3 मार्च - जन्म दिवस / कारगिल युद्ध मे अद्भुत पराक्रम के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित संजय कुमार

दिंनाक: 03 Mar 2019 12:40:43


परमवीर चक्र से सम्मानित राइफ़लमैन संजय कुमार को यह सम्मान सन 1999 में कारगिल युद्ध मे अद्भुत पराक्रम के लिए दिया गया ।  संजय कुमार का जन्म 3 मार्च, 1976 को विलासपुर हिमाचल प्रदेश के एक गाँव में हुआ था ।


पाकिस्तान ने शिमला समझौते का उल्लंघन करते हुए 1972 में स्थापित नियंत्रण रेखा को पार करके युद्ध शुरू किया था। इस युद्ध की शुरुआत क़रीब-करीब मई 1999 से हो गई थी,  6 मई 1999 को स्थानीय चरवाहों ने पाकिस्तानी फौजों का जमावड़ा देखकर हलचल मचाई। भारत की फौजों को इस स्थिति का अंदाज होने में समय लगा। इस बीज गश्त के लिए भेजे गए जवान उधर से वापस नहीं लौटे। 10 जून, 1999 को पाकिस्तान ने गश्ती दल के अगुवा तथा पाँच सैनिकों के क्षत-वुक्षत शव भारत को सौंपे।

उस समय संजय कुमार मुश्कोह घाटी में चौकी नम्बर 4875 पर लड़ रहे थे।  4 जुलाई 1999 को फ्लैट टॉप प्वाइंट 4875 की ओर कूच करने के लिए राइफल मैन संजय कुमार ने इच्छा की कि वह अपनी टुकड़ी के साथ अगली पंक्ति में रहेंगे। यह मोर्चा घाटी में एक महत्वपूर्ण ठिकाने पर था तथा राष्ट्रीय राजमार्ग 1A के पास था। इसलिए यह बेहद जरूरी था कि यहाँ से दुश्मन को खदेड़ कर इस पर कब्जा किया जाए। इस ठिकाने पर फ़तह किए बिना द्रास के हैलीपैड पर हैलीकाप्टर उतारना सीधे-सीधे दुश्मन के निशाने पर आना था, इसलिए यह ठिकाना 4875 भारत के लिए एक जरूरी चुनौती था।

4 जुलाई 1999 को राइफल मैन संजय कुमार जब हमले के लिए आगे बढ़े तो एक जगह से दुश्मन ओटोमेटिक गन ने जबरदस्त गोलीबारी शुरू कर दी और टुकड़ी का आगे बढ़ना कठिन हो गया। ऐसे में स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए राइफल मैन संजय कुमार ने तय किया कि उस ठिकाने को अचानक हमले से खामोश करा दिया जाए। इस इरादे से संजय ने यकायक उस जगह हमला करके आमने-सामने की मुठभेड़ में तीन दुश्मन को मार गिराया और उसी जोश में गोलाबारी करते हुए दूसरे ठिकाने की ओर बढ़े। राइफल मैन इस मुठभेड़ में खुद भी लहू लुहान हो गए थे, लेकिन अपनी ओर से बेपरवाह वह दुश्मन पर टूट पड़े। इस एकदम आकस्मिक आक्रमण से दुश्मन बौखला कर भाग खड़ा हुआ और इस भगदड़ में दुश्मन अपनी यूनीवर्सल मशीनगन भी छोड़ गया।

संजय कुमार ने वह गन भी हथियाई और उससे दुश्मन का ही सफाया शुरू कर दिया। संजय के इस चमत्कारिक कारनामे को देखकर उसकी टुकड़ी के दूसरे जवान बहुत उत्साहित हुए और उन्होंने बेहद फुर्ती से दुश्मन के दूसरे ठिकानों पर धावा बोल दिया। इस दौर में संजय कुमार ख़ून से लथपथ हो गए थे लेकिन वह रण छोड़ने को तैयार नहीं थे और वह तब तक दुश्मन से जूझते रहे थे, जब तक वह प्वाइंट फ्लैट टॉप दुश्मन से पूरी तरह ख़ाली नहीं हो गया। बहुत अधिक खून निकलने के कारण उनकी स्थिति खराब हो गयी थी। साथियों ने उन्हें शीघ्रता से आधार शिविर और फिर अस्पताल पहुँचाया, जहाँ वह शीघ्र ही स्वस्थ हो गये। इस तरह राइफल मैन संजय कुमार ने अपने अभियान में जीत हासिल की।