17 अप्रैल – भगवान महावीर जयंती

दिंनाक: 17 Apr 2019 17:30:03


आज 17 अप्रैल को महावीर जयंती का पर्व पूरे देश में मनाया जा रहा है। महावीर जयंती जैन समुदाय का सबसे प्रमुख त्योहार है। महावीर स्वामी का जन्म दिवस चैत्र की शुक्ल त्रयोदशी को मनाया जाता है।


भगवान महावीर स्वामी, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे, जिन्होंने दुनिया को सत्य और अहिंसा का संदेश दिया। एक राज परिवार में जन्म लेने वाले वर्धमान ने राज-पाठ, परिवार, धन-संपदा छोड़कर युवावस्था में ही लोगों को सत्य, अहिंसा और प्रेम का मार्ग दिखाया।

30 वर्ष की आयु में ज्ञान के लिए घर छोड़ा
वर्धमान ने 30 वर्ष की आयु में ज्ञान प्राप्त करने के लिए घर-परिवार छोड़ दिया और सत्य, अहिंसा और प्रेम की शक्ति को महसूस किया। वर्धमान में क्षमा करने का एक अद्भुत गुण था और कहा जाता है कि क्षमा वीरस्य भूषणम। जिसके बाद उन्हें महावीर कहा जाने लगा। तीर्थंकर महावीर ने अपने सिद्धांतों को जनमानस के बीच रखा। उन्होंने ढोंग, पाखंड, अत्याचार, अनाचारत व हिंसा को नकारते हुए दृढ़तापूर्वक अहिंसक धर्म का प्रचार किया।

महावीर ने समाज को अपरिग्रह, अनेकांत और रहस्यवाद का मौलिक दर्शन समाज को दिया। कर्मवाद की एकदम मौखिक और वैज्ञानिक अवधारणा महावीर ने समाज को दी। उस समय भोग-विलास एवं कृत्रिमता का जीवन ही प्रमुख था, मदिरापान, पशुहिंसा आदि जीवन के सामान्य कार्य थे। बलिप्रथा ने धर्म के रूप को विकृत कर दिया था।

 

पंचशील सिद्धान्त के प्रर्वतक और जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर महावीर अहिंसा के प्रमुख ध्वजवाहकों में से एक है।

 महावीर जयंती कठिन तपस्या से जीवन पर विजय प्राप्त करने का त्योहार है। महावीर जयंती पर जैन मंदिरों मे भगवान महावीर की मूर्ति का विशेष रूप से अभिषेक किया जाता है। 

भगवान महावीर का जन्म लगभग 600 वर्ष पूर्व चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के दिन हुआ था। भगवान महावीर के पिता का नाम महाराज सिद्धार्थ और माता का नाम महारानी त्रिशला था। महावीर बचपन से ही बड़े तेजस्वी और साहसी बालक थे।

गृहस्थ जीवन त्याग करने के बाद महावीर ने साढ़े 12 सालों तक कठोर तपस्या की फिर वैशाख शुक्ल दशमी को ऋजुबालुका नदी के किनारे साल के पेड़ के नीचे उनको 'कैवल्य ज्ञान' की प्राप्ति हुई थी। महावीर के जन्म को कल्याणक के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन जैन मंदिरों में महावीर की मूर्तियों को अभिषेक किया जाता है इसके बाद मूर्ति को रथ पर स्थापित करके शहर में जुलूस निकाला जाता है।

भगवान महावीर ने जीवन में कई उपदेश दिया था। महावीर स्वामी अहिंसा के पुजारी थे उनका मानना था कि इस दुनिया में जितने भी जीव है उन पर कभी भी हिंसा नहीं करनी चाहिए। भगवान महावीर का कहना है कि मनुष्य को कभी भी असत्य का मार्ग नहीं अपनाना चाहिए। मनुष्य को सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। महावीर स्वामी ने ब्रह्राचर्य के बारे में बताया है कि उत्तम तपस्या,ज्ञान ,संयम और  विनय ब्रह्राचर्य की जड़ है।

भगवान महावीर के अनमोल विचार

- आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है। असली शत्रु अपने भीतर रहते हैं। वे शत्रु हैं- लालच, द्वेष, क्रोध, घमंड और आसक्ति और नफरत। 

- मनुष्य के दुखी होने की वजह खुद की गलतिया ही है, जो मनुष्य अपनी गलतियों पर काबू पा सकता है वहीं मनुष्य सच्चे सुख की प्राप्ति भी कर सकता है।

- महावीर हमें स्वयं से लड़ने की प्रेरणा देते हैं। वे कहते हैं- स्वयं से लड़ो, बाहरी दुश्मन से क्या लड़ना? जो स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेगा उसे आनंद की प्राप्ति होगी।

- आत्मा अकेले आती है अकेले चली जाती है, न कोई उसका साथ देता है न कोई उसका मित्र बनता है।

- आपात स्थिति में मन को डगमगाना नहीं चाहिये।

- खुद पर विजय प्राप्त करना लाखों शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर है।