26 नवम्बर, जब देशवासियों की लाशों पर कांग्रेस ने लिखी हिन्दू आतंकवाद की साजिश

दिंनाक: 26 Nov 2020 18:12:48


 

    - रजनीश कुमार     

26 नवंबर 2008 की शाम तक मुंबई सामान्य था। हर दिन की भांति सडकों पर वहीं रफ़्तार थी, वाहनों के पहिये तेज गति से अपने मंजिलों की ओर बढ़ रहे थे। लोग बाजारों में खरीदारी कर रहे थे, वहीं कुछ लोग मरीन ड्राइव पर प्राकृतिक सानिध्य में ठंडी हवा का आनंद ले रहे थे, चहलकदमी कर रहे थे। लेकिन जैसे-जैसे मुंबई रात के अंधेरे की तरफ बढ़नी शुरू हुई, वैसे-वैसे मुंबई की सड़कों पर चीख-पुकार तेज होती चली गई।

पाकिस्तान से आए जैश-ए-मोहम्मद के 10 आतंकवादियों ने मुंबई को बम धमाकों और गोलीबारी से दहला दिया। इस जिहादी हमले में कुल 160 लोग मारे गए, 300 से ज्यादा भारतीय घायल हुए। इस्लामी आतंक के तांडव को आज भले ही 12 साल हो गए हैं लेकिन यह भारतीय इतिहास का वो काला दिन है जिसे कोई चाह कर भी नहीं भूल सकता। यह हमला हर एक भारतीय हृदय पर ऐसा कठोर आघात के जैसा था जिसके दर्द को आजतक महसूस किया जाता है। 

26/11 मुंबई हमला को सिर्फ एक आतंकी हमले तक ही सिमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि यह भारत के आतंरिक सुरक्षा और हिंदुत्व के मौलिक विचार के खिलाफ सुनियोजित साजिश का भी पर्दाफाश करता है। इसलिए आज हम सभी दुर्भावना से ग्रसित उस विचार का विश्लेषण करेंगे जो भारत में रहकर भारत के खिलाफ साजिश रचते है। 

आपको याद होगा, घरेलू राजनीति का फायदा उठाने के लिए हमारे ही देश के नेताओं ने हिन्दू आतंकवाद जैसे शब्द की खोज की थी। तब देश की राष्ट्रीय राजनीति में इस टू लाइनर का खूब प्रयोग किया गया। प्रेस कांफ्रेंस, रैली और वैश्विक मंच से लगातार हिन्दू आतंकवाद जैसे शब्द दोहराए जा रहे थे।

आपको यह भी याद होगा, मुंबई की सड़कों पर हिन्दुओं का खून बहाने के लिए उतारे गए अजमल कसाब और उसके साथियों को हिन्दू पहचान के साथ भेजा गया था। समीर चौधरी जैसा हिन्दू नाम आईएसआई ने उसे इसलिए दिया गया था ताकि ताकि जब कसाब मरे तो लोगों को ये लगे कि वो एक हिन्दू आतंकवादी है। इस्लामी आतंकियों के हांथों में लाल धागा और उन्हें हिन्दू नाम पहचान के साथ इसलिए प्लांट किया गया था ताकि जब वे मारे जायें तो मुंबई से हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी को पुरे विश्व में स्थापित किया जा सके।

लेकिन ऐसा होने से पहले ही कसाब जिन्दा पकड़ा गया और साजिश का पर्दाफाश हो गया। हमें यह महत्वपूर्ण बात समझने की आवश्यकता है कि मुंबई में खून खराबा और जिहाद फ़ैलाने वाले इस्लामी आतंकी भले ही पाकिस्तान से आये थे लेकिन ‘हिन्दू आतंकवाद’ जैसे झूठ की नींव पर साजिश के मकान को खड़ा करने वाले किसी अन्य देश से नहीं आये थे, वे यहीं के जयचंद थे। 

इस साजिश का पर्दाफाश तो बहुत पहले तब ही हो गया जब जिन्दा पकड़ा गया एकमात्र आतंकी अजमल कसाब के पास से प्राप्त हिन्दू पहचान वाले दस्तावेज जांच करने पर फर्जी निकला, और वह पाकिस्तानी आतंकी के रूप में सामने आया।

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यह पूरा प्रकरण यह सोचने की आवश्यकता पर बल देता है कि अगर इस साजिश का पर्दाफाश नहीं होता तो क्या हिन्दू आतंकवाद को जोर शोर से नहीं प्रचारित किया जाता ? क्या यह यह जोर शोर से नहीं कहा जाता कि भगवा आतंकवाद के नाम पर लोगों का खून बहाया जा रहा है? इसके पीछे आरएसएस का ही हाँथ पांव है। विदेशी फंडिंग के दम पर अपनी पत्रकारिता करने वाली जमात तो इस थ्योरी को सच साबित करने के लिए समीर चौधरी का घर और पता ठिकाना तक निकाल लाती। पाकिस्तान से आया अजमल कसाब अगर जिंदा नहीं पकड़ा गया होता तो उसे समीर चौधरी ही साबित कर दिया जाता।

आपको यह याद होगा कि मुंबई पर जिहादी हमले को लेकर कांग्रेस के द्वारा पाकिस्तान को क्लीन चिट तक दे दिया गया था। उस समय दिग्विजय सिंह ने उलटे ही आरएसएस पर साजिश करने का आरोप लगाया था। एक मुस्लिम पत्रकार अजीज बर्नी ने एक किताब लिखी थी। जिस किताब का नाम था 26/11 आरएसएस की साजिश? खास बात ये कि इस किताब का विमोचन दिग्विजय सिंह ने ही किया था। वैचारिक तौर पर एक बार फिर यहाँ से पाकिस्तान को क्लीनचिट दिया गया। किसी भी घटना के घटने के बाद होने वाली क्रियाएं उस घटना का सबुत होते है। मुंबई हमले से पहले और उसके बाद होनेवाली यह क्रियाएं बेहद संदिग्ध है और यह राष्ट्रीय अस्मिता के उपर गहरी साजिश को प्रदर्शित करती है।

हालाँकि इस दुश्चक्र की साजिश कई मौके पर ध्वस्त हुई और साजिश का पर्दाफाश हुआ। यह महत्वपूर्ण बात समझने की जरूरत है कि मुंबई में खून खराबा और जिहाद फ़ैलाने वाले इस्लामी आतंकी भले ही पाकिस्तान से आये थे लेकिन ‘हिन्दू आतंकवाद’ जैसे झूठ की नींव पर साजिश के मकान को खड़ा करने वाले किसी अन्य देश से नहीं आये थे, वे यहीं के जयचंद थे।

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया की किताब Let Me Say It Now में ऐसे साजिशों के कई खुलासे किए गए हैं। किताब में मुंबई आतंकी हमले में एकमात्र जिंदा गिरफ्तार किए गए आतंकी अजमल कसाब को लेकर भी कई खुलासे किए गए हैं। किताब में दावा किया गया है कि आईएसआई ने हमले को हिंदू आतंकवाद का जामा पहनाने की कोशिश की थी। हमलावरों को हिंदू साबित करने के लिए फर्जी आईकार्ड दिए गए थे। हाथ में कलावा बांधे कसाब के आईकार्ड पर समीर चौधरी लिखा हुआ था। नवभारत टाइम्स के अनुसार आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा गिरफ्तार कसाब को किसी भी हाल में रास्ते से हटाने की फिराक में थे, क्योंकि कसाब मुंबई हमले का सबसे बड़ा और एकलौता सबूत था। इस खुलासे के बाद बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने मुम्बई हमला मामले में फिर से जांच की मांग करते हुए कहा था कि 26/11 का मुंबई आतंकी हमला यूपीए और आईएसआई का ज्वाइंट ऑपरेशन था। जिसका मकसद आरएसएस को बैन करना और हिंदुत्व को आतंकवाद से जोड़ना था। 

सत्ता के सिंहासन को सुरक्षित रखने के लिए दोयम दर्जे की राजनीति और राजनितिक अजेंडे के तहत दुष्प्रचार के कई उदहारण आपने देखे होंगे लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय स्वाभिमान को अंगूठा दिखाकर पूरी दुनिया के सामने ’हिन्दू आतंकवाद’ जैसे शब्द गढ़ने वाले निश्चित ही भारतीय इतिहास में जयचंद से भी बड़े जयचंद के रूप में याद किये जाते रहेंगे। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि कांग्रेस की इसी मानसिकता के कारण आज हिन्दू सशक्त और एकजुट हो रहे और देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस गर्त में गोते लगा रही है।