आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 19 Mar 2019 13:08:41


हम सपूत उनके जो नर थे अनल और मधु मिश्रण,

जिसमें नर का तेज प्रखर था नारी का मान |

एक नयन संजीवन जिनका कठिन खडग था, कर में उतना ही अंतर कोमल |

थर-थर तीनों लोक कांपते थे जिनकी ललकारों पर,

स्वर्ग नाचता था रण में जिनकी पवित्र तलवारों पर

हम उन वीरों की संतान, जिओ जिओ अय हिंदुस्तान |

- रामधारी सिंह दिनकर