खंडवा में विशेष समुदाय के लोगों ने स्वयंसेवक को पीट-पीट कर मार डाला

दिंनाक: 03 Jun 2020 18:48:53


सड़क पर भीड़ जमी है, गाँव के सैंकड़ों लोग एक घर के बाहर खड़े हैं.. किसी तरह भीड़ को चीरते अन्दर तक पहुंचे तो घर की चौखट पर मातम पसरा है। परिवार के सभी सदस्य किसी तरह खुद को काबू कर प् रहे हैं।। हर तरफ रोने का शोर कानों को चीर देने वाला है लेकिन उसके बावजूद लोगों की आँखों में डर साफ़ साफ़ दिख रहा है। किसी तरह राजेश फूलमाली के भाई मनोज फूलमाली गहरी सांस लेते हुए कहते हैं “मेरे भाई को मुसलमानों ने मार डाला”... आँखें दुबारा से डबडबा जाती हैं और आगे कुछ और पूछने की हमारी हिम्मत नहीं बन पाई।

मध्यप्रदेश के खंडवा में 18 मई को “विशेष समुदाय” के कुछ लोगों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक राजेश फूलमाली के घर पर हमला कर दिया। उन्हें बेरहमी से पीटा गया और बचने की कोशिश करने पर उनकी बहन शीला और चाचा पर भी हमला किया। इस घटना में कई लोग गंभीर तौर पर घायल हुए। राजेश को पास के सागर जिला चिकिस्तालय लाया गया जहाँ से 19 मई को उन्हें गाँधी मेडिकल कॉलेज भोपाल रेफर किया गया। उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ने के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, नई दिल्ली ने हत्स्छेप किया और उन्हें 21 मई को नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किया गया। जहाँ चले लम्बे इलाज के बाद भी राजेश हमले के जख्मों से उबर नहीं पाए और 31 मई को उनकी मौत हो गयी।


स्थानीय पुलिस प्रशासन का कहना है कि बकरी चराने की घटना को लेकर हुए विवाद के बाद स्थिति बिगड़ी और आपसी झगडे में लगी चोटों के बाद राजेश की मौत हो गयी। पुलिस ने सरफराज, सलमान, शबीर, अरमान, शाकिर, आसिफ, अब्दुल, अमीन, बरकत, वहीद, रहमान, वहीद, सोनू, सादिक, इरशाद, परवेश, यूसुफ और सात अन्य लोगों को राजेश फूलमाली और उनके परिवार पर हमला करने के लिए हिरासत में लिए है लेकिन चौंकाने वाकी बात यह यह है कि पुलिस ने किसी पर भी हत्या के मामले के आरोप में दर्ज नहीं किया है।

 

मामले को छुपा रही है पुलिस

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस मामले को छिपाने के लिए बकरी की झूठी कहानी गढ़ रही है। स्थानीय निवासी माधव झा का कहना है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं है, प्रायोजित तरीके से हमला करके राजेश की मोबलिंचिंग की गयी है। “समुदाय विशेष” के कुछ लोगों द्वारा 22 अप्रैल को फेसबुक पर सीता माता को लेकर अश्लील टिपण्णी की गयी थी, जिसकी जानकारी लगते हीं राजेश ने अपने कुछ साथियों के साथ 29 अप्रैल को स्थानीय थाने में इसकी रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। 

 

विवादित पोस्ट के खिलाफ की गयी कार्यवाही 

 

 

 

पहले तो पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी की लेकिन उसके बाद 4 मुस्लिम युवकों को हिरासत में लिया लेकिन पुलिस ने आरोपित युवकों को समझा  कर छोड़ दिया और कोई कार्यवाही नहीं की। इसके बाद से इन युवकों ने हिन्दुओं को खुलेआम मारने की धमकी दी। आरोपी  अमीन पहले भी सोशल मीडिया मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करता रहा है लेकिन उसपर कोई कार्यवाही नहीं हुई।

 

 


राजेश के भाई मनोज फूलमाली बताते हैं कि मुसलमानों ने गाँव में पथराव किया, और लोगों पर लोहे के रॉड से हमला किया। उनका आरोप है कि रामनगर ठाणे के सबइंस्पेक्टर पी सी शिंदे ने इस मामले गंभीरता से नहीं लिया जिसके कारन उनके भाई की मृत्यु हो गई। मनोज रोते हुए पूछते हैं कि ‘ राजेश की 15 महीने की छोटी सी बिटिया है, ठीक से बोल भी नहीं पाती वो जब पूछेगी तो मैं क्या बताऊंगा....’।

ग्रामीण आरोपियों के जल्द गिरफ़्तारी और राजेश के परिवार के लिए सहायता की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी और उचित मुआवजा दिया जाए ताकि परिवार को आगे किसी मुश्किल का सामना न करना पड़े।

 

सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भी हुई थी हिंसा

खंडवा जिले से ‘विशेष समुदाय’ द्वारा हिंसा का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले साल सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भी जिले में पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटना भी हुई है। जिले के इमलीपुरा क्षेत्र में पुलिस पार्टी पर पथराव किया गया था। दिपाला जहाँ राजेश को पीट पीट कर मार डाला गया और इमलीपुरा दोनों मुस्लिम बहुल इलाके हैं।

खंडवा लम्बे समय तक स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (सिमी) का गढ़ रहा है। इस दौरान अकिल खिलजी ने खंडवा जिले में सिमी का नेटवर्क तैयार किया था, वह मुस्लिम युवाओं को जिहाद का पाठ पढ़ा कर आतंकी गतिविधियों से जोड़ता था। अज भी खंडवा में सिमी के प्रभाव को पूरी तरह से नाकारा नहीं जा सकता है। 2002 में सरकार ने सिमी पर प्रतिबन्ध लगा दिया था उससे पहले इस जिले में सिमी ने कई बार दंगे भड़काए थे।