जयंती/पुण्यतिथि

22 मई / जन्मदिवस -समाज सुधारक राजा राममोहन राय

भोपाल(विसंके). हिन्दू समाज में सीता, सावित्री, अनसूया आदि सती-साध्वी स्त्रियों की सदा से पूजा होती रही है। सती का अर्थ है मन, वचन, कर्म से अपने पतिव्रत को समर्पित नारी; पर जब भारत में विदेशी और विधर्मियों के आक्रमण होने लगे, तो मुख्यतः राजस्थान में क्षत्र..

अमर बलिदानी मुरारबाजी देशपाण्डे / बलिदान दिवस – 22 मई 1665

भोपाल(विसंके). पांच जनवरी, 1665 को सूर्यग्रहण के अवसर पर शिवाजी महाराज ने माता जीजाबाई के साथ महाबलेश्वर मन्दिर में पूजा की। फिर वे दक्षिण के विजय अभियान पर निकल गये। तभी उन्हें सूचना मिली कि मिर्जा राजा जयसिंह और दिलेर खाँ पूना में पुरन्दर किले की ओर बढ़..

सिक्किम आधिकारिक रूप से भारत का हिस्सा बना – 16 मई 1975

भोपाल(विसंके). बौद्ध भिक्षु गुरु रिन्पोचे (पद्मसंभव) का 8वीं सदी में सिक्किम दौरा यहाँ से सम्बन्धित सबसे प्राचीन विवरण है। 1642 इस्वी में ख्ये के पाँचवें वंशज फुन्त्सोंग नामग्याल को तीन बौद्ध भिक्षु, जो उत्तर, पूर्व तथा दक्षिण से आये थे, द्वारा युक्सोम में सिक्किम का प्रथम चोग्याल (राजा) घोषित किया गया। इस प्रकार सिक्किम में राजतन्त्र का आरम्भ हुआ।   फुन्त्सोंग नामग्याल के पुत्र, तेन्सुंग नामग्याल ने उनके पश्चात 1670 में कार्य-भार संभाला। तेन्सुंग ने राजधानी को युक्सोम से रबदेन्त्से स्थानान्तर..

अपराजेय, अप्रतिम वीर छत्रपति संभाजी महाराज / जन्म दिवस -14 मई 1657

हिन्दुस्थान में हिंदवी स्वराज एवं हिन्दू पातशाही की गौरवपूर्ण स्थापना करने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज के जयेष्ठ पुत्र छत्रपति संभाजी महाराज का जन्म 14 मई 1657 को पुरंदर गढ पर हुआ. छत्रपति संभाजी के जीवन को यदि चार पंक्तियों में संजोय..

बालकृष्ण चाफेकर / बलिदान दिन – 12 मई, 1899

देश की स्वाधीनता के लिए जिसने भी त्याग और बलिदान दिया, वह धन्य है; पर जिस घर के सब सदस्य फांसी चढ़ गये, वह परिवार सदा के लिए पूज्य है। चाफेकर  बंधुओं का परिवार ऐसा ही था। 1897 में पुणे में भयंकर प्लेग फैल गया। इस बीमारी को नष्ट करने के बहाने ..

9 मई / महाराणा प्रताप जन्मदिवस- भारत के वीरपुत्र महाराणा प्रताप जिन्होंने मुगलों के सामने कभी नहीं झुकाया सिर

भोपाल(विसंके). महाराणा प्रताप स में उनकी बहादुरी के कारण अमर है। वह अकेले राजपूत राजा थे जिन्होंने मुगल बादशाह अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की। उनका जन्म आज ही के दिन यानी 9 मई, 1540 को राजस्थान के कुंभलगढ़ किले में हुआ था। आइये आज उनसे जुड़ीं खास बातें जानते हैं. उनके पिता का नाम महाराणा उदयसिंह था और माता महारानी जयवंता बाई थीं। अपने परिवार की वह सबसे बड़ी संतान थे। उनके बचपन का नाम कीका था। बचपन से ही महाराणा प्रताप बहादुर और दृढ़ निश्चयी थे। सामान्य शिक्षा से खेलकूद एवं हथियार बनाने ..

हिन्दी साहित्य के गौरवशाली नक्षत्र महावीर प्रसाद द्विवेदी / जन्म दिवस – 9 मई

भोपाल(विसंके). हिन्दी साहित्य के गौरवशाली नक्षत्र महावीर प्रसाद द्विवेदी को अपने अनूठे लेखन शिल्प के कारण हिन्दी का प्रथम लोकमान्य आचार्य माना जाता है। इनका जन्म ग्राम दौलतपुर (रायबरेली, उ.प्र.) में 9 मई, 1864 को पंडित रामसहाय दुबे के घर में हुआ था। इनक..

वीर हरिसिंह नलवा / बलिदान दिवस – 30 अप्रैल

भारत पर विदेशी आक्रमणकारियों की मार सर्वप्रथम सिन्ध और पंजाब को ही झेलनी पड़ी। 1802 में रणजीत सिंह विधिवत महाराजा बन गये। 40 साल के शासन में उन्हें लगातार अफगानों और पठानों से जूझना पड़ा। इसमें मुख्य भूमिका उनके सेनापति हरिसिंह नलवा की रही। 1802 में उन्..

कांगला दुर्ग (मणिपुर) का पतन / 27 अप्रैल – इतिहास स्मृति

1857 के स्वाधीनता संग्राम में सफलता के बाद अंग्रेजों ने ऐसे क्षेत्रों को भी अपने अधीन करने का प्रयास किया, जो उनके कब्जे में नहीं थे। पूर्वोत्तर भारत में मणिपुर एक ऐसा ही क्षेत्र था। स्वाधीनता प्रेमी वीर टिकेन्द्रजीत सिंह वहां के युवराज तथा सेनापति थे। उन..

“वीर कुंवर सिंह” 1857 के महासमर के वयोवृद्ध योद्धा / पूण्य तिथि – 26 अप्रैल

भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के हीरो रहे जगदीशपुर के बाबू वीर कुंवर सिंह को एक  बेजोड़ व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है जो 80 वर्ष की उम्र में भी लड़ने तथा विजय हासिल करने का माद्दा रखते थे. अपने ढलते उम्र और बिगड़ते सेहत के बावजूद भी उन्होंने ..

अ.भा.वि.प .(ABVP) की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण आधार “यशवंत वासुदेव केलकर” / जन्म दिवस – 25 अप्रैल

‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ की कार्यप्रणाली को जिन्होंने महत्वपूर्ण आधार दिया, वे थे श्री यशवंत वासुदेव केलकर। उनका जन्म 25 अप्रैल, 1925 को पंढरपुर (महाराष्ट्र) में हुआ था। उनके पिता शिक्षा विभाग में नौकरी करते थे। वे रूढि़वादी थे..

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर / पुण्य तिथि – 24 अप्रैल

भोपाल(विसंके). रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्म बिहार प्रदेश के बेगूसराय (पुराने मुंगेर) जिले के सिमरिया गांव में एक निम्न मध्यवर्गीय भूमिहार ब्राह्मण किसान परिवार में 23 सिंतबर 1908 को हुआ था।  उस जमाने में सिमरिया गांव के घर–घर..

20 अप्रैल/ जयंती विशेष: जानिए शंकर से शंकराचार्य बनने की कहानी, छोटी उम्र में पा लिया था महाज्ञान

भोपाल(विसंके). शंकराचार्य का जन्म सन् 788 ई. में केरल के कालपी (काषल) नाम के गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम शिवगुरु और माता का नाम सुभद्रा था। शंकराचार्य के पिता भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। विवाह के बाद लंबे समय तक जब उनके यहां संतान नहीं हुई तो शिवगुर..

तपस्वी शिक्षाविद महात्मा हंसराज – 19 अप्रैल जन्म-दिवस

भोपाल(विसंके). भारत के शैक्षिक जगत में डी.ए.वी. विद्यालयों का बहुत बड़ा योगदान है। विद्यालयों की इस शृंखला के संस्थापक हंसराज जी का जन्म महान संगीतकार बैजू बावरा के जन्म से धन्य हुए ग्राम बैजवाड़ा (जिला होशियारपुर, पंजाब) में 19 अप्रैल, 1864 को ..

अमर बलिदानी तात्या टोपे / बलिदान दिवस – 18 अप्रैल

भोपाल(विसंके). छत्रपति शिवाजी के उत्तराधिकारी पेशवाओं ने उनकी विरासत को बड़ी सावधानी से सँभाला। अंग्रेजों ने उनका प्रभुत्व समाप्त कर पेशवा बाजीराव द्वितीय को आठ लाख वार्षिक पेंशन देकर कानपुर के पास बिठूर में नजरबन्द कर दिया। इनके दरबारी धर्माध्यक्ष रघुन..

संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर / जन्म दिवस – 14 अप्रैल

भारतीय संविधान के निर्माता डा. भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को महू (म.प्र.) में हुआ था। उनके पिता श्री रामजी सकपाल तथा माता भीमाबाई धर्मप्रेमी दम्पति थे। उनका जन्म महार जाति में हुआ था, जो उस समय अस्पृश्य मानी जाती थी। इस कारण भीम..

13 अप्रैल, जन्म-दिवस/ कृषि वैज्ञानिक सर गंगाराम

भोपाल(विसंके). श्री गंगाराम का जन्म 13 अप्रैल, 1851 को मंगटानवाला (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। वे बचपन से ही होनहार विद्यार्थी थे। अपनी सभी परीक्षाएँ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर वे पंजाब के सार्वजनिक निर्माण विभाग (पी.डब्ल्यू.डी.) में अभियन्ता के रूप ..

अंग्रेजो के अत्याचारों की पराकाष्ठा “जलियांवाला बाग कांड” / 13 अप्रैल – इतिहास-स्मृति

भारतीय स्वतन्त्रता के लिए हुए संघर्ष के गौरवशाली इतिहास में अमृतसर के जलियाँवाला बाग का अप्रतिम स्थान है। इस आधुनिक तीर्थ पर हर देशवासी का मस्तक उन वीरों की याद में स्वयं ही झुक जाता है, जिन्होंने अपने रक्त से भारत की स्वतन्त्रता के पेड़ को सींचा। 13&nbs..

महान सेनानी राणा सांगा / जन्म दिवस -12 अप्रैल

राणा सांगा का पूरा नाम महाराणा संग्रामसिंह था.  उनका जन्म  12 अप्रैल, 1484  को मालवा, राजस्थान मे हुआ था. राणा सांगा सिसोदिया (सूर्यवंशी राजपूत) राजवंशी थे. राणा सांगा ने विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध सभी राजपूतों को एकजुट किया।..

समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले / जन्म दिवस – 11 अप्रैल

महात्मा ज्योतिबा फुले इनका जन्म 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र के सतारा ज़िले में हुआ था | उनका असली  नाम ज्योतिराव गोविंदराव फुले था | वह 19वी सदी  की एक बड़े समाज सुधारक, सक्रिय प्रतिभागी तथा विचारक थे |  ज्‍योतिबा ..

मंगल पाण्डे / बलिदान दिवस – 8 अप्रैल

अंग्रेजी शासन के विरुद्ध चले लम्बे संग्राम का बिगुल बजाने वाले पहले क्रान्तिवीर मंगल पांडे का जन्म 30 जनवरी, 1831 को ग्राम नगवा (बलिया, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। कुछ लोग इनका जन्म ग्राम सहरपुर (जिला साकेत, उ0प्र0) तथा जन्मतिथि 19 जुलाई, 1927 भी मानते है..

अप्रतिम योद्धा बेगम हजरत महल / पुण्य तिथि – 7 अप्रैल

1857 के स्वाधीनता संग्राम में जो महिलाएं पुरुषों से भी अधिक सक्रिय रहीं, उनमें बेगम हजरत महल का नाम उल्लेखनीय है। मुगलों के कमजोर होने पर कई छोटी रियासतें स्वतन्त्र हो गयीं। अवध भी उनमें से एक थी। श्रीराम के भाई लक्ष्मण के नाम पर बसा लखनऊ नगर अवध की राज..

महानायक फील्ड मार्शल मानेकशा / जन्म दिवस – 3 अप्रैल

20वीं शती के प्रख्यात सेनापति फील्ड मार्शल सैमजी होरमुसजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशा का जन्म 3 अपै्रल 1914 को एक पारसी परिवार में अमृतसर में हुआ था। उनके पिता जी वहां चिकित्सक थे। पारसी परम्परा में अपने नाम के बाद पिता, दादा और परदादा का नाम भी जोड़ा जाता ..

भारतीय क्रान्ति के दूत श्यामजी कृष्ण वर्मा / पुण्य तिथि – 30 मार्च

भारत के स्वाधीनता संग्राम में जिन महापुरुषों ने विदेश में रहकर क्रान्ति की मशाल जलाये रखी, उनमें श्यामजी कृष्ण वर्मा का नाम अग्रणी है। चार अक्तूबर, 1857 को कच्छ (गुजरात) के मांडवी नगर में जन्मे श्यामजी पढ़ने में बहुत तेज थे। इनके पिता श्रीकृष्ण वर्मा की ..

29 मार्च - महावीर जयंती

भोपाल(विसंके).जैन धर्म के २४वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म ईसा से ५९९ वर्ष पूर्व चैत्र शुक्ला त्रयोदशी को ५४३ वर्ष विक्रम पूर्व वैशाली गणतंत्र के लिच्छिवी वंश के महाराज श्री सिद्धार्थ और माता त्रिशला देवी के यहाँ हुआ। यह वह समय था जब भारत अंधविश्वासों ..

सेवा और समर्पण के साधक गुरु अंगद देव / पुण्य तिथि – 28 मार्च

सिख पन्थ के दूसरे गुरु अंगददेव का असली नाम ‘लहणा’ था। उनकी वाणी में जीवों पर दया, अहंकार का त्याग, मनुष्य मात्र से प्रेम, रोटी की चिन्ता छोड़कर परमात्मा की सुध लेने की बात कही गयी है। वे उन सब परीक्षाओं में सफल रहे, जिनमें गुरु नानक के ..

क्रान्तिवीर काशीराम, जिन्हें डाकू समझा गया / बलिदान दिवस – 27 मार्च

भारतीय स्वाधीनता संग्राम में अनेक ऐसे वीरों ने भी बलिदान दिया, जिन्हें गलत समझा गया। 1981 में ग्राम बड़ी मढ़ौली (अम्बाला, पंजाब) में पण्डित गंगाराम के घर में जन्मे काशीराम ऐसे ही क्रान्तिवीर थे, जिन्हें डाकू समझ कर  अपने देशवासियों ने ही मार डाला।शिक..

वीर भगत सिंह, शिवराम हरि राजगुरु, सुखदेव थापर / बलिदान दिवस – 23 मार्च

भगत सिंह, शिवराम हरि राजगुरु, सुखदेव थापर  भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने  देश की आज़ादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया, वह आज के युवकों के लिए एक बहुत बड़ा आदर्श है। इन्होंने क..

10 मार्च / पुण्यतिथि – समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले

सावित्रीबाई फुले का जन्म महाराष्ट्र के नायगांव में 1831 को हुआ था. उनके परिवार में सभी खेती करते थे. 9 साल की आयु में ही उनका विवाह 1840 में 12 साल के ज्योतिराव फुले से हुआ. सावित्रीबाई और ज्योतिराव को दो संताने है. जिसमे से यशवंतराव को उन्होंने दत्तक लिय..

27 फरवरी / बलिदान दिवस - चन्द्रशेखर आजाद, जो सदा आजाद रहे

चन्द्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को ग्राम माबरा (झाबुआ, मध्य प्रदेश) में हुआ था. बचपन से ही चन्द्रशेखर का मन अंग्रजों के अत्याचार देखकर सुलगता रहता था. किशोरावस्था में वे भागकर अपनी बुआ के पास बनारस आ गये और संस्कृत विद्यापीठ में पढने लगे. बनारस में..

26 फरवरी / पुण्यतिथि - अमर क्रांतिकारी वीर विनायक दामोदर सावरकर

देश के महान स्वतंत्रता सेनानी और हिंदुत्ववादी चिंतक विनायक दामोदर सावरकर का संपूर्ण जीवन हमारे लिए एक प्रेरणा का स्त्रोत है. वे ऐसे पहले क्रांतिकारी थे जिन्होंने सबसे पहले विदेशी वस्त्रों की होली जलाई थी. उनके अदम्य साहस और धैर्य का लोहा अंग्रेज अधिकारी भ..

21 फरवरी / पुण्यतिथि - रानी चेन्नम्मा

भोपाल(विसंके). इतिहास में चेन्नम्मा नाम की दो वीरांगनाएँ प्रसिद्ध हैं. इनमें से एक हैं केलादि और दूसरी कित्तूर की रानी. कर्नाटक के मलवाड क्षेत्र में समुद्र तट तक फैले हुए राज्य केलादि के प्रथम राजा चैडप्पनायक जो सन् 1500 में सिंहासन हुए थे, उन्हीं के राज्..

19 फरवरी / छत्रपति शिवाजी जयंती

दृढ-निश्चयी महान देशभक्त, धर्मात्मा, राष्ट्र निर्माता तथा कुशल प्रशासक शिवाजी का व्यक्तित्व बहुमुखी था. माँ जीजाबाई के प्रति उनकी श्रद्धा और आज्ञाकारिता उन्हें एक आदर्श सुपुत्र सिद्ध करती है. शिवाजी का व्यक्तित्व इतना आकर्षक था कि उनसे मिलने वाला हर व्यक्..

19 फरवरी / जन्मदिवस - सदाशिव राव गोलवलकर (गुरूजी)

     भोपाल(विसंके). गुरूजी का जन्म फाल्गुन मास की एकादशी संवत् 1963 तदनुसार 19 फ़रवरी 1906 को महाराष्ट्र के रामटेक में हुआ था. वे अपने माता-पिता की चौथी संतान थे. उनके पिता का नाम श्री सदाशिव राव उपाख्य 'भाऊ जी'..

17 फरवरी / जन्मदिवस -रामकृष्ण परमहंस

भोपाल(विसंके). रामकृष्ण परमहंस भारत के एक महान संत और विचारक थे. स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस ने प्रायः सभी धर्मों की एकता पर बल दिया था. रामकृष्ण परमहंस का जन्म 17 फरवरी 1836 को पश्चिम बंगाल (तत्कालीन बंगाल प्रान्त) के कामारपुकुर नामक गाँव मे..

11 फरवरी/ पुण्यतिथि / पंडित दीनदयाल उपाध्याय - पंडित दीनदयाल की कल्पना, राजनीति को जोड़क संधि सुधा बनाने की थी – भारतचंद्र नायक

भोपाल(विसंके). लोकतंत्र को प्राणवान बनाने के लिए लोकतंत्र प्रेमी में सत्ता के प्रति अनासक्तिका भाव होना आवश्यक है. पं. दीनदयाल उपाध्याय कहा करते थे कि प्रभु रामचन्द्र ने लोकतांत्रिक भावना को जीकर दिखाया है. जब उनके राज्यारोहण की अयोध्या में तैयारी हो रही ..

10 फरवरी / जन्मदिवस -महर्षि दयानन्द सरस्वती - राष्ट्रवाद के पुरोधा - हिन्दी के योद्धा सेनानी

भोपाल(विसंके). 19वीं सदी में भारतवर्ष में नवजागरण का आरम्भ ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय से आरम्भ होता है राजा राममोहन राय उच्चकोटि के महान पुरूष और अनेक भाषाओं के जानकार थे. स्वामी दयानन्द उनसे लगभग 50 वर्ष पीछे आते हैं. इस शताब्दी में भारतवर्..

संत रैदास: धर्मांतरण के विरोधी - घर वापसी के सूत्रधार - प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). लगभग सवा छः सौ वर्ष पूर्व 1398 की माघ पूर्णिमा को काशी में जन्में संत रविदास यानि संत रैदास को निस्संदेह हम भारत में धर्मांतरण के विरोध में स्वर मुखर करनें वाली और स्वधर्म में घर वापसी करानें के प्रथम या प्रतिनिधि संत कह सकतें है...

29 जनवरी / जन्मदिवस - रज्जू भैया

भोपाल(विसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह का जन्म 29 जनवरी 1922 को ग्राम बनैल जिला बुलन्दशहर, उत्तर प्रदेश में हुआ था. राजेन्द्र सिंह जी को घर में प्यार से रज्जु कहने के कारण उनका यही नाम सर्वत्र लोकप्रिय हुआ. उन्हें ..

24 जनवरी/ नर्मदा जयंती -मध्यप्रदेश की जीवन रेखा माँ नर्मदा - डॉ. किशन कछवाहा

माँ नर्मदा मानव सभ्यता के प्रकट होने वाले उन दिनों की मानव गति विधियों एवं अनुभूतियों की मूक साक्षी है जिसे पाषाण-संस्कृति के विशेषज्ञों द्वारा की गई खोजों से समझा जा सकता है. पुरातन संस्कृत रचना ’’भवानी तंत्र’’ में नर्मदा की जीवन ..

19 जनवरी / बलिदान दिवस - महाराणा प्रताप

भोपाल(विसंके). महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई सन् 1540 कुंभलगढ में जयवन्ती बाई  के गर्भ से हुआ. राणा उदयसिंह की 18 रानियां और 22 पु़त्र थे. प्रताप की माँ सबसे बडी व प्रताप अपने सब भाईयों में बडे थे. 15वीं शताब्दी में गुहादित्य (गुहिल) द्वारा स्थापित सिस..

17 जनवरी / बलिदान दिवस – रामसिंह कूका और उनके गोभक्त शिष्य

नई दिल्ली. 17 जनवरी, 1872 की प्रातः ग्राम जमालपुर (मालेरकोटला, पंजाब) के मैदान में भारी भीड़ एकत्र थी. एक-एक कर 50 गोभक्त सिख वीर वहां लाये गये. उनके हाथ पीछे बंधे थे. इन्हें मृत्युदण्ड दिया जाना था. ये सब सद्गुरु रामसिंह कूका जी के शिष्य थे. अंग्रेज जिल..

स्वामी विवेकानंद: भारतीय संस्कृति के वैश्विक उद्घोषक - प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). स्वामी विवेकानंद जी ने भारत को व भारतत्व को कितना आत्मसात कर लिया था यह कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर के इस कथन से समझा जा सकता है जिसमें उन्होनें कहा था कि – “यदि आप भारत को समझना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानंद को संपूर्णतः पढ़ लीजिय..

3 जनवरी / जन्मदिवस – पांड्य नरेश कट्टबोमन का संकल्प

नई दिल्ली. 17वीं शताब्दी के अन्त में दक्षिण भारत का अधिकांश भाग अर्काट के नवाब के अधीन था. वह कायर लगान भी ठीक से वसूल नहीं कर पाता था. अतः उसने यह काम ईस्ट इंडिया कम्पनी को दे दिया. फिर क्या था, अंग्रेज छल, बल से लगान वसूलने लगे. उनकी शक्ति से अधि..

02 जनवरी / पुण्यतिथि - लाहौर के प्रथम प्रचारक-राजाभाऊ पातुरकर

भोपाल(विसंके). संघ के प्रथम पीढ़ी के प्रचारकों में से एक श्री राजाभाऊ पातुरकर का जन्म 1915 में नागपुर में हुआ था. खेलों में अत्यधिक रूचि के कारण वे अपने साथी छात्रों में बहुत लोकप्रिय थे. उनका परिचय संघ शाखा और डॉ. हेडगेवार से होने के पश्चात डॉ. हेडगेवार..

गुरु गोविन्द सिंह -जन्मदिवस/25 दिसम्बर, 2017

भोपाल(विसंके). गुरु गोविन्दसिंह का जन्म सिक्ख पंथ की स्थापना करने वाले गुरु नानकदेव की नौवीं पीढ़ी तेगबहादुर के यहाँ माता गुजरी से 22 दिसंबर सन 1666 पौष सुदी सप्तमी को पटना साहेब विहार में हुआ. नाम गोविन्दराय रखा गया. फरवरी 1671  में गोविन्दराय परिजनो..

सबके अटल जी-जन्मदिवस/25 दिसम्बर, 2017 - प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात ने कहा था कि “जिस देश का राजा कवि होगा उस देश में कोई दुखी न होगा” – अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल में यह बात चरितार्थ हो रही थी.           &nbs..

भारत के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन-जन्मदिवस/22 दिसम्बर, 1887

भोपाल(विसंके). तमिलनाडु प्रदेश में कुम्भकोणम के पास ‘इरोद’ नामक छोटे से गांव में निवास करने वाले श्रीनिवास अय्यंगर व माता कोमलम्माल के उदर से 22 दिसंबर सन 1887  में पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम रामानुजन रखा गया. पूरा परिवार नामक्कुल गाँव..

20 दिसम्बर / पुण्यतिथि – राष्ट्रसन्त गाडगे बाबा

नई दिल्ली. गाडगे बाबा का जन्म एक अत्यन्त निर्धन परिवार में 23 फरवरी, 1876 को ग्राम कोतेगाँव (अमरावती, महाराष्ट्र) में हुआ था. उनका बचपन का नाम डेबूजी था. निर्धनता के कारण उन्हें किसी प्रकार की विद्यालयी शिक्षा प्राप्त नहीं हुई थी. कुछ बड़े होने पर उनके ..

प्रमुख स्वामी महाराज / जन्म दिवस – 7 दिसंबर, 1922

बोचासणवासाी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) के प्रमुखस्वामी महाराज का आज जन्मदिन है। हालांकि उनका जन्म तो 7 दिसम्बर 1922 को हुआ था, लेकिन तिथि के अनुसार यानी की मागशर सूद आठम को ही उनके जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है। प्रमुख स्वामी महा..

3 दिसंबर - जन्म दिवस-खुदीराम बोस

खुदीराम का जन्म 3 दिसंबर, 1889 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के बहुवैनी नमक गाँव में बाबु त्रैलोक्यनाथ बोस के यहाँ हुआ था | उनकी माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी था | बालक खुदीराम के मन में देश को आजाद कराने की ऐसी लगन लगी कि नौवीं कक्षा के बाद ही पढाई छोड़ दी और स्वदेशी आन्दोलन में कूद पड़े | छात्र जीवन से ही ऐसी लगन मन में लिए इस नौजवान ने हिन्दुस्तान पर अत्याचारी सत्ता चलाने वाले ब्रिटिश साम्राज्य को ध्वस्त करने के संकल्प में अलौकिक धेर्य  का परिचय देते हुए पहला बम फेंका और मात्र 19 वें वर्ष ..

सेवाव्रती ठक्कर बापा / जन्म दिवस – 29 नवम्बर

पूजा का अर्थ एकान्त में बैठकर भजन करना मात्र नहीं है। निर्धन और निर्बल, वन और पर्वतों में रहने वाले अपने भाइयों की सेवा करना भी पूजा ही है। अमृतलाल ठक्कर ने इसे अपने आचरण से सिद्ध कर दिखाया। उनका जन्म 29 नवम्बर, 1869 को भावनगर (सौराष्ट्र, गुजरात) में हुआ था। उनके पिता श्री विट्ठलदास ठक्कर धार्मिक और परोपकारी व्यक्ति थे। यह संस्कार अमृतलाल जी पर भी पड़ा और उन्हें सेवा में आनन्द आने लगा। शिक्षा के बाद उन्हें पोरबन्दर राज्य में अभियन्ता की नौकरी मिली। वे रेल विभाग के साथ तीन साल के अनुबन्ध पर युगांडा ..

विवेकानंद शिला स्मारक के शिल्पी एकनाथ रानाडे / जन्म दिवस – 19 नवम्बर

एकनाथ रानाडे का जन्म 19 नवम्बर, 1914 को ग्राम टिलटिला (जिला अमरावती, महाराष्ट्र) में हुआ था। पढ़ने के लिए वे अपने बड़े भाई के पास नागपुर आ गये। वहीं उनका सम्पर्क डा. हेडगेवार से हुआ। वे बचपन से ही बहुत प्रतिभावान एवं शरारती थे। कई बार शरारतों के कारण उन..

परमवीर चक्र मेजर शैतान सिंह और उनके 114 साथियों का अप्रतिम बलिदान -18 नवंबर 1962

रेज़ांगला युद्ध की अनसुनी वीरगाथा 18 नवम्बर 1962 को चुशूल में मेजर शैतान सिंह और उनके 114 साथियों का अप्रतिम बलिदान इसका साक्षी है। उत्तर में भारत के प्रहरी हिमालय की पर्वत शृंखलाएं सैकड़ों से लेकर हजारों मीटर तक ऊंची हैं। मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व म..

18 नवम्बर / जन्मदिवस – परोपकार की प्रतिमूर्ति स्वामी प्रेमानन्द

नई दिल्ली. भारत में सन्यास की एक विशेष परम्परा है. हिन्दू धर्म में ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और फिर सन्यास को आश्रम व्यवस्था कहा गया है, पर कई लोग पूर्व जन्म के संस्कार या वर्तमान जन्म में अध्यात्म और समाज सेवा के प्रति प्रेम होने के कारण ब्रह्मचर्य स..

विरक्त सन्त श्री दिगम्बर स्वामी / 8 नवम्बर – जन्म दिवस

अनादि काल से भारत भूमि पर हजारों सन्त महात्माओं ने जन्म लेकर अपने उपदेशों से जनता जर्नादन का कल्याण किया है। इन्हीं ऋषि-मुनियों की परम्परा में थे श्री दिगम्बर स्वामी, जिनके सत्संग का लाभ उठाकर हजारों भक्तों ने अपना जीवन सार्थक किया। स्वामी जी का जन्म ग..

नोबेल पुरस्कार विजेता डा. चन्द्रशेखर वेंकटरामन / जन्म दिवस – 7 नवम्बर

बात 1903 की है। मद्रास के प्रेसिडेन्सी कालेज में बी.ए. में पढ़ाते समय प्रोफेसर इलियट ने एक छोटे छात्र को देखा। उन्हें लगा कि यह शायद भूल से यहाँ आ गया है। उन्होंने पूछा, तो उस 14 वर्षीय छात्र चन्द्रशेखर वेंकटरामन ने सगर्व बताया कि वह इसी कक्षा का छात्र ..

हिन्दी में सर्वप्रथम विज्ञान संबंधी लेख एवं पुस्तकें लिखने वाले प्रो. महेश चरण सिन्हा / जन्म दिवस – 6 नवम्बर

हिन्दी में सर्वप्रथम विज्ञान संबंधी लेख एवं पुस्तकें लिखने वाले प्रो. महेश चरण सिन्हा का जन्म छह नवम्बर, 1882 को लखनऊ (उ.प्र.) में हुआ था। लखनऊ के बाद उन्होंने प्रयाग से बी.ए. और कानून की शिक्षा पाई। एक बार जापान के सिन्धी सेठ आसूमल द्वारा जापान में तक..

05 नवम्बर / बलिदान दिवस – युवा सत्याग्रही गुलाब सिंह का बलिदान

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश के एक बड़े भाग को परम्परा से महाकौशल कहा जाता है. इसका सबसे बड़ा एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध नगर जबलपुर है. नर्मदा के तट पर बसा यह नगर जाबालि ऋषि के तप की गाथा कहता है. इसका प्राचीन नाम जाबालिपुरम् था, जो कालान्तर में जबलपुर हो ग..

सम्राट हेमचन्द्र विक्रमादित्य / बलिदान दिवस – 5 नवम्बर, 1556

नि:संदेह हेमू अथवा सम्राट हेमचन्द्र विक्रमादित्य दिल्ली के सिंहासन पर बैठे अंतिम हिन्दू सम्राट थे।  वे एक प्रतिभाशाली शासक, एक सफल सेनानायक, एक चतुर राजनीतिज्ञ तथा दूर-द्रष्टा कूटनीतिज्ञ थे। समस्त पठानों तथा तत्कालीन मुगल शासकों -बाबर तथा हुमायूँ&n..

04 नवम्बर / पुण्य तिथि – हिन्दी समय सारिणी के निर्माता मुकुन्ददास प्रभाकर जी

नई दिल्ली. भारत में रेल का प्रारम्भ अंग्रेजी शासनकाल में हुआ था. अतः उसकी समय सारिणी भी अंग्रेजी में ही प्रकाशित हुई. हिन्दी प्रेमियों ने शासन और रेल विभाग से बहुत आग्रह किया कि यह हिन्दी में भी प्रकाशित होनी चाहिए. पर, उन्हें यह सुनने का अवकाश कहां था...

जन्मदिवस/सशस्त्र क्रांति के पितामह वासुदेव बलवंत फड़के

वासुदेव बलवंत फडके (4 नवम्बर, 1845 – 17 फरवरी, 1883) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी थे जिन्हें आदि क्रांतिकारी कहा जाता है। जिनका केवल नाम लेनेसे युवकोंमें राष्ट्रभक्ति जागृत हो जाती थी, ऐसे थे वासुदेव बलवंत फडके । वे भारतीय स्वतंत्रता ..

गुरु नानक : सनातन संदेश के वाहक - अजय विद्युत

दीपावली के पंद्रह दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस संसार में आये गुरु नानक देव जी ने एक तरह से सनातन धर्म को ही अपने भीतरी अनुभव से एक नए रूप में व्याख्यायित किया। उनका जोर इस बात पर है कि एक छोटी सी चीज भी व्यक्ति  के रूपांतरण का माध्यम बन सकती ..

प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा / बलिदान दिवस – 3 नवम्बर 1947

आज कश्मीर का जो हिस्सा भारत के पास है, उसका श्रेय जिन वीरों को है, उनमें से मेजर सोमनाथ शर्मा का नाम अग्रणी है। 31 जनवरी, 1922 को ग्राम डाढ (जिला धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश) में मेजर जनरल अमरनाथ शर्मा के घर में सोमनाथ का जन्म हुआ। इनके गाँव से कुछ दूरी पर ..

अयोध्या कारसेवकों का बलिदान / 2 नवम्बर, 1990

श्रीराम मन्दिर को बाबर के आदेश से उसके सेनापति मीर बाकी ने 1528 ई. में गिराकर वहाँ एक मस्जिद बना दी। इसके बाद से हिन्दू समाज एक दिन भी चुप नहीं बैठा। वह लगातार इस स्थान को पाने के लिए संघर्ष करता रहा।  23 दिसम्बर, 1949 को हिन्दुओं ने..

02 नवम्बर / जन्मदिवस – दीर्घकालिक योजनाओं के शिल्पी डॉ. अविनाश आचार्य

नई दिल्ली. भारत में सहकार आंदोलन अभी नया ही है, पर इसे ठोस आधार देने वालों में डॉ. अविनाश आचार्य (दादा) का नाम प्रमुख है. उनका जन्म दो नवम्बर, 1933 को जलगांव (महाराष्ट्र) में डॉ. रामचंद्र एवं लीलाबाई आचार्य के घर में हुआ था. शिशु अवस्था में ही वे राष्ट्..

सन्त कंवरराम / बलिदान दिवस – 1 नवम्बर

सन्त कंवरराम का बलिदान सिन्ध की भूमि ने अनेक वीर, भक्त एवं विद्वान् भारत को दिये हैं। उनमें से ही एक थे सन्त कँवरराम जी। 13 अप्रैल, 1885 को बैसाखी के पावन पर्व पर ग्राम जरवार, तहसील मीरपुर माथेलो, जिला सक्खर में उनका जन्म हुआ। इनके पिता श्री ताराचन्द्र..

लौहपुरुष सरदार पटेल / जन्म दिवस – 31 अक्टूबर

15 अगस्त, 1947 को अंग्रेजों ने भारत को स्वाधीन तो कर दिया; पर जाते हुए वे गृहयुद्ध एवं अव्यवस्था के बीज भी बो गये। उन्होंने भारत के 600 से भी अधिक रजवाड़ों को भारत में मिलने या न मिलने की स्वतन्त्रता दे दी। अधिकांश रजवाड़े तो भारत में स्वेच्छा से मिल गय..

भारत की महान पुत्री भगिनी निवेदिता / जन्म दिवस – 28 अक्तूबर

स्वामी विवेकानन्द से प्रभावित होकर आयरलैण्ड की युवती मार्गरेट नोबेल ने अपना जीवन भारत माता की सेवा में लगा दिया। प्लेग, बाढ़, अकाल आदि में उन्होंने समर्पण भाव से जनता की सेवा की। 28 अक्तूबर, 1867 को जन्मी मार्गरेट के पिता सैम्युअल नोबल आयरिश चर्च म..

लोकसंत पांडुरंग शास्त्री आठवले / जन्म दिवस – 19 अक्तूबर

हिन्दू समाज की निर्धन और निर्बल जातियों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दादा के नाम से प्रसिद्ध पांडुरंग शास्त्री आठवले का जन्म 19 अक्तूबर, 1920 को ग्राम रोहा (जिला रायगढ़, महाराष्ट्र) में हुआ था। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा तपो..

मंगल गाडिया और सैयद हुसैन / बलिदान दिवस – 15 अक्तूबर, 1857

1857 के स्वातंत्र्य समर को भले ही अंग्रेज या उनके चाटुकार इतिहासकार कुछ भी नाम दें; पर इसमें संदेह नहीं कि वह सम्पूर्ण देश को आप्लावित करने वाला स्वयंस्फूर्त समर था। मुम्बई में भी उस समय अनेक क्रान्तिकारी हुए, जिनमें से मंगल गाडिया एवं सैयद हुसैन क..

विराट पुरुष नानाजी देशमुख / जन्म दिवस – 11 अक्टूबर

ग्राम कडोली (जिला परभणी, महाराष्ट्र) में 11 अक्तूबर, 1916 (शरद पूर्णिमा) को श्रीमती राजाबाई की गोद में जन्मे चंडिकादास अमृतराव (नानाजी) देशमुख ने भारतीय राजनीति पर अमिट छाप छोड़ी। 1967 में उन्होंने विभिन्न विचार और स्वभाव वाले नेताओं को साथ लाकर उ.प्र...

गृहस्थ प्रचारक भैया जी दाणी / जन्म दिवस – 9 अक्टूबर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की परम्परा में प्रचारक अविवाहित रहकर काम करते हैं; पर कुछ अपवाद भी होते हैं। ऐसे गृहस्थ प्रचारकों की परम्परा के जनक प्रभाकर बलवन्त दाणी का जन्म नौ अक्तूबर, 1907 को उमरेड, नागपुर में हुआ था। आगे चलकर ये भैया जी दाणी के नाम से प्रस..

रानी दुर्गावती / जन्म दिवस – 5 अक्टूबर

महारानी दुर्गावती कालिंजर के राजा कीर्तिसिंह चंदेल की एकमात्र संतान थीं। महोबा के राठ गांव में 1524 ई. की दुर्गाष्टमी पर जन्म के कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया। नाम के अनुरूप ही तेज, साहस और शौर्य के कारण इनकी प्रसिद्धि सब ओर फैल गय..

स्वाभिमानी राजा विजय सिंह / बलिदान दिवस – 3 अक्तूबर

सामान्यतः भारत में स्वाधीनता के संघर्ष को 1857 से प्रारम्भ माना जाता है; पर सत्य यह है कि जब से विदेशी और विधर्मियों के आक्रमण भारत पर होने लगे, तब से ही यह संघर्ष प्रारम्भ हो गया था। भारत के स्वाभिमानी वीरों ने मुगल, तुर्क, हूण, शक, पठान, बलोच और पुर्तगालियों से लेकर अंग्रेजों तक को धूल चटाई है। ऐसे ही एक वीर थे राजा विजय सिंह। उत्तराखंड राज्य में हरिद्वार एक विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यहां पर ही गंगा पहाड़ों का आश्रय छोड़कर मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है। इस जिले में एक गांव है कुंजा बहादुरपुर। ..

संगीतकार सचिनदेव बर्मन / जन्म दिवस – 1 अक्टूबर.

सचिनदेव बर्मन का जन्म वर्ष 1 अक्टूबर, 1906 में त्रिपुरा हुआ। उनके पिता जाने-माने सितारवादक और ध्रुपद गायक थे। बचपन के दिनों से ही सचिनदेव बर्मन का रुझान संगीत की ओर था और वे अपने पिता से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लिया करते थे। इसके साथ ही उन्होंने उस्ताद ..

प्रखर देशभक्त : सूफी अम्बाप्रसाद भटनागर / पुण्य तिथि – 30 सितम्बर

सूफी अम्बाप्रसाद का जन्म 1858 में मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश के एक सम्पन्न भटनागर परिवार में हुआ था। जन्म से ही उनका दाहिना हाथ नहीं था। कोई पूछता, तो वे हंसकर कहते कि 1857 के संघर्ष में एक हाथ कट गया था। मुरादाबाद, बरेली और जालंधर में उन्होंने शिक्षा पायी। पत्रकारिता में रुचि होने के कारण कानून की परीक्षा उत्तीर्ण करने पर भी उन्होंने वकालत के बदले ‘जाम्मुल अमूल’ नामक समाचार पत्र निकाला। उनके विचार पढ़कर नवयुवकों में जागृति की लहर दौड़ने लगी। सूफी जी विद्वान तो थे ही; पर बुद्धिमान भी बहुत ..

वीरांगना मातंगिनी हाजरा / बलिदान दिवस – 29 सितम्बर

भारत के स्वाधीनता आन्दोलन में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी कदम से कदम मिलाकर संघर्ष किया था। मातंगिनी हाजरा एक ऐसी ही बलिदानी माँ थीं, जिन्होंने अपनी अशिक्षा, वृद्धावस्था तथा निर्धनता को इस संघर्ष में आड़े नहीं आने दिया। मातंगिनी का जन्म 1870 में ग्राम होगला, जिला मिदनापुर, पूर्वी बंगाल (वर्तमान बांग्लादेश) में एक अत्यन्त निर्धन परिवार में हुआ था। गरीबी के कारण 12 वर्ष की अवस्था में ही उनका विवाह ग्राम अलीनान के 62वर्षीय विधुर त्रिलोचन हाजरा से कर दिया गया; पर दुर्भाग्य उनके पीछे पड़ा ..

हिन्दू जागरण के सूत्रधार “अशोकजी सिंघल” / जन्म दिवस – 27 सितम्बर

नब्बे के दशक में श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन जब अपने यौवन पर था, उन दिनों जिनकी सिंह गर्जना से रामभक्तों के हृदय हर्षित हो जाते थे, उन श्री अशोक सिंहल को संन्यासी योद्धा भी कह सकते हैं और सन्त सिपाही भी; पर वे स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक प्रचारक ह..

26 सितम्बर / जन्मदिवस – कर्मयोगी पंडित सुन्दरलाल जी

नई दिल्ली. भारत के स्वाधीनता आंदोलन के अनेक पक्ष थे. हिंसा और अहिंसा के साथ कुछ लोग देश तथा विदेश में पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से भी जनजागरण कर रहे थे. अंग्रेज इन सबको अपने लिए खतरनाक मानते थे. 26 सितम्बर, 1886 को खतौली (जिला मुजफ्फरनगर, उ.प्र.) में ..

सामाजिक क्रान्ति के अग्रदूत ईश्वरचंद्र विद्यासागर / जन्म दिवस – 26 सितंबर

भारत में 19वीं शती में जिन लोगों ने सामाजिक परिवर्त्तन में बड़ी भूमिका निभाई, उनमें श्री ईश्वरचन्द्र विद्यासागर का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। उनका जन्म 26 सितम्बर, 1820 को ग्राम वीरसिंह (जिला मेदिनीपुर, बंगाल) में हुआ था। धार्मिक परिवार होने के कारण इन्हें अच्छे संस्कार मिले। नौ वर्ष की अवस्था में ये संस्कृत विद्यालय में प्रविष्ट हुए और अगले 13वर्ष तक वहीं रहे। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी; अतः खर्च निकालने के लिए इन्होंने दूसरों के घरों में भोजन बनाया और बर्तन साफ किये। रात में सड़क पर जलने ..

एकात्म मानववाद के प्रणेता “पंडित दीनदयाल उपाध्याय” / जन्म दिवस – 25 सितम्बर

सुविधाओं में पलकर कोई भी सफलता पा सकता है; पर अभावों के बीच रहकर शिखरों को छूना बहुत कठिन है। 25 सितम्बर, 1916 को जयपुर से अजमेर मार्ग पर स्थित ग्राम धनकिया में अपने नाना पंडित चुन्नीलाल शुक्ल के घर जन्मे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऐसी ही विभूति थे। दीनदयाल जी के पिता श्री भगवती प्रसाद ग्राम नगला चन्द्रभान, जिला मथुरा, उत्तर प्रदेश के निवासी थे। तीन वर्ष की अवस्था में ही उनके पिताजी का तथा आठ वर्ष की अवस्था में माताजी का देहान्त हो गया। अतः दीनदयाल का पालन रेलवे में कार्यरत उनके मामा ने किया। ये सदा ..

भारत की वीर पुत्री भीकाजी कामा (मैडम कामा) / जन्म दिवस – 24 सितंबर 1861

भीकाजी कामा जो मैडम कामा के नाम से विख्यात है, भारतीय स्वतन्त्रता आंदोलन एक ऐसा नाम है, जिन्होंने भारत को परतन्त्रता से मुक्त कराने के साथ-साथ विदेशों में क्रांतिकारी आन्दोलन में भी अहम योगदान दिया. एक पारसी टिप्पणीकार ने उनके बारे में कहा था उनका मन अपने आप में एक बालक की तरह अबोध है परन्तु एक युवा स्त्री के रूप में वे एक स्वतन्त्र विचारों वाली गर्म मिजाज महिला है. मैडम कामा को भारत की वीर पुत्री भी कहा जाता था. मैडम कामा का जन्म 24 सितंबर 1861 में एक रईस पारसी परिवार में हुआ था. उनके पिता सोरावजी ..

पहली बरसी पर ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा जी को याद किया

जालन्धर (विसंकें). लाडोवाली रोड पर स्थित सर्वहितकारी विद्या मंदिर में स्व. ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा जी की पहली बरसी पर हवन यज्ञ एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम सम्पन्न हुआ. इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांतीय अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रमुख कार्यकर्ता एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे. श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए प्रांत संघचालक स. बृजभूषण सिंह बेदी जी ने गगनेजा जी को अपना निकटतम सहयोगी बताया, जिनके जाने से उनको व संगठन को व्यक्तिगत रूप से क्षति पहुंची है. उन्होंने कहा कि गगनेजा जी अपनी ध्येयनिष्ठा ..

देश एवं विदेश में बसे भारतीयों की सेवा को समर्पित “श्री श्रीनिवास शास्त्री” / जन्म दिवस – 22 सितम्बर

अपने विचारों की स्पष्टता के साथ ही दूसरे के दृष्टिकोण को भी ठीक से सुनने, समझने एवं स्वीकार करने की क्षमता होने के कारण श्री वी.एस श्रीनिवास शास्त्री एक समय गांधी जी और लार्ड इरविन में समझौता कराने में सफल हुए। इसके लिए 4 मार्च, 1931 को वायसराय ने पत्र द्वारा उन्हें धन्यवाद दिया – गांधी जी से समझौता कराने में आपने जो भूमिका निभाई है, उसके लिए मैं आपका आभारी हूँ। आपकी भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण थी। वालंगइमान शंकरनारायण श्रीनिवास शास्त्री का जन्म ग्राम वालंगइमान (जिला ..

वकील साहब : लक्ष्मणराव इनामदार / जन्म दिवस – 21 सितम्बर

गुजरात में वकील साहब के नाम से लोकप्रिय श्री लक्ष्मण माधवराव इनामदार का जन्म 21 सितम्बर, 1917 (भाद्रपद शुदी 5, ऋषि पंचमी) को ग्राम खटाव (जिला सतारा, महाराष्ट्र) में हुआ था। इनके पूर्वज श्रीकृष्णराव खटावदार ने शिवाजी के काल में स्वराज की बहुत सेवा की थी, अतः शिवाजी के पौत्र छत्रपति शाहूजी महाराज ने उन्हें इनाम में कुछ भूमि और ‘सरदार’ की उपाधि दी। तबसे यह परिवार ‘इनामदार’ कहलाने लगा। वकील साहब एक बड़े कुटुंब के सदस्य थे। सात ..

एकात्मता के पुजारी : नारायण गुरु / पुण्य तिथि – 20 सितम्बर

हिन्दू धर्म विश्व का सर्वश्रेष्ठ धर्म है; पर छुआछूत और ऊंचनीच जैसी कुरीतियों के कारण हमें नीचा भी देखना पड़ता है। इसका सबसे अधिक प्रकोप किसी समय केरल में था। इससे संघर्ष कर एकात्मता का संचार करने वाले श्री नारायण गुरु का जन्म 1856 ई. में तिरुअनंतपुरम् के पास चेम्बा जनती कस्बे में ऐजवा जाति के श्री मदन एवं श्रीमती कुट्टी के घर में हुआ था। नारायण के पिता अध्यापक एवं वैद्य थे; पर प्राथमिक शिक्षा के बाद कोई व्यवस्था न होने से वे अपने साथियों के साथ गाय चराने जाने लगे। वे इस दौरान ..

महाराजा शंकर शाह और राजकुमार रघुनाथ शाह / बलिदान दिवस – 18 सितम्बर

कविता सुनाकर मृत्यु को गले लगाया 1857 ई0 में जबलपुर में तैनात अंग्रेजों की 52वीं रेजिमेण्ट का कमाण्डर क्लार्क बहुत क्रूर था। वह छोटे राजाओं, जमीदारों एवं जनता को बहुत परेशान करता था। यह देखकर गोण्डवाना (वर्तमान जबलपुर) के राजा शंकरशाह ने उसके अत्याचारों का विरोध करने का निर्णय लिया। राजा एवं राजकुमार दोनों अच्छे कवि थे। उन्होंने कविताओं द्वारा विद्रोह की आग पूरे राज्य में सुलगा दी। राजा ने एक भ्रष्ट कर्मचारी गिरधारीलाल दास को निष्कासित कर दिया था। वह क्लार्क को अंग्रेजी में इन ..

आज है विश्वकर्मा जयंती

विश्वकर्मा जयंती सनातन परंपरा में पूरी धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। इस दिन औद्योगिक क्षेत्रों, फैक्ट्रियों, लोहे, मशीनों तथा औज़ारों से सम्बंधित कार्य करने वाले, वाहन शोरूम आदि में भगवान विश्वकर्मा की पूजा होती है। इस अवसर पर मशीनों और औज़ारों की साफ-सफाई आदि की जाती है और उन पर रंग किया जाता है। विश्वकर्मा जयन्ती के अवसर पर ज़्यादातर कल-कारखाने बंद रहते हैं और लोग हर्षोल्लास के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते है। विश्वकर्मा भगवान धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवताओं के शिल्पी के रूप में ..

16 सितम्बर/जन्म-दिवस: बबुआ जी

बिहार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बहुविध गतिविधियों के पर्याय बने श्री कृष्णवल्लभ प्रसाद नारायण सिंह (बबुआ जी) का जन्म 16 सितम्बर, 1914 को नालन्दा जिले के रामी बिगहा ग्राम में रायबहादुर ऐदल सिंह के घर में हुआ था। बाल्यकाल में परिवार के..

लांस नायक करम सिंह ( परम वीर चक्र ) / जन्म दिवस – 15 सितम्बर

लांस नायक करम सिंह ( 15 सितम्बर 1915 – 20 जनवरी 1993 ) पंजाब के बरनाला में जन्में एक सिख थे. 1947 में हुए भारत – पाकिस्तान युद्ध में अभूतपूर्व वीरता के लिए जिन्हें भारत के सेना के वीरों को प्रदान किये जाने वाले सर्वोच्च सम्मान ” परम वी..

सुदर्शन जी – हिन्दू गौरव के स्वप्नद्रष्टा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक श्री कुप्पहल्ली सीतारामय्या सुदर्शन हिन्दुत्व की एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जो सर्वसमावेशी और सशक्त भारत में विश्वास करती है। वह हिन्दू गौरव की पुन: स्थापना के आत्मविश्वासी उद्घोषक थे। योगी श्री अरविन्द के इन व..

13 सितम्बर / बलिदान दिवस – अनशनव्रती यतीन्द्रनाथ दास

नई दिल्ली.  यतीन्द्रनाथ दास का जन्म 27 अक्तूबर, 1904 को कोलकाता में हुआ था. 16 वर्ष की अवस्था में ही वे असहयोग आंदोलन में दो बार जेल गये थे. इसके बाद वे क्रांतिकारी दल में शामिल हो गये. शचीन्द्रनाथ सान्याल से उन्होंने बम बनाना सीखा. वर्ष 1928 में व..

12 सितम्बर / पुण्य तिथि – तमिल काव्य में राष्ट्रवादी स्वर : सुब्रह्मण्य भारती

नई दिल्ली. भारतीय स्वातंत्र्य संग्राम से देश का हर क्षेत्र और हर वर्ग अनुप्राणित था. ऐसे में कवि भला कैसे पीछे रह सकते थे. तमिलनाडु में इसका नेतृत्व कर रहे थे सुब्रह्मण्य भारती. यद्यपि उन्हें अनेक संकटों का सामना करना पड़ा, पर उनका स्वर मन्द नहीं हुआ.&n..

विनोबा भावे / जन्म दिवस -11 सितम्बर, 1895

स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद निर्धन भूमिहीनों को भूमि दिलाने के लिए हुए‘भूदान यज्ञ’ के प्रणेता विनायक नरहरि (विनोबा) भावे का जन्म 11सितम्बर, 1895 को महाराष्ट्र के कोलाबा जिले के गागोदा ग्राम में हुआ था। इनके पिता श्री नरहरि पन्त तथा माता श्रीमत..

आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह भारतेन्दु हरिश्चन्द्र / जन्म दिवस – 9 सितम्बर

हिन्दी साहित्य के माध्यम से नवजागरण का शंखनाद करने वाले भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जन्म काशी में 9 सितम्बर, 1850 को हुआ था। इनके पिता श्री गोपालचन्द्र अग्रवाल ब्रजभाषा के अच्छे कवि थे और‘गिरिधर दास’ उपनाम से भक्ति रचनाएँ लिखते थे। घर के काव्यम..

राष्ट्रऋषि राजनारायण बसु / जन्म दिवस – 7 सितम्बर, 1826

बंगाल की अनेक विभूतियों ने भारत देश और हिन्दू धर्म को सार्थक दिशा दी है। 7 सितम्बर, 1826 को बोड़ाल ग्राम में जन्मे राष्ट्रऋषि राजनारायण बसु भी उनमें से एक थे। इनके पूर्वज बल्लाल सेन के युग में गोविन्दपुर में बसे थे। कुछ समय बाद अंग्रेजों ..

प्रख्यात दर्शनशास्त्री, आदर्श शिक्षक डा. राधाकृष्णन / जन्म दिवस – 5 सितम्बर

प्रख्यात दर्शनशास्त्री, अध्यापक एवं राजनेता डा. राधाकृष्णन का जन्म पाँच सितम्बर 1888 को ग्राम प्रागानाडु (जिला चित्तूर, तमिलनाडु) में हुआ था। इनके पिता वीरस्वामी एक आदर्श शिक्षक तथा पुरोहित थे। अतः इनके मन में बचपन से ही हिन्दू धर्म एवं दर्शन ..

4 सितम्बर/जन्म-दिवसईसाई षड्यन्त्रों के अध्येता कृष्णराव सप्रे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की योजना से कई प्रचारक शाखा कार्य के अतिरिक्त समाज जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी काम करते हैं। ऐसा ही एक क्षेत्र वनवासियों का भी है। ईसाई मिशनरियां उन्हें आदिवासी कहकर शेष हिन्दू समाज से अलग कर देती हैं। उनके षड्यन्त्रों से कई क्..

अनाथ बन्धु एवं मृगेन्द्र दत्त / बलिदान दिवस – 2 सितम्बर, 1933

अंग्रेजों के जाने के बाद भारत की स्वतन्त्रता का श्रेय भले ही कांग्रेसी नेता स्वयं लेते हों; पर वस्तुतः इसका श्रेय उन क्रान्तिकारी युवकों को है, जो अपनी जान हथेली पर लेकर घूमते रहते थे। बंगाल ऐसे युवकों का गढ़ था। ऐसे ही दो मित्र थे अनाथ बन्धु ..