उज्जैन के युवा इस तरह मनाते हैं वैलेंटाइन डे

दिंनाक: 14 Feb 2020 16:22:07


फरवरी का पहला सप्ताह युवाओं में खासा चर्चा का विषय बना रहता है। इस पूरे सप्ताह को बड़ी संख्या में युवा वेलेंटाइन वीक के रूप में मनाते हैं। वैलेंटाइन डे को प्यार करने वालों का खास दिन बताया जाता है, अधिकतर लोग इसे अपने अपने तरीके से मनाते भी हैं। इसे प्यार करने वालों का दिन माना जाता है हालांकि कुछ जगहों पर इस दिन को मनाने के काफी अनूठे तरीके सामने आते हैं।

जिस प्रकार से देश और दुनिया का ट्रेंड बदल रहा है उसी प्रकार से भारत में भी युवाओं के बीच लोकप्रिय इस दिन को मनाने के तरीके बदलते जा रहे हैं। इसी प्रकार मध्य प्रदेश के उज्जैन के युवा वर्ग के लिए वैलेंटाइन डे का दिन सिर्फ प्यार मोहब्बत करने का दिन ही नहीं बल्कि एक विशेष पूजा का दिन भी है जी हां वैलेंटाइन डे पर उज्जैन के एक मंदिर में युवा करते हैं भाई बहन की विशेष पूजा और वैलेंटाइन डे को अपने एक अनूठे ही तरीके से मनाते हैं। 

भाई बहिन के प्रेम दिवस के रूप में मनाते है वैलेंटाइन डे 

उज्जैन के युवा वैलेंटाइन डे को भाई-बहन के प्रेम दिवस के रूप में मनाते हैं जानकारी के अनुसार उज्जैन के डॉ कैलाश नागवंशी 14 फरवरी को शहर के युवाओं को भाई-बहन प्रेम मंदिर में दर्शन पूजन करने का आग्रह करते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने शहर में भाई-बहन मंदिर बनवाया है। डॉक्टर नागवंशी ने बताया कि इस दिन भाई-बहन प्रेम मंदिर में बड़ी संख्या में युवा दर्शन पूजन करने मंदिर पहुंचते हैं। यह मंदिर विश्व का प्रथम भाई-बहन प्रेम मंदिर है। इसका निर्माण उज्जैन के आस्था गार्डन के पीछे नए ब्रिज के पास जीवन खेड़ी गांव में किया गया है। सामाजिक कल्याण समिति जीवन खेड़ी के संस्थापक डॉ कैलाश चंद्र नागवंशी ने बताया कि सिंहस्थ महापर्व में विश्व के प्रथम भाई-बहन मंदिर का निर्माण कराया गया था। 

क्यों ख़ास है भाई बहिन प्रेम मंदिर  

दुनिया का एकलौता भाई बहन प्रेम मंदिर उज्जैन में बना हुआ है अब आप यह सोच रहे होंगे कि आखिर यह भाई-बहन कौन है ? तो हम बता दें कि भगवान गणेश जी के पुत्र शुभ और लाभ दोनों रक्षाबंधन वाले दिन पिता से जिद कर बैठे थे सुनहरी राखी बंधवानी है लेकिन वह राखी कैसे बंधवाएं?  उनकी तो कोई बहन ही नहीं है दोनों पुत्रों की विनती सुनकर गौरी पुत्र गणेश ने कहा कि तुम लोग दुखी ना हो मैं अभी तुम्हें बहन प्रदान करता हूं। तब श्री गणेश ने अपने त्रिशुल से मां संतोषी को प्रकट कर शुभ और लाभ के लिए रक्षाबंधन के दिन बहन प्रदान की, जिसके बाद मां संतोषी ने भगवान गणेश के दोनों पुत्रों को राखी बांधी इस प्रकार माता संतोषी और शुभ लाभ आपस में भाई बहन हुए ।