भगवा आतंकवाद कांग्रेस की सोची समझी साजिश: मणि

दिंनाक: 04 May 2019 12:35:18


भोपाल। देश में जिन स्थानों पर हमले या विस्फोट हुए और उनमें बेकसूर लोगों को आरोपी बना दिया यह तथ्य इन किताबों की प्रमुख उपलब्धि है। भगवा आतंकवाद का ठप्पा लगाना कथित लोगों की सोची समझी साजिश है, इसे सच्चाई के साथ लोगों के सामने लाने का प्रयास किया गया है। यह बात 'हिन्दू टेरर' के लेखक व भारत सरकार में गृह विभाग के सेवानिवृत्त वरिष्ठअधिकारी आरव्हीएस मणि ने आज राजधानी के होटल पलाश में आयोजित 'बुद्धिजीवियों के साथ चाय और चर्चा में कही। किताब का उद्धरण देते हुए श्री मणि ने कहा कि गृह मंत्रालय में रहते हुए हमने जो टिप्णियां लिखीं हैं उन्हें आप आरटीआई के माध्यम से देख सकते हैं। 29 दिसंबर 2008 मालेगांव में जो विस्फोट हुआ वो सिमी ने किया जिसकी जवाबदारी ही नहीं बल्कि उन्होंने कबूल भी किया इसके बाद भी एनआईए ने कहा कि हमने 35 दिन में सभी साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया, इससे बड़ा झूठ हो ही नहीं सकता। सामान्य रूप से किसी भी ऐसी घटना की विवेचना में 3 से 4 महीने लग जाते हैं परंतु इस घटना को मात्र 35 दिनें में चार्जशीट दायर कर गिरफ्तारी कर ली गई। जबकि पहली चार्जशीट में ये तथ्य मौजूद थे कि इस घटना में सिमी का हाथ है। लेकिन ऊपर से दबाव के तहत इस पूरे घटनाक्रम को बदलकर नई चार्जशीट में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित एवं अन्य लोगों को आरोपी बनाकर 'भगवा आतंकवादÓ की थ्योरी को साबित करने के लिए अमानवीय अत्याचार इन लोगों पर किए गए। इन सब बातों का विस्तार से मैंने अपनी पुस्तक में किया है। श्री मणि ने 26/11 के हमले को फिक्स मैच करार देते हुए आरोप लगाया कि यह एक इतनी बड़ी घटना बगैर स्थानीय सहायता के हो ही नहीं सकती। उन्होंने इसे भगवा आतंकवाद को साबित करने के लिए तत्कालीन सरकार के मंत्रियों द्वारा रचित षडय़ंत्र करार दिया, जिसे महाराष्ट्र पुलिस के सिपाही तुकाराम ओमले ने अपने सीने पर गोली खाकर कसाब को जिंदा पकड़ कर विफल कर दिया। इशरत जहां के मामले में बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्रियों की आरे से स्पष्ट निदे्रश थे जिसका मैं प्रत्यक्ष गवाह हूं कि 'काली दाढ़ी और सफेद दाढ़ी वालेा को फंसाना है। ये सभी कोई मनगढंत कहानी नहीं तथ्यों पर आधारित किताब है। मेरा प्रयास है कि सच सबके सामने आना चाहिए।

जानबूझकर हिन्दू आतंकवाद को सिद्ध करने का प्रयास हुआ: प्रेम शुक्ल


भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ल ने अपने मुख्य वक्तव्य में कहा कि कुत्सित मानसिकता के लोगों ने जानबूझकर हिन्दू आतंकवाद को सिद्ध करने का प्रयास किया जो असफल रहा। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर भी उसकी शिकार हुई हैं, मालेगांव ब्लास्ट मामले में पहले उन्हें गिरफ्तार किया और उसके 8 दिन बाद वह स्कूटर बरामद हुआ है। हम सभी जानते हैं कि पहले साक्ष्य इक_े किए जाते हैं फिर गिरफ्तारी परंतु यहां उल्टा ही हुआ। उन्होंने कहा कि एफबीआई ने भी लिखा कि इसमें लश्करे तैयबा का हाथ है फिर भी निर्दोष लोगों को उठा लिया गया मतलब हिन्दू आतंकवाद को क्रिएट किया गया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम लेते हुए कहा कि 26/11 की योजना भी दिग्विजय सिंह ने तैयार कर रखी थी, यदि हमारा एक सिपाही अजमल कसाब को नहीं पकड़ता तो यह रहस्य उद्घाटित ही नहीं होता कि यह पाकिस्तान की साजिश थी और राकेश मारिया जिन्होंने इस केस को सुलझाया व सभी विस्फोट करने वाले आतंकियों की शिनाख्ती की। उन्हें यहीं पर रोक दिया गया और मुंबई बम ब्लास्ट को वित्तीय सहायता देने वाले लोगों और उनके आकाओं तक पहुंचने का काम दूसरे अधिकारी को दे दिया गया जिसकी आज तक रिपोर्ट नहीं आई। यह तत्कालीन सरकार की किसी को बचाने की मंशा दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस आयुक्त की नियुक्ति में आईएसआई का हाथ था। जबकि मुस्लिम आतंकियों द्वारा इतने हमले हुए लेकिन किसी भी देवबंद मस्जिद को टारगेट नहीं किया गया। श्री शुक्ल ने बताया कि आज जिन किताबों पर हम चर्चा कर रहे हैं ये उन साजिशों का जीता जागता कच्चा चिठ्ठा है जो हिन्दू आतंकवाद की पैरवी करने वालों की पोल खोल रही हैं। अब समय आ गया है कि हम कांग्रेस के उन कुकर्मी लोगों को दण्डित करें जिन्होंने हिन्दू आतंकवाद की थ्यौरी गढ़ी।

साध्वी प्रज्ञा के साथ क्रूरता की इंतहा हुई: प्रवीण तिवारी


कार्यक्रम में लेखक एवं पत्रकार डॉ. प्रवीण तिवारी ने अपनी किताबों के संदर्भ में कहा कि जो सच्चाई है उसे झुठलाया नहीं जा सकता। समक्ष स्त्रोतों, साक्ष्यों, तथ्यों के आधार पर ये किताबें लिखी गई हैं। उन्होंने कहा कि मालेगांव विस्फोट में साध्वी प्रज्ञा को जबरन टारगेट किया और इतना प्रताडि़त किया कि सारी क्रूरता की इंतहा हो गई। भगवा आतंक के नाम पर राजनैतिक षडय़ंत्र रचा गया जिसका पर्दाफाश होना चाहिए, इसी दिशा में मैंने अपना कदम बढ़ाया और इन किताबों को लिखा। उन्होंने 26/11 हमले को भी भगवा आतंक से जोडऩे का घृणित प्रयास किया और उस पर किताब लिखवाकर दिग्विजय सिंह जैसे लोग विमोचन भी करने चले गए। इससे बड़ी और घृणित राजनीति और क्या हो सकती है कि मालेगांव में जिन्होंने हमले किए वे कुबूल करते हैं और चार्जशीट दाखिल होने के बाद उसे खारिज किया जाता है, और यह सब पी.चिदंबरम की सहमति से हुआ। जबकि उसी आरोप में साध्वी प्रज्ञा निर्दोष लोगों को उठाकर प्रताडि़त किया गया, जिसमें एक शख्स दिलीप पाटीदार जिसका आजतक कोई अतापता नहीं है, कोई जिक्र तक नहीं करता। डॉ. तिवारी ने कहा कि हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि हमारे देश के लोग असलियत को समझें और खुद निर्णय करें कि आखिर हम किसके साथ चलें। सनातम परंपरा को मानने वाले लोगों को सच्चाई का पता नहीं है इसलिए वे भ्रमित हो गए हैं। हम उसी सच्चाई को इन किताबों के माध्यम से सामने ला रहे हैं।


राष्ट्रद्रोह का कानून भी बनना चाहिए: प्रो. रामेश्वर मिश्र 'पंकज'


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ख्यात लेखक प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज ने कहा कि हमारे देश का संविधान हड़बड़ी में शासन चलाने के लिए तैयारी की गई नियमावली है। जिसमें जरूरत के हिसाब से बदलाव हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे यहां राष्ट्रद्रोह का भी एक कानून बनना चाहिए और जो राष्ट्रद्रोह करेगा उसे दण्डित किया जाए। इसके लिए इस्लामिक देशों से सजा का तरीका सीख लिया जाए। उन्होंने कहा कि पी. चिदंबरम वा दिग्विजयसिंह के कामों पर भारत सरकार को संज्ञान लेना चाहिए क्योंकि सेना के काम में व्यवधान डालने के लिए वे अपराधी हैं। इंग्लैंड का उदाहरण देते हुए श्री पंकज ने कहा कि विदेशों में धर्मचार्यों को विशेषाधिकार प्राप्त हैं जबकि हमारे धर्माचार्यों को जेल में डाला जाता है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण तो यही है कि हमारे यहां साध्वी प्रज्ञा जैसी संत आत्मा को कठोर प्रताडऩा का शिकार होना पड़ रहा है। इसके लिए चाहिए कि भारतीय पुलिस को उच्च स्तर की बनाएं ताकि निर्दोषों पर अत्याचार न हो सके और जो लोग राष्ट्र विरोधी हैं उन्हें राजनीति से दूर रखा जाए। तभी हमारी सनातन परंपरा कायम रहेगी और राष्ट्र उत्थान होगा।

जिज्ञासाओं का किया समाधान


कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों द्वारा दर्शक दीर्घा से आये प्रश्रों के उत्तर देकर लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। विभिन्न प्रश्रों के माध्यम से भगवा आतंकवाद के षडय़ंत्र को समाप्त करने, दोषियों को जेल में डालने, निर्दोषों को उचित न्याय दिलाया जाए आदि सवाल किए गए। संवाद कार्यक्रम में तीन चर्चित पुस्तकें जिनमें लेखक एवं पत्रकार डॉ प्रवीण तिवारी की दो पुस्तक 'द ग्रेट इंडियन कॉन्सपिरेसी और 'आतंक से समझौता तथा लेखक आरव्हीएस मणि की पुस्तक 'हिंदू टेरर पर समीक्षात्मक चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता ख्यात समाज विज्ञानी प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज ने की। कार्यक्रम का संचालन अनिल सौमित्र ने किया। अंत में राष्ट्रीय विचार मंच की महासचिव रेशमा सिंह ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, लेखक, पत्रकार तथा गणमान्य लोग उपस्थित थे।