भोपाल(विसंके). चित्रकूट उद्यमिता विद्यापीठ दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट में चल रहे राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवकों के युवा नेतृत्व एवं सामुदायिक विकास प्रशिक्षण वर्ग के अंतिम दिवस समापन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें सभी युवा स्वयंसेवकों के त्रिदिवसीय प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रमाण पत्र वितरित कर सम्मानित किया गया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि टी.एन. मिश्र राज्यनिदेशक नेहरू युवा केन्द्र भोपाल एवं चन्द्रिका प्रसाद उपाध्याय विधायक कर्वी कार्यक्रम की अध्यक्षता महात्मा गांधी विश्वविद्यालय के प्रबन्धन विभाग के अधिष्ठाता डॉ. अमरजीत सिंह  द्वारा की गई । कार्यक्रम की शुरूआत राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख एवं पंड़ित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्जवलन कर की गई। इसके बाद अंजली ओमरे द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई।

स्वयंसेवक विनयशील एवं विवेकशील हों - चन्द्रिका प्रसाद



कार्यक्रम की शुरूआत में प्रशिक्षण प्रभारी अरविन्द यादव द्वारा त्रिदिवसीय युवा नेतृत्व एवं सामुदायिक विकास प्रशिक्षण को युवा स्वयंसेवको की आवश्यकता बताते हुए प्रशिक्षण को हमारे बौद्धिक एवं व्यक्तित्व विकास को बढाने में उपयोगी बताया और कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से हमारी क्षमताओं का विकास होता है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि टी. एन. मिश्रा ने युवा स्वयंसेवको को अपने उद्बोधन मे कहा कि युवाओं को नैतिक मूल्य एवं सभ्यता का पाठ पढाया जाना आवश्यक है। वर्तमान मे युवाओं को चरित्रवान, स्वाभिमानी एवं कर्तव्य निष्ठ होना आवश्यक है। हमें महापुरूषों के जीवन चरित्र से प्रेरणा लेकर देश एवं समाज के विकास में अपना योगदान देना चाहिए। उन्होने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय एवं राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख ने जो मानव सेवा के लिए जो कार्य किया है वो सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। नानाजी देशमुख के श्रीचरणों में बैठकर उन्हे भी जीवन के विभिन्न अनुभवों एवं समाजसेवा के कार्यो को सीखने का अवसर मिला है। उनके जीवन के आदर्शो एवं समाज उत्थान में उनके द्वारा किये गये कार्यो से प्रेरित होकर यह इतना बडा समाज सेवा का संगठन स्थापित हो पाया है।

 


कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे चन्दिका प्रसाद उपाध्याय ने अपने औजस्वी वक्तव्य में युवाओं को संदेश दिया कि भारत महापुरूषों की भूमि रही है। भारतीय समाज विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता है इसलिये इसका नैतिक उत्थान एवं पतन होता रहा है। उन्होने बताया कि सन् 1942 में भारत छोडो आंन्दोलन के द्वारा देश के युवाओं ने आजादी के लिए आन्दोलन चलाया। जो संकल्प 1947 को पूरा हुआ। इसके लिए कई क्रांतिकारियों ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिये। लेकिन अब इस देश के युवाओं को देश के लिए मरना नही वल्कि जी कर कुछ करना है। स्वामी विवेकानंद जी के बारे में बताते हुए उन्होने कहा कि विवेकानंद जी ने कहा था कि 100 से लेकर 150 वर्षो तक हमे देवी देवताओं कि पूजा नही करनी बल्कि भारत माता की जय बोलनी है। मनुष्य विवेकशील प्राणी है अतः उसका सहज, सरल एवं सभ्य होना जरूरी है। अंत में बोलते हुए उन्होने कहा कि चित्रकूट भगवान रामचंन्द्र जी की तपस्या साधना एवं कर्मभूमि रही है अतः हमे भी इस प्रशिक्षण के माध्यम से जो शिक्षा दी गई है उसका सकारात्मक उपयोग देश और समाज के लिए करना है। गांव समाज एवं देश यह सब मेरा ही है। यह हर स्वयंसेवक के अंदर भावना होनी चाहिए। कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षण कार्यक्रम में आए पन्ना एवं छतरपुर के स्वयंसेवको को प्रमाण पत्र वितरित किए गये।