आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 26 Feb 2019 12:58:51

 

सच पूछो, तो शर में ही
बसती है दीप्ति विनय की
सन्धि-वचन संपूज्य उसी का
जिसमें शक्ति विजय की।

सहनशीलता, क्षमा, दया को
तभी पूजता जग है
बल का दर्प चमकता उसके
पीछे जब जगमग है।

                  - रामधारी सिंह "दिनकर"