जनजातीय सुरक्षा मंच ने सौंपा ज्ञापन, धर्मान्तरित जनजातियों का आरक्षण समाप्त करे सरकार

दिंनाक: 10 Nov 2020 17:44:20

 


 

भोपाल - जनजातीय सुरक्षा मंच ने मध्यप्रदेश की राज्यपाल श्री आनंदीबेन पटेल को ज्ञापन सौंपकर धर्मान्तरित जनजातियों को अनुसुचित जनजाति से हटाकर उन्हें दिया जाने वाला आरक्षण समाप्त करने की मांग की है.

मंच का कहना है कि भारतीय अधिनियम 1935 के अंतर्गत भारतीय ईसाई की परिभाषा में यह कहा गया है की भारतीय ईसाई वह होगा जो कोई भी ईसाई पंथ को मानता हो और यूरोपीय या आंगलो-इंडियन न हो। इसके अनुसार अनुसूचित जनजाति से जब एक व्यक्ति ईसाई धर्म में धर्मातरित हो जाता है, स्वाभाविक रूप से वह व्यक्ति भारतीय ईसाई की श्रेणी में आएगा अतः उसको किसी भी प्रकार की आरक्षण की सुविधा ना असंवैधानिक माना जायेगा।

वास्तविक जनजातियों के साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ जनजाति सुरक्षा मंच वर्षों से लड़ते आया है। अभी तक बहुत से सुविधाओं का धर्मातरित लोगों द्वारा उपभोग किया जाता रहा है जो आर्थिक और शैक्षिणक दृष्टि से वास्तविक जनजातियों से तुलना में काफी कुछ अच्छे स्थिति में है। जनजाति सुरक्षा मंच यह मांग करता है कि काफी विलंब हो चुकने के बावजूद उपर बताये गये दिशा में संशोधन करना अत्यंत आवश्यक है।

इस संबंध में जनमत संग्रह करने हेतु जनजाति सुरक्षा मंच ने 2010 में एक हस्ताक्षर अभियान चलाया था जिसमें देशभर के 18 वर्ष ऊपर के आयुवाले 27.67 लाख जनजाति लोगों ने हस्ताक्षर किया। स्व. जगदेव राम उराँव जी, स्व दिलीप सिंह भूरिया जी एवं श्रीमती अनुसुईया जी उड़के (तत्कालीन राज्य सभा सदस्य एंव वर्तमान छत्तीसगढ़ के राज्यपाल) के नेतृत्व में देशभर के जनजाति नेताओं के एक प्रतिनिधि मंडल ने तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल को मिलकर यह जनमत संग्रह का आवेदन सौपा था। जनजातीय सुरक्षा मंच का कहना है कि 27.67 लाख जनजाति लोगों की मनोकामना - न्यायोचित मांग को संज्ञान में लेने या आवश्यक कदम उठाने का कोई प्रयास दिखाई नहीं दे रहा।