CPI(M) कार्यकर्ता के धमकियों से तंग आकर महिला एक्टिविस्ट ने छोड़ा मुन्नार ।

दिंनाक: 06 Feb 2019 11:53:05

माकपा ने हाल ही में लैंगिक अधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को उजागर करने के लिए एक महिला दीवार कार्यक्रम का आयोजन किया।

लेकिन जब महिलाओं पर अत्याचार की बात आती है, तो माकपा इस सूची में सबसे ऊपर है। यौन उत्पीड़न और उसके शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ बलात्कार के निंदनीय मामलों ने इसकी शाख पर बट्टा लगा दिया है। हाल ही में सीपीआई (एम) की सरकार ने एक युवा महिला पुलिस अधिकारी का तबादला कर दिया था, जिसने सीपीआई (एम) के दफ्तर पर छापा मारने की हिम्मत दिखाई थी, जहां उपद्रवियों ने एक पुलिस स्टेशन पर पथराव किया था, जहां एक POCSO आरोपी कार्यकर्ता को छिपा कर रखा गया था।

सीपीआई (एम) के महिला-विरोधी अभियान की नवीनतम शिकार गोमती, पेम्पिलई ओरुमई (महिला सामूहिक) की नेता हैं, जिन्होंने शक्तिशाली संपत्ति मालिकों और वामपंथी ट्रेड यूनियन नेताओं के शोषण के खिलाफ अभियान चलाया। गोमती ने मुन्नार में अपने काम की जगह छोड़कर एक अलग जगह पर बसने का फैसला किया है।

उसने जनम टीवी को बताया कि वह माकपा नेताओं और पुलिस की धमकियों से तंग आ चुकी है। उनकी लड़ाई ने वामपंथी नेताओं के दोहरेपन को उजागर किया। गोमती ने स्थानीय निकाय के लिए चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। बाद में वह यह सोचकर सीपीआई (एम) में शामिल हो गईं कि पार्टी एस्टेट कर्मचारियों की मांगों को पूरा करेगी। पार्टी ने वादा किया था कि उसके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस ले लिया जाएगा और भूमिहीन लोगों को जमीन दी जाएगी। गोमती ने आरोप लगाया कि सीपीआई (एम) ने आदिवासी समुदायों से जुड़े लोगों को "महिला की दीवार" में शामिल होने के लिए ले लिया, जिससे उन्हें यह गलत धारणा मिली कि सबरीमाला में युवतियों के मंदिर में प्रवेश के खिलाफ "दीवार" प्रचार के लिए थी।