संघ प्रमुख ने विजयादशमी पर दिया सतर्कता का संदेश

दिंनाक: 27 Oct 2020 15:35:38


  कृष्णमोहन झा   

प्रतिवर्ष विजयादशमी के पावन पर्व पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर स्थित मुख्यालय में परंपरागत शस्त्र पूजा के बाद सरसंघचालक द्वारा  जो उदबोधन दिया जाता है उसकी सारे देश में काफी पहले से ही उत्सुकता से प्रतीक्षा की जाती है. संघ प्रमुख के इस बहुप्रतीक्षित उदबोधन के एक एक शब्द के विशेष मायने होते हैं इसलिए संघ प्रमुख द्वारा इस पावन पर्व पर दिए जाने वाले हर  संदेश पर व्यापक विमर्श भी होता है और उसकी अलग अलग तरह से  व्याख्या भी की जाती है . ऐसा ही कुछ इस बार भी हुआ. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विजया दशमी पर्व पर नागपुर स्थित संंघ मुख्यालय में जो उदबोधन दिया .वह न केवल चर्चा का विषय बन गया बल्कि उसके व्यापक निहितार्थ भी खोजे जा रहे हैं लेकिन संघ प्रमुख के  विजयादशमी संदेश में ऐसा कुछ भी नहीं था जो किसी भी तरह के  विवाद का कारण बन सके . दरअसल मोहन  भागवत की इस समय  देश की  एक ऐसी शख्सियत  के रूप में विशिष्ट पहिचान बन चुकी है  जिनका कोई भी  व्याख्यान मात्र  संघ कार्यकर्ताओं के लिए एक संदेश के रूप में नहीं देखा जा सकता .

देश के समक्ष मौजूद गंभीर चुनौतियों और महत्वपूर्ण समसामयिक राष्ट्रीय और सामाजिक मु्द्दों पर जब वे अपने धीर गंभीर विचार  सामने रखते हैं तो उसके पीछे उनका गहरा चिंतन स्पष्ट परिलक्षित होता है . सहज सरल  शब्दावली में वे जो संदेश देते हैं उनमें कहीं परामर्श का भाव होता है , कहीं वह सचेत करते हैं और कहीं वह मार्गदर्शक के रूप में नजर आते हैं . वे हर चुनौती और हर   समस्या की गंभीरता को अपने उदबोधन की  मात्र विषय वस्तु  नहीं बनाते बल्कि अपनी ओर से उसका हरसंभव समाधान भी प्रस्तुत करते हैं और इसमें दो राय नहीं हो सकती कि उनके हर संदेश  में राष्ट्र हित और समाज हित सर्वोपरि  होता है. आज देश  जिस दौर से गुजर रहा है उसे ध्यान में हुए रखते उनके इस विजयादशमी  संदेश को भी इसी नजरीए से देखने की आवश्यकता है . संघ प्रमुख ने इस विजयादशमी पर्व पर जो उदबोधन दिया उसमें उन्होंने गत वर्ष के विजयादशमी पर्व के बाद की महत्वपूर्ण  गतिविधियों और घटनाओं की विस्तार से चर्चा की . संघ प्रमुख ने कोरोना संकट ,सीएए को लेकर गलतफहमी पैदा करने की कोशिश , सीमा पर चीन की शरारत ,प्रवासी मजदूरों की बेरोजगारी , जैसे मुद्दों का विशेष उल्लेख किया .

मोहन भागवत ने कहा कि  नागरिकता संशोधन कानून के प्रावधानों को लेकर देश के मुसलमानों के अंदर जो गलतफहमी पैदा करने की कोशिश की गई वह एक साजिश का हिस्सा थी . सरकार ने संविधान सम्मत तरीके से नागरिकता संशोधन कानून बनाया वह एक मानवीय पहल थी जिसके पीछे सरकार की मंशा केवल यह थी कि कुछ पडोसी देशों मे सांप्रदायिक प्रताडना का शिकार बने लोगों को भारत में शरण देकर उन्हें इस देश की नागरिकता प्दान की जाए .

संघ प्रमुख ने स्पष्ट कहा  कि सरकार के इस कदम  के विरुद्ध यह दुष्प्रचार किया गया कि सरकार किसी विशेष धर्मावलंबी लोगों की जनसंख्या को सीमित करना चाहती है . नए कानून में  ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है कि उसे लेकर सरकार की मंशा पर संदेह व्यक्त किया जाये . संघ प्रमुख ने अपने इस विजया दशमी संदेश में उन लोगों को अलग थलग किए जाने की जरूरत पर बल दिया जो इस कानून को लेकर   देश में सांप्रदायिक सौहार्द्र के वातावरण को बिगाडना चाहते हैं . संघप्रमुख का इशारा वास्तव में सी ए ए के विरोध में नई दिल्ली स्थित शाहीन बाग में लगभग 100दिनों तक उस धरने की ओर था जिसके कारण धरना स्थल के समीपस्थ मार्गों पर लंबे तक यातायात अवरुद्ध रहा था . सुप्रींम कोर्ट ने भी विगत दिनों अपने फैसले में कहा था कि  सरकार के कदम से असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है परंतु इसके लिए सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती . गौर तलब है कि मोहन भागवत ने कुछ दिनों पूर्व ही अपने एक भाषण में कहा था कि भारत में रहने वाले मुसलमान दुनिया के दूसरे देशों से कहीं अधिक संतुष्ट हैं . विजयादशमी पर दिए गए अपने उदबोधन के माध्यम से संघ प्रमुख ने दरअसल अपना यही चेतावनी देना चाहते थे  कि देश में सी ए ए को लेकर सोची समझी साजिश के तहत सांप्रदायिक वौमनस्य पैदा करने की जो साजिश चल रही है उसके प्रति सावधान रहने की जरूरत है .संघ प्रमुख ने दो टूक लहजे में यहां तक कहा कि राजनीतिकस्वार्थ,कट्टरपन,अलगाव की भावना ,भारत के प्रति शत्रुता तथा जागतिक वर्चस्व की महत्वाकांक्षा का अजीब सम्मिश्रण भारत की एकात्मता के विरुद्ध काम कर रहा है . यह समझ कर हमें धैर्य से काम लेना होगा .

संघ प्रमुख ने कहा कि  संविधान एवं कानून का पालन करते हुए अहिंसक तरीके से हमें सबको एक सूत्र में बांधने के लिए प्रयास रत रहना होगा . यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि  नागरिकता संशोधन कानून के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए एक  संघ एक सक्रिय अभियान भी चला चुका है जो काफी सफल रहा था . संघ प्रमुख ने अपने इस विजयादशमी संदेश के माध्यम से इस बात पर विशेष जोर दिया है कि यह अभियान सतत जारी रखा जाना चाहिए ताकि सरकार की किसी भी मानवीय पहल को निशाना बनाकर सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाडने की कोशिश करने वाले तत्वों को अपने कुत्सित इरादों में सफलता न मिल सके . संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने इस संदेश में चीन की विस्तारवादी नीति का विशेष उल्लेख करते हुए जो कुछ कहा उसके द्वारा वे केंद्र  सरकार को भी सचेत करना चाहते थे कि चीन को इस बार हमने जैसा माकूल जवाब दिया है  उससे चीन भले ही सहम गया हो परंतु चीन की बातों पर आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता . हम यह नहीं जानते कि वह आगे क्या करेगा इसलिए हमें अपनी सतर्कता और सजगता बनाए रखनी होगी . चीन की विस्तारवादी नीति की तीखी आलोचना से कोई परहेज न करते हुए संघ प्रमुख ने   उसकी प्रवृत्तियों के लिए'राक्षसी' शब्द का प्रयोग कर यह जता दिया कि चीन के इरादों को समझने में  हमें कोई भूल नहीं करना चाहिए .कोरोना की महामारी के संदर्भ में चीन की संदिग्ध भूमिका से सारा विश्व परिचित है परंतु अपनी आर्थिक और सामरिक ताकत के मद में आकर उसने सीमा पर जो हरकत की है वह भी सारी दुनिया देख चुकी है . अंतर्राष्ट्रीय जगत में चीन से बडा स्थान प्राप्त करके तथा आर्थिक सामरिक क्षेत्र में उससे अधिक सामर्थ्य हासिल करके ही हम उसको माकूल जवाब दे सकते हैं . यही सर्वोत्तम रास्ता है . संघ प्रमुख ने केंद्र सरकार को भी सलाह दी कि हमें श्रीलंका ,बांगलादेश ,नेपाल,और बृह्मदेश जैसे अपने पडोसी देशों के साथ अपने मैत्री संबंधों को मजबूत बनाने के लिए और सक्रिय प्रयास करना चाहिए .

देश मे कोरोना के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को प्रभावी बताते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि सरकार के इन्हीं कदमों के कारण कई दूसरे देशों की तुलना में हम बेहतर स्थिति में रहे हैं . संघ प्रमुख ने कोरोना काल में प्रभावित गरीब तबके ,प्रवासी मजदूरों तथा समाज के अन्य कमजोर वर्गों के लोगों की मदद करने वाले संगठनों ,स्वयंसेवकों और सेवाभावी नागरिकों की प्रशंसा करते हुए संघ प्र मुख ने कहा कि इस संकट से  निपटने  में लोगों ने जो सहृदयता दिखाई उसने यह साबित कर दिया कि समाज में  मानवीय जीवन मूल्य अभी भी कायम हैं और यही हमारी संस्कृति की विशिष्ट पहचान है . संघ प्रमुख ने इसअवसर पर उन लोगों का पुण्य स्मरण किया जो  महामारी के चिरनिद्रा में लीन हो चुके हैं .मोहन भागवत ने भावुक होते हुए कहा कि सभी बलिदानियों की पावन स्मृति में हमारी विनम्र श्रद्धांजलि है . 

             संघ प्रमुख ने अपने सारगर्भित  विजयादशमी संदेश में इस बात पर विशेष जोर दिया कि कोरोना संकट के  कारण विस्थापित जिन प्रवासी मजदूरों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड रहा है उनके आर्थिक पुनर्वास हेतु विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है . इस काल में में जो सेवा भावना और एकजुटता देखने को मिली है उसे  हमें जीवन का अनिवार्य हिस्सा बना लेना चाहिए . अर्थ ,श्रम,कृषि,उद्योग और शिक्षा नीति में स्व को लाने की इच्छा रखकर कुछ आशाजनक कदम कदम विगत दिनों उठाए गए हैं . व्यापक संवाद के आधार पर नई शिक्षा नीति की घोषणा की गई है . Vocal for Local का नारा स्वदेशी की संभावनाओं की उत्तम शुरुआत है परंतु इन सबके यशस्वी क्रियान्वयन होने  तक बारीक नजर ऱखनी पडेगी . स्व या आत्मत्व का विचार जब सभी लोग व्यापक परिप्रेक्ष्य में आत्मसात करेंगे तब  इस यात्रा की सफलता निसंदेह सुनिश्चित है .