कमलनाथ जी - सरकारे आएँगी और जायेंगी पर हम आपको न भूल पायेंगे.

दिंनाक: 02 Apr 2019 14:01:11




राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को जितना मैंने समझा है वह भारत वर्ष की सभ्यता, संस्कृति और सीमाओं को मजबूत करने और उसकी रक्षा करने हेतु बना एक मजबूत संगठन है. संघ के स्वयंसेवक अपने घर से देश को कुछ देने निकले हैं, लेने नहीं निकले कमलनाथ जी ! और जब संघ का स्वयंसेवक देश की रक्षा की शपथ लेता है, उसको जीता है तो मुझे नहीं लगता कि वह अपनी स्वयं की रक्षा करने में असमर्थ है .

इसलिए मेरे इस कथन को कहीं से भी इस प्रकार मत देखना कि आपके सुरक्षा हटा लेने के कदम से कहीं संघ असुरक्षित महसूस करेगा. कमलनाथ जी! हमने सुना था कि आप की सरकार "बदले" लेने के लिए आई है और अब हम उसको शायद होता हुआ भी देख रहे हैं .

जिस प्रकार बड़ी तेजी से आपने भारतीय जनता पार्टी के मंत्रियों, विधायकों कार्यकर्ताओं से शासकीय मकान खाली कराए वह दिखाता है कि वाकई में यह "बदले" की सरकार है. उसके बाद आपने बड़ी तेजी से भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा नियुक्त विद्वानों को उनके पदों से, जो कि गैर राजनीतिक भी थे मुक्त किया, इससे भी पता लगता है कि आप "बदला" लेने के लिए ही सरकार में आए.

आप यहीं नहीं रुके इसके बाद आपने भारतीय जनता पार्टी और शिवराज सिंह चौहान द्वारा चलाई गई कई योजनाओं चाहे वह दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना या अन्य योजनाओं को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया. इससे भी पता लगा कि आप बदलाव के लिए नहीं "बदले" की ही सरकार लेकर आए.

जिस दिन दिग्विजय सिंह को आपने भोपाल से लड़ाने का फैसला लिया और जिस दिन आरिफ मसूद भोपाल मध्य से विधायक हुए, हम तभी समझ गए थे कि अब आप अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की सारी सीमाएं लांघ देंगे व हम बहुत अच्छे से समझते हैं कि दिग्विजय सिंह हिंदू या कहें “भगवा आतंकवाद” शब्द के रचयिता हैं . उन्होंने ही गाहे-बगाहे हमेशा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की निंदा की उन पर अनर्गल आरोप लगाए और ऐसा करके उनको लगता है कि देश के अल्पसंख्यक उन्हें सर-माथे बैठा लेंगे, हालांकि जो उनकी गलतफहमी भी है .

मुझे पूरी उम्मीद है जिस प्रकार से संघ के कार्यालय संमिधा की आपने दो दशकों से लगी हुई सुरक्षा हटाई है, उससे आप के चरित्र पर से पर्दा जरूर उठा है और वह है आपका मौलिक चरित्र यानि कि "बदले" की भावना .



मैंने अभी 84 के सिखों के नरसंहार का आपसे हिसाब नहीं मांगा है कमलनाथ जी, लेकिन यह जरूर याद रखिएगा कि भारत का एकमात्र ऐसा संगठन है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिस पर कट्टरपंथी संगठनों का निशाना ऑलरेडी लगा हुआ है. जो कभी भी, कोई भी दुर्घटना, किसी भी बड़े कार्यालय पर कर सकते है और यह भी ध्यान रखिए समिधा था वह कार्यालय है जहां पर हमारे क्षेत्र प्रचारक रहते हैं प्रांत प्रचारक रहते हैं और माननीय सर-संघचालक जी भी आकर कई बार प्रवास के दौरान वहीं पर रहते हैं. मुझे लगता है कि यह कदम आप शायद "बदले" की भावना की अपनी सरकार के रवैय्ये से दूर रख सकते थे.

कमलनाथ जी, जनता की अपेक्षाएं होती हैं कि उनके नेता गण और खासतौर से जिन्हें वह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के पदों पर आसीन देखते हैं, वे अपनी व्यक्तिगत कुंठाओं से ऊपर उठकर लोगों के साथ न्याय करेंगे. याद रखिए न्याय का नारा लगाने से या गाड़ी पर न्याय-यात्रा लिखकर घूमने से समाज में या देश में न्याय स्थापित नहीं होता है.

ऐसा लगता है कि अभी भी आप इस उम्र में भी जन-अपेक्षाओं को नहीं समझ पाए हैं. आप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय के सामने से अचानक रात को चुपचाप सुरक्षा दस्ते को हटाकर फिर से अपना मूल चरित्र न केवल स्वयं सेवकों के सामने रखा है अपितु भारत की जनता के सामने भी रखा है.

आप राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह को खुश करने के लिए व अल्पसंख्यक-वोटों के ध्रुवीकरण के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. सरकार का "बदले" की भावना के लिए इस्तेमाल भी कर सकते हैं. आज हमें आपसे अब कोई उम्मीद नहीं रह गई है.

सड़क के गड्ढे, बिजली, पानी इन सब से तो आपकी सोच कोसों दूर है. किसान आपके राज में अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है. छात्र व महिलाएं, शासकीय कर्मचारी सोचते हैं कि हम ने किस सरकार को चुन लिया है ? खैर आप जानिए और आप की राजनीति जाने, पर इतना जरूर मानिये कि   आप जैसे लोग और आप जैसी राजनीति के दिन लद चुके हैं.

आपको इसका करारा जवाब जनता अपने भाषणों से नहीं लेकिन अपने मतदान के माध्यम से जरूर देगी और भोपाल की जनता तो सब पर नजर रखती है ‘महाराज’.

सरकारे आएँगी और जायेंगी पर हम आपको न भूल पायेंगे.

जय-हिन्द .

 

कमलनाथ की सरकार ने भोपाल स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समिधा कार्यालय से सुरक्षा हटा ली है। जिसको लेकर कमलनाथ और कांग्रेस पर बदले की भावना से प्रेरित होकर काम करने के आरोप लगने लगे हैं। इसको लेकर हितेश वाजपेयी ने फेसबुक पर पोस्ट साझा किया है।