माताऐं देती नव जीवन, पिता सुरक्षा करते हैं। लेकिन सच्ची मानवता शिक्षक जीवन में भरते हैं।। - आनंदीबेन पटेल

दिंनाक: 05 Sep 2020 17:53:02


 

 

भोपाल । विद्या भारती मध्यभारत प्रांत द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं शिक्षक की मनोभूमिका विषय पर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदबेन पटेल का व्याख्यान बेवीनार के माध्यम से आयोजित किया गया।

 मुख्य वक्ता के रुप में श्रीमती आनन्दीबेन पटेल (महामहिम राज्यपाल उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश) ने कहा कि सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पुण्य स्मरण करना आज के दिवस की प्रासंगिकता है। नई शिक्षा नीति की सम्पूर्ण देष में चर्चा हो रही है। वर्षो  से अपेक्षित बदलाव लिए ये शिक्षानीति आयी है। इसे जमीन पर उतारने एवं क्रियान्वयन की चिन्ता हम सबकी है।  शिक्षाकों की मनोभूमिका महत्वपूर्ण है। समग्र शिक्षा की नीति यह सभी से हटकर किया गया प्रयास है। अनेक महत्वूपर्ण निर्णयों के साथ राष्ट्रीय शिक्षानीति लागू करने का सामर्थ्य सरकार ने दिखाया है। सरकार की प्रबल प्रतिबध्दता में शंका की गुंजाईश  नहीं है। 21वीं सदी की नींव को तैयार करने वाली शिक्षानीति है। भारत की नयी ताकत एवं विकास के अवसर देने वाली शिक्षानीति है।

श्रीमती आनन्दीबेन पटेल ने कहा कि अतीत एवं वर्तमान के शिक्षक की भूमिका में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।  शिक्षकों का ध्यान अभी शिक्षा की ओर नहीं है। पठन-पाठन का कोई पैमाना एवं वेतन निर्धारण का प्रावधान हो। गुणों के आधार पर  शिक्षा कों का चयन हो, योग्य प्रषिक्षण हो। अभिनव सोच एवं जिज्ञासा को शिक्षक को बढ़ाना होगा।  शिक्षा कों को चाहिए कि वह मजबूत राष्ट्र समाज के लिए रचनात्मकता एवं जीवन लक्ष्य बनाकर शिक्षाप्रदान करें। बदलते समय के साथ  शिक्षकों को भी अपने आपको बदलना आज की प्राथमिकता है। 

श्रीमती आनन्दीबेन पटेल ने कहा कि बच्चों की योग्य देखभाल हेतु परिवार भाव चाहिए। पर्यावरण का भाव भी जुड़ा होना चाहिए। काव्य, कहानियों के माध्यम से पढ़ाने वाला शिक्षक होना चाहिए। विद्यार्थी की प्रेरणा का स्त्रोत शिक्षक है। कक्षा 5वीं तक शिक्षा मातृभाषा में होना चाहिए, जिससे छात्रों की नीव मजबूत हो क्योंकि छात्र अपनी मातृभाषा में ज्यादा शब्दों को ग्रहण करता है। उम्र के अनुरुप पाठ्यक्रम एवं शिक्षक तैयार करने होगें। कैसे सोचा जाए ? यह नई शिक्षानीति में बल दिया गया है। क्या पढ़ना ? यह जानकारी छात्रों को होना चाहिए।  

श्रीमती आनन्दीबेन पटेल ने कहा कि शिक्षक खुली विचारधारा से युवकों को कौषलक्षम एवं दक्ष बनायें। परिवर्तन के लिए सक्षम बनायें। समाज सुधार का कार्य कोई छोटा-बड़ा नहीं होता । भेदभाव एवं ऊँच-नीच का भाव, हीनभाव, महिलाओं पर हो रहे अत्याचार एवं समाज में फैली कुरोतियों से लड़कर समाज को जागृत करना यही शिक्षक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। शहर के छात्रों को गाँव एवं गाँव के बच्चों को शहर दिखाना होगें। परिश्रम करने वालों का सम्मान करने का भाव अपने बच्चों में चाहिए।  शिक्षाकोंके सम्मान एवं गरिमा का राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बड़ा ध्यान दिया गया है। व्यापक स्तर पर क्रियान्वयन हेतु परिसंवाद करें कार्ययोजना बनायें। उन्होने निम्न पंक्तियों के साथ शिक्षक को उसके अस्तित्व का परिचय कराया –

‘‘ ज्ञान दीप की ज्योति जलाकर मन आलोकित करते हैं। विद्या का धन देकर शिक्षक जीवन सुख से भरते हैं।

शिक्षक ईश्वर से बढ़कर है यह कबीर बतलाते हैं। क्योकि शिक्षक ही शिष्यों का ईश्वर तक पहुँचाते हैं।।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि श्री श्रीराम आरावकर (अखिल भारतीय महामंत्री अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान नई दिल्ली) ने कहा कि आचार्य चाणक्य मानते थे कि  साधारण नहीं होता सृजन और प्रलय उसकी गोद में खेलते हैं। विद्यार्थी शिक्षक के आचरण एवं व्यवहार से सीखता है। विद्याभारती विद्यालयों ने सीमित संसाधनों मे महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। मिजोरम और लक्ष्यदीप को छोड़कर विद्याभारती का कार्य सम्पूर्ण भारत वर्ष में है। विद्याभारती के आचार्य बालक के सर्वांगीण विकास के लिए संकल्पित है।  

कार्यक्रम के प्रारंभ में श्री भालचन्द्र रावले (क्षेत्रीय संगठन मंत्री), श्री हितानंद शर्मा (प्रांतीय संगठन मंत्री, मध्यभारत प्रांत) ने प्रांतीय कार्यालय, भोपाल में मॉ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर वेबीनार का शुभारंभ किया। अतिथि द्वय ने आद्य गुरु महर्षि वेदव्यास एवं डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण भी किया  कार्यक्रम का संचालन डॉ. रामकुमार भावसार (प्रांत प्रमुख विद्या भारती मध्यभारत प्रांत) ने किया।   

इस वेबिनार कार्यक्रम में पूज्य संत श्री गिरिशानन्द जी जबलपुर, श्री यतीन्द्र शर्मा (अखिल भारतीय सहसंगठनमंत्री, विद्याभारती, लखनऊ) डॉ. कपिलदेव मिश्रा (कुलपति रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर), सुश्री रेखा चुड़ासमा (अखिल भारतीय सहसंयोजिका बालिका शिक्षा) डॉ.संजय पटवा (क्षेत्र सह मंत्री) श्री शिरोमणि दुबे (अध्यक्ष, सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान, भोपाल), श्री नरेन्द्र कोष्टी(जबलपुर), श्री अखिलेश मिश्रा(उज्जैन), श्री अनिल अग्रवाल (गोविन्दनगर) एवं प्रदेश के विद्यालयों की प्रबंध समितियों के पदाधिकारी, आचार्यगण, पूर्व छात्र आदि महानुभाव उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का प्रसारण विद्या भारती मध्यभारत प्रांत के यूट्यूब चैनल, फेसबुक चैनल एवं मध्यप्रदेश के स्थानीय टी.बी.चैनल पर प्रसारिण किया गया । जिसे प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक गणों ने कार्यक्रम को लाइव देखा। कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के साथ हुआ।