राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुवर्तन से भारतीय शिक्षण संस्थान वैश्विक स्तर पर अपना स्थान बना पाएगें -प्रो.के.जी.सुरेश

दिंनाक: 16 Sep 2020 15:00:20


भोपाल। विद्याभारती मध्यभारत प्रांत द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 20020 को लेकर समाज में व्यापक जन-जागरण करने हेतु स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं समाज के आम नागरिकों को इस विषय से जोड़ने हेतु #MyNEPcompetition का आयोजन करने जा रहा है। जिसका शुभारंभ कार्यक्रम वेटनरी सभागार में प्रकट कार्यक्रम के रुप में सम्पन्न हुआ ।  इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. मोहन यादव, स्कूली शिक्षा मंत्री श्री इन्दरसिंह परमार, केन्द्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलाधिपति डाॅ. प्रकाश बरतूनिया, कुलपतिगण क्रमशः डाॅ. के.जी. सुरेश(एम.सी.यू.भोपाल), प्रो. सुनील कुमार (आर.जी.पी.वी., भोपाल) एवं प्रो.आर.जे.राव (बी.यू.भोपाल) मंचासीन थे।

कार्यक्रम में भारत सरकार के शिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक, मध्यप्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान, सिने अभिनेता श्री राजीव वर्मा एवं ओलंम्पिक खिलाड़ी श्री अंकित शर्मा द्वारा इस अभियान को लेकर व्यक्त किए गए शुभकामाना वीडियो एवं संदेश का प्रसारण किया गया। मंचासीन अतिथियों द्वारा प्रतियोगिता के पोर्टल की ई लाॅचिंग की गई ।  

इस अवसर पर श्री भालचन्द्र रावले (क्षेत्र संगठनमंत्री विद्याभारती, मध्यक्षेत्र), श्री शषिकान्त फड़के, श्री अषोक पांडे (पूर्व चेयरमेन एम.पी.पी.एस.सी ), डाॅ. रामदेव भारद्वाज (कुलपति अटलविहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय, भोपाल), डाॅ. अखिलेश पाण्डेय(कुलपति विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन), डाॅ अनिल कोठारी (डी.जी.मेपकाॅस्ट) सहित शिक्षाविद्, कलाक्षेत्र, सामाजिक कार्यकर्ता, साहित्यक, शासकीय विद्यालय एवं काॅलेजों के प्राचार्य, छात्र/छात्राऐं आदि उपस्थित थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ माॅ सरस्वती के समक्ष सरस्वती वंदना से किया गया। कार्यक्रम का संचालन अभियान संयोजक डाॅ. शषिरंजन अकेला एवं कार्यक्रम की प्रस्तावना डाॅ. रामकुमार भावसार (प्रांत प्रमुख, विद्याभारती मध्यभारत प्रांत) ने रखी ।


कार्यक्रम का यूट्यूब एवं  फेसबुक तथा विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से लाईव प्रसारण किया गया जिसे हजारो लोगों ने देखा।  

 कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. मोहन यादव ने कहा कि जब हिमालय से गंगा का अवतरण हुआ तो उसने बुराईयों को अपने में बहा कर एवं अच्छाईयों को लोगों तक पहुँचाकर समाज का कल्याण किया। इसी प्रकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 न केवल भारत अपितु सम्पूर्ण विश्व के लिए धरोहर बनेगी। इस नीति में किए गए प्रावधानों के अनुवर्तन से भारत विश्व का नेतृत्व करेगा। स्वामी विवेकानंद के स्वप्न को साकार करने की दिशा में यह शिक्षा नीति कारगर सिद्ध होगी।    

श्री इन्दरसिंह परमार (स्कूली शिक्षा मंत्री म.प्र.शासन) ने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात यदि देश के नागरिकों के साथ संवाद करके शिक्षा नीति बनाई जाती तो शिक्षा की जो वर्तमान स्थिति है वह नहीं होती । वर्तमान केन्द्र सरकार ने व्यापक संविमर्श के बाद इस नीति का प्रारुप बनाया है। उन्होने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लाॅर्ड मैकाले पुत्रों की अंतिम विदाई के रुप में देखा जाना चाहिए। उन्होने मध्यपद्रेश में शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन की चर्चा करते हुए कहा कि स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है, इसके लिए सरकार टाॅस्क फोर्स का गठन कर इसे लागू कराएगी।

इस अवसर पर विषिष्ट अतिथि प्रो.के.जी.सुरेश (कुलपति, एम.सी.यू. भोपाल) ने कहा कि घोषित राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुवर्तन से भारतीय शिक्षण संस्थान वैश्विक स्तर पर अपना स्थान बना पाएगें। इस नीति को सम्पूर्ण भारत में व्यापक समर्थन मिला है। शिक्षा मंत्रालय का गठन इसी सर्वसम्मिति का प्रतीक है। इस नीति में भारतीय भाषाओं के बारे में व्यापक चर्चा हुई है यह एक फ्लेक्जिबल नीति है जो समाज के सभी वर्गेा की समान रुप सें चिंता करती है।

प्रो.सुनील कुमार (कुलपति, आर.जी.पी.वी. भोपाल) ने कहा कि नई शिक्षा नीति में जो छात्र सीखना चाहता है उसका प्रावधान किया गया है। तकनीकि शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा आमूलचूल परिवर्तन होगा। भारत की विद्वत्ता का अंतराष्ट्रीयकरण करने के लिए इस नीति में व्यापक प्रावधान किए गए है।

प्रो. आर.जे.राव (कुलपति, बी.यू.भोपाल) ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थियों के समग्र विकास का कारण बनेगी साथ ही वह युवा पीढ़ी में राष्ट्रीयता की भावना को प्रबलता से स्थापित करेगी।  

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डाॅ. प्रकाश बरतूनिया (कुलाधिपति, बी.बी.ए.यू.लखनऊ) ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति समग्रता लिए हुए समतावादी नीति है । इसमें समाज के सभी वर्गेा की समान रुप से चिंता की गई है। इस सर्वसमावेशी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन से न केवल छात्र एवं प्राध्यापक बल्कि पूरा समाज लाभान्वित होगा।