आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 07 Feb 2019 11:11:38

 

 


परतंत्रता तथा दासता को प्रत्येक सद्धर्म
ने सर्वदा धिक्कारा है। धर्म के उच्छेद और
ईश्वर की इच्छा के खंडन को ही परतंत्रता
कहते हैं। सभी परतंत्राओं से निकृष्टतम
परतंत्रता है – राजनीतिक परतंत्रता और
यही नर्क का द्वार है।

- विनायक दामोदर सावरकर
(वीर सावरकर)