ये पाकिस्तान पर चढ़ाई का सही समय है सरकार...आगे बढिये न...! - कृष्णमोहन झा

दिंनाक: 18 Feb 2019 16:35:57


लगभग चार वर्ष पूर्व कश्मीर के उरी इलाकें में स्थित आर्मी हेडक्वाटर्स में आतंकी हमले में हमारी सेना के 18 जवानों की शहादत हुई थी। इस हमले के बाद पड़ौसी देश पाकिस्तान को सबक सिखाने की मंशा से भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में घुश्कर जो सर्जिकल स्ट्राइक की थी ,उसमे हमारे जवानों ने लगभग 100 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था और उस क्षेत्र में स्थित आतंकी ठिकानों को भी ध्वस्त किया था। इस कार्यवाही के बाद हमें यह भरोसा हो गया था कि पाकिस्तान में फलफूल रहे आतंकी संगठन अब कश्मीर तो क्या समूचे भारत में हमला करने का दुस्साहस नहीं करेंगे, परन्तु पाकिस्तान की सरकार ने न तो आतंकी संगठनों को पालने की कुनीति पर चलना बंद किया है और न ही आतंकी संगठनों ने कोई सबक सीखा है। कार्यवाही के बाद इधर हम जरूर निश्चिंत होकर बैठ गए थे कि, अब किसी भी तरह के हमले पर अंकुश लग गया है ,लेकिन आतंकी शांत नहीं बैठे थे ,जिसका नतीजा सामने है। 


पुलवामा हमला देश के ऊपर एक बड़ा हमला है। इसकी जिम्मेदारी भी पाक संरक्षण में फलफूल रहे आतंकी संगठन जैश- ए -मोहम्मद ले ली है। हमले को जिस तरह से अंजाम दिया गया है ,उससे इस नतीजे पर पहुंचना आसान है कि इसकी योजना बहुत पहले ही बन गई थी। हमले को आजम देने के लिए जैश -ए -मोहम्मद ने सही मौका शायद पहले से ही तय कर रखा था। आतंकी यह अनुमान लगा चुके थे कि कश्मीर में बर्फ़बारी बंद होते ही जब हाइवे खुलेंगे तब हजारों जवान अपने काम पर लूटना शुरू करेंगे। काफिले में शामिल अधिकांश जवान छुट्टियां बिताकर वापस लौट रहे थे। इसलिए  आतंकियों ने इस उपयुक्त समय का ही चयन किया। 

 

यद्पि यह समय सवाल जवाब का नहीं है ,लेकिन इतना तो तय हो ही गया इसमें हमारी ही किसी चूक से आतंकी हमला करने में सफल हुए है। बताया गया है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने 8 फरवरी को अलर्ट जारी कर दिया था कि घाटी में सुरक्षा बलों की तैनाती अथवा आवाजाही के दौरान आतंकी हमला करने की योजना बना रहे है। जिस राजमार्ग पर यह हमला किया गया है, वह अत्यंत सुरक्षित व संवेदनशील माना जाता है ,फिर उस एसयूवी की जांच क्यों नहीं की गई जिसमे विस्फोटक रखा हुआ था। अगर इस वाहन की जांच की गई होती तो इस हमले को टाला जा सकता था। इसके आलावा एक सवाल और भी है कि सीआरपीएफ के उस काफिले में 2500 से अधिक जवान क्यों थे, जबकि सामान्यतः एक काफिला 1000 जवानों का होता है। इतनी बड़ी संख्या में जवानों के होने के बाद की गई अनदेखी से ही आतंकियों को सुनहरा मौका मिला है।खैर सरकार को अब यह सुनिश्चित जरूर करना चाहिए कि भविष्य में  आतंकी संगठन फिर देश के किसी हिस्से को निशाना न बना सके।