जयंती/पुण्यतिथि

देश के औद्योगिक विकास के प्रणेता जमशेदजी टाटा / पूण्य तिथि -19 मई

जमशेदजी टाटा भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति तथा औद्योगिक घराने टाटा समूह के संस्थापक थे। भारतीय औद्योगिक क्षेत्र में जमशेदजी ने जो योगदान दिया  वह अति असाधारण और बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। जब सिर्फ यूरोपीय, विशेष तौर पर अंग्रेज़, ही उद्योग स्थापित करने म..

बालकृष्ण चाफेकर / बलिदान दिन – 12 मई, 1899

देश की स्वाधीनता के लिए जिसने भी त्याग और बलिदान दिया, वह धन्य है; पर जिस घर के सब सदस्य फांसी चढ़ गये, वह परिवार सदा के लिए पूज्य है। चाफेकर  बंधुओं का परिवार ऐसा ही था। 1897 में पुणे में भयंकर प्लेग फैल गया। इस बीमारी को नष्ट करने के बहाने ..

अमर बलिदानी अवधबिहारी / बलिदान दिवस – 11 मई, 1915

मातृभूमि की सेवा के लिए व्यक्ति की शिक्षा, आर्थिक स्थिति या अवस्था कोई अर्थ नहीं रखती। दिल्लीवासी क्रांतिवीर अवधबिहारी ने केवल 25 वर्ष की अल्पायु में ही अपना शीश मां भारती के चरणों में समर्पित कर दिया। अवधबिहारी का जन्म चांदनी चैक, दिल्ली के मोहल्ले कच..

हिन्दी साहित्य के गौरवशाली नक्षत्र महावीर प्रसाद द्विवेदी / जन्म दिवस – 9 मई

हिन्दी साहित्य के गौरवशाली नक्षत्र महावीर प्रसाद द्विवेदी को अपने अनूठे लेखन शिल्प के कारण हिन्दी का प्रथम लोकमान्य आचार्य माना जाता है। इनका जन्म ग्राम दौलतपुर (रायबरेली, उ.प्र.) में 9 मई, 1864 को पंडित रामसहाय दुबे के घर में हुआ था। इनकी प्रारम्भिक शि..

चाफेकर बंधुओ में सबसे छोटे वासुदेव चाफेकर मातृभूमि की बलिवेदी पर चढ़ गये / 8 मई, 1899

देश की स्वाधीनता के लिए जिसने भी त्याग और बलिदान दिया, वह धन्य है; पर जिस घर के सब सदस्य फांसी चढ़ गये, वह परिवार सदा के लिए पूज्य है। चाफेकर  बंधुओं का परिवार ऐसा ही था। 1897 में पुणे में भयंकर प्लेग फैल गया। इस बीमारी को नष्ट करने के बहाने ..

अल्लूरि सीताराम राजू / बलिदान दिवस – 7 मई

अल्लूरि सीताराम राजू आन्ध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले के मोगल्लु ग्राम में 4 जुलाई, 1897 को जन्मे थे। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा राजमुंन्दरी व राजचन्द्रपुरम् में हुई। छात्र जीवन में ही उनका सम्पर्क निकट के वनवासियों से होने लगा था। उनका मन पढ़ाई में विश..

नेपाल में हिन्दू धर्म ध्वजवाहक पं. पोखरेल / पूण्य तिथि – 6 मई

नेपाल में भी भारत की तरह धार्मिक कथा कहने और सुनने की व्यापक परम्परा है। 1958 में जन्मे पंडित नारायण प्रसाद पोखरेल वहां ‘वाचन शिरोमणि’ के नाते विख्यात थे। उनका कथा कहने और उसकी व्याख्या करने का ढंग निराला था। वे कथा में स्थानीय लोकजीवन के सं..

संघ के पहले और एकमात्र सरसेनापति श्री मार्तंडराव जोग / पूण्य तिथि – 4 मई

सरसेनापति मार्तण्डराव जोग  नागपुर के डोके मठ में 9-10 नवम्बर, 1929 को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में डा. हेडगेवार को आद्य सरसंघचालक, श्री बालासाहब हुद्दार को सरकार्यवाह तथा श्री मार्तंडराव जोग को सरसेनापति घोषित किया गया था। 1899 में एक उद्योगपति..

वीर हरिसिंह नलवा / बलिदान दिवस – 30 अप्रैल

भारत पर विदेशी आक्रमणकारियों की मार सर्वप्रथम सिन्ध और पंजाब को ही झेलनी पड़ी। 1802 में रणजीत सिंह विधिवत महाराजा बन गये। 40 साल के शासन में उन्हें लगातार अफगानों और पठानों से जूझना पड़ा। इसमें मुख्य भूमिका उनके सेनापति हरिसिंह नलवा की रही। 1802 में उन्..

अद्वित्य चित्रकार राजा रवि वर्मा / जन्म दिवस-29 अप्रैल

आज तो चित्रकला की तकनीक बहुत विकसित हो गयी है। अब पेन्सिल, रबड़, रंग या कूची की आवश्यकता ही समाप्त हो गयी लगती है। संगणक (कम्प्यूटर) द्वारा यह सब काम आज आसानी से हो जाते हैं। एक साथ छह रंगों की छपाई भी अब सम्भव है। पर कुछ समय पूर्व तक ऐसा नहीं होत..

क्रांतिवीर जोधासिंह अटैया / बलिदान दिवस – 28 अप्रैल

भारत की स्वतन्त्रता का पावन उद्देश्य और अदम्य उत्साह 1857 की महान क्रान्ति का प्रमुख कारण ही नहीं, आत्माहुति का प्रथम आह्नान भी था। देश के हर क्षेत्र से हर वर्ग और आयु के वीरों और वीरांगनाओं ने इस आह्वान को स्वीकार किया और अपने रक्त से भारत माँ का ..

“वीर कुंवर सिंह” 1857 के महासमर के वयोवृद्ध योद्धा / पूण्य तिथि – 26 अप्रैल

भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के हीरो रहे जगदीशपुर के बाबू वीर कुंवर सिंह को एक  बेजोड़ व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है जो 80 वर्ष की उम्र में भी लड़ने तथा विजय हासिल करने का माद्दा रखते थे. अपने ढलते उम्र और बिगड़ते सेहत के बावजूद भी उन्होंन..

अ.भा.वि.प .(ABVP) की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण आधार “यशवंत वासुदेव केलकर” / जन्म दिवस – 25 अप्रैल

‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ की कार्यप्रणाली को जिन्होंने महत्वपूर्ण आधार दिया, वे थे श्री यशवंत वासुदेव केलकर। उनका जन्म 25 अप्रैल, 1925 को पंढरपुर (महाराष्ट्र) में हुआ था। उनके पिता शिक्षा विभाग में नौकरी करते थे। वे रूढि़वादी ..

क्रान्ति और सेवा के राही योगेश चन्द्र चटर्जी / पुण्य तिथि – 22 अप्रैल

क्रान्तिवीर योगेश चन्द्र चटर्जी का जीवन देश को विदेशी दासता से मुक्त कराने की गौरवमय गाथा है। उनका जन्म अखंड भारत के ढाका जिले के ग्राम गोकाडिया, थाना लोहागंज में तथा लालन-पालन और शिक्षा कोमिल्ला में हुई। 1905 में बंग-भंग से जो आन्दोलन शुरू हुआ, योगेश द..

स्वतंत्रता सेनानी गणपतराय / बलिदान-दिवस – 21 अप्रैल

गणपतराय का जन्म 17 जनवरी 1808 को ग्राम भौरो (जिला लोहरदगा, झारखंड) में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। इनके पिता श्री किसनराय तथा माता श्रीमती सुमित्रादेवी थीं। बचपन से ही वनों में घूमना, घुड़सवारी, आखेट आदि उनकी रुचि के विषय थे। इस कारण उनके मित्र उन्हें..

आधुनिक मीरा जुथिका राॅय / जन्म दिवस – 20 अप्रैल

जुथिका राय को मीरा बाई के बाद आधुनिक मीरा के नाम से जाना जाता है . जो लोग कला जगत में बहुत ऊंचाई पर पहुंच जाते हैं, उनमें से अधिकांश को आचार-व्यवहार की अनेक दुर्बलताएं घेर लेती हैं; पर भजन गायन की दुनिया में अपार प्रसिद्धि प्राप्त जुथिका राॅय ..

युवा बलिदानी अनन्त कान्हेरे / बलिदान दिवस – 19 अप्रैल

भारत माँ की कोख कभी सपूतों से खाली नहीं रही। ऐसा ही एक सपूत थे अनन्त लक्ष्मण कान्हेरे, जिन्होंने देश की स्वतन्त्रता के लिए केवल 19 साल की युवावस्था में ही फाँसी के फन्दे को चूम लिया। महाराष्ट्र के नासिक नगर में उन दिनों जैक्सन नामक अंग्रेज जिलाधीश कार्..

अमर बलिदानी तात्या टोपे / बलिदान दिवस – 18 अप्रैल

छत्रपति शिवाजी के उत्तराधिकारी पेशवाओं ने उनकी विरासत को बड़ी सावधानी से सँभाला। अंग्रेजों ने उनका प्रभुत्व समाप्त कर पेशवा बाजीराव द्वितीय को आठ लाख वार्षिक पेंशन देकर कानपुर के पास बिठूर में नजरबन्द कर दिया। इनके दरबारी धर्माध्यक्ष रघुनाथ पाण्डुरंग भी..

आदर्श शिक्षक डा. राधाकृष्णन / पुण्य तिथि 17 अप्रैल

प्रख्यात दर्शनशास्त्री, अध्यापक एवं राजनेता डा. राधाकृष्णन का जन्म पाँच सितम्बर 1888 को ग्राम प्रागानाडु (जिला चित्तूर, तमिलनाडु) में हुआ था। इनके पिता वीरस्वामी एक आदर्श शिक्षक तथा पुरोहित थे। अतः इनके मन में बचपन से ही हिन्दू धर्म एवं दर्शन ..

प्रकृति के अनुपम चितेरे नन्दलाल बोस / पुण्य तिथि – 16 अप्रैल

रवीन्द्रनाथ टैगोर और महात्मा गान्धी घनिष्ठ मित्र थे; पर एक बार दोनों में बहस हो गयी। कुछ लोग टैगोर के पक्ष में थे, तो कुछ गान्धी के। वहाँ एक युवा चित्रकार चुप बैठा था। पूछने पर उसने कहा कि चित्रकार को तो सभी रंग पसन्द होते हैं। इस कारण मेरे लिए दोनों मे..

सिख धर्म के संस्थापक गुरु गुरुनानक देव / जन्म दिवस – 15 अप्रैल, 1469 ( तिथिनुसार वैशाख सुदी 3, संवत्‌ 1526 विक्रमी)

सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु गुरुनानक देव का जन्म  रावी नदी के किनारे तलवंडी नामक गाँव में 15 अप्रैल, 1469 में कार्तिक पूर्णिमा, संवत् 1 5 2 7 को हुआ था।  गुरु नानक जी अपने व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी,..

भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर / जन्म दिवस – 14 अप्रैल

भारतीय संविधान के निर्माता डा. भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को महू (म.प्र.) में हुआ था। उनके पिता श्री रामजी सकपाल तथा माता भीमाबाई धर्मप्रेमी दम्पति थे। उनका जन्म महार जाति में हुआ था, जो उस समय अस्पृश्य मानी जाती थी। इस कारण भ..

अंग्रेजो के अत्याचारों की पराकाष्ठा “जलियांवाला बाग कांड” / 13 अप्रैल – इतिहास-स्मृति

भारतीय स्वतन्त्रता के लिए हुए संघर्ष के गौरवशाली इतिहास में अमृतसर के जलियाँवाला बाग का अप्रतिम स्थान है। इस आधुनिक तीर्थ पर हर देशवासी का मस्तक उन वीरों की याद में स्वयं ही झुक जाता है, जिन्होंने अपने रक्त से भारत की स्वतन्त्रता के पेड़ को सींचा। 13&n..

महान सेनानी राणा सांगा / जन्म दिवस -12 अप्रैल

राणा सांगा का पूरा नाम महाराणा संग्रामसिंह था.  उनका जन्म  12 अप्रैल, 1484  को मालवा, राजस्थान मे हुआ था. राणा सांगा सिसोदिया (सूर्यवंशी राजपूत) राजवंशी थे. राणा सांगा ने विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध सभी राजपूतों को एकजुट किया। राणा सांगा अपनी वीरता और उदारता के लिये प्रसिद्ध हुये। एक विश्वासघाती के कारण वह बाबर से युद्ध हारे लेकिन उन्होंने अपने शौर्य से दूसरों को प्रेरित किया। राणा रायमल के बाद सन 1509 में राणा सांगा मेवाड़ के उत्तराधिकारी बने। इन्होंने ..

समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले / जन्म दिवस – 11 अप्रैल

महात्मा ज्योतिबा फुले इनका जन्म 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र के सतारा ज़िले में हुआ था | उनका असली  नाम ज्योतिराव गोविंदराव फुले था | वह 19वी सदी  की एक बड़े समाज सुधारक, सक्रिय प्रतिभागी तथा विचारक थे |  ज्‍योतिबा फुले भारतीय समाज में प्रचलित जाति आधारित विभाजन और भेदभाव के खिलाफ थे। उन्‍होंने विधवाओं और महिलाओं के कल्याण के लिए काफी काम किया। उन्होंने इसके साथ ही किसानों की हालत सुधारने और उनके कल्याण के लिए भी काफी प्रयास किये। स्त्रियों की दशा सुधारने ..

घुमक्कड़ साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन / जन्म दिवस – 9 अप्रैल

महापंडित राहुल सांकृत्यायन का जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के ग्राम पन्दहा में नौ अप्रैल, 1893 को हुआ था। बचपन में इनका नाम केदार पांडेय था। माता कुलवन्ती देवी तथा पिता श्री गोवर्धन पांडेय की असमय मृत्यु के कारण इनका पालन ननिहाल में हुआ। 15 वर्ष की अवस्था में आजमगढ़ से उर्दू में मिडिल परीक्षा उत्तीर्ण कर वे काशी आ गये। वहाँ उन्होंने संस्कृत और दर्शनशास्त्र का तथा फिर अयोध्या में वेदान्त का गहन अध्ययन किया। उन्होंने आगरा में अरबी तथा लाहौर में फारसी की पढ़ाई भी की। राहुल जी घुमक्कड़ स्वभाव के ..

महावीर जयंती

भोपाल (विसंकें) l महावीर स्वामी के जन्म दिन चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को महावीर जयन्ती का पर्व मनाया जाता है । भगवान महावीर स्वामी, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकार थे l उनका पूरा जीवन एक सन्देश था l  उनके द्वारा दिए गए सत्य, अहिंसा, के उपदेश सभी के अत्यंत महत्वपूर्ण हैं l महावीर जी ने एक राजपरिवार में जन्म लिया था । उनके परिवार में ऐश्वर्य, धन-संपदा की कोई कमी नहीं थी, किंतु युवावस्था में क़दम रखते ही उन्होंने संसार की मोह-माया, सुख-ऐश्वर्य और राज्य को छोड़ दिया l सारी सुविधाओं का त्याग कर वे नंगे पैर ..

8 अप्रैल/ बलिदान दिवस –क्रांतिवीर मंगल पांडे

देश को अंग्रेजों की परतंत्रता से मुक्त करवाने के लिये 1857 में ज्वाला को धधकाने वाले क्रांतिवीर थे……..मंगल पांडे. अंग्रेजी शासन के विरुद्ध चले लम्बे संग्राम का बिगुल बजाने वाले पहले क्रान्तिवीर मंगल पांडे का जन्म 30 जनवरी, 1831 को ग्र..

श्री राम नवमी की शुभकामनाएं

भोपाल (विसंकें) 5 अप्रैल l विश्व संवाद केंद्र "भोपाल" की ओर से सभी को श्री राम नवमी की बहुत बहुत शुभकामनाएं l श्री राम का जन्म अगस्त्यसंहिता के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी, के दिन पुनर्वसु नक्षत्र, कर्कलग्‍न में जब सूर्य अन्यान्य पाँच ग्र..

05 अप्रैल / जन्मदिवस – अधीश कुमार जी, एक असाधारण व्यक्तित्व

अधीश कुमार जी का जन्म आगरा के एक संघ सहयोगी परिवार में 17 अगस्त, 1955 को हुआ था l अधीश जी के पिताजी जगदीश नारायण भटनागर एक विद्यालय में प्रधानाचार्य रहे l परिवार में पिताजी, माताजी श्रीमती उषादेवी, भाई सर्वश्री अवनीश, आशुतोष, आशीष, बहन श्रीमती पूनम हैं. अ..

मानव रत्न हरमोहन लाल जी / पुण्य तिथि – 5 अप्रैल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विद्या भारती, विश्व हिन्दू परिषद के काम में सक्रिय रहने वाले श्री हरमोहन लाल जी का हीरे, जवाहरात और रत्नों का पुश्तैनी कारोबार था । भारत में आगरा, जयपुर, मुंबई आदि के साथ ही अमरीका और अफ्रीका में भी उनकी दुकानें थीं । पत्थरों को परखते हुए वे लोगों को परखना भी जान गये और अनेक मानव रत्नों को संगठन में जोड़ा । श्री हरमोहन लाल जी के पूर्वज वर्तमान पाकिस्तान में मुल्तान नगर के निवासी थे । इनमें से एक श्री गुरदयाल सिंह शिमला में बस गये । इसके बाद उनके कुछ वंशज जयपुर आ गये । वहां ..

श्री माखनलाल चतुर्वेदी / जन्म दिवस – 4 अप्रैल

श्री माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल, 1889 को ग्राम बाबई, जिला होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में श्री नन्दलाल एवं श्रीमती सुन्दराबाई के घर में हुआ था। उन पर अपनी माँ और घर के वैष्णव वातावरण का बहुत असर था। वे बहुत बुद्धिमान भी थे। एक बार सुनने पर ही को..

03 अप्रैल/पुण्यतिथि -छत्रपति शिवाजी महाराज

भोपाल(विसंकें) l छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर वंदन एवं श्रद्धांजलि ! मातृभूमि के लिए आपका संघर्ष एवं देशभक्ति की भावना हमें सदैव प्रेरित करती रहेगी । 3 अप्रैल 1680 इतिहासकारों के अनुसार यही वह दिन है जब छत्रपति शिवाजी महाराज ने संसार से विदा ल..

03 अप्रैल / जन्म दिवस – वीरता की मिसाल फील्ड मार्शल मानेकशा

भोपाल (विसंकें) l 20वीं शती के प्रख्यात सेनापति फील्ड मार्शल सैम होरमुसजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशा का जन्म 3 अप्रैल 1914 को एक पारसी परिवार में अमृतसर में हुआ था. उनके पिता जी वहां चिकित्सक थे. पारसी परम्परा में अपने नाम के बाद पिता, दादा और परदादा का ना..

भारतीय क्रिकेट के नायक रणजी / पुण्य तिथि – 2 अप्रैल

आजकल भारत के हर गली-मुहल्ले में बच्चे क्रिकेट खेलते मिल जाते हैं। यहाँ तक कि क्रिकेट एक बीमारी बन गया है। लोग अपने सारे काम छोड़कर कान से रेडियो लगाये या दूरदर्शन के सामने बैठकर इसी की चर्चा करते रहते हैं। पैसे की अधिकता के कारण इसमें भ्रष्टाचार और राजनीति भी होने लगी है; पर 50-60 साल पहले ऐसा नहीं था। भारत में इसे लोकप्रिय करने का जिन्हें श्रेय है, वे थे भारत के गुजरात राज्य की एक छोटी सी रियासत नवानगर के राजकुमार रणजीत सिंह। वे एक महान् खिलाड़ी एवं देशभक्त थे। उनका जन्म 1872 में हुआ था। उनका ..

31 मार्च / पुण्य तिथि – संघनिष्ठ नानासाहब भागवत

नई दिल्ली. श्री नारायण पांडुरंग (नानासाहब) भागवत मूलतः महाराष्ट्र में चंद्रपुर जिले के वीरमाल गांव के निवासी थे. वहां पर ही उनका जन्म 1884 में हुआ था. घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वे अपने मामा जी के घर नागपुर काटोल पढ़ने आ गये. आगे चलकर उन्ह..

सागरपार भारतीय क्रान्ति के दूत श्यामजी कृष्ण वर्मा / पुण्य तिथि – 30 मार्च

भारत के स्वाधीनता संग्राम में जिन महापुरुषों ने विदेश में रहकर क्रान्ति की मशाल जलाये रखी, उनमें श्यामजी कृष्ण वर्मा का नाम अग्रणी है। चार अक्तूबर, 1857 को कच्छ (गुजरात) के मांडवी नगर में जन्मे श्यामजी पढ़ने में बहुत तेज थे। इनके पिता श्रीकृष्ण वर्मा क..

30 मार्च / जन्मदिवस – देशसेवा की कीमत वसूलने को पाप मानते थे अप्पा जी जोशी

एक बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने कार्यकर्ता बैठक में कहा कि क्या केवल संघकार्य किसी के जीवन का ध्येय नहीं बन सकता ? यह सुनकर हरिकृष्ण जोशी जी ने उन 56 संस्थाओं से त्यागपत्र दे दिया, जिनसे वे सम्बद्ध थे. यही बाद में ‘अप्पा..

चैत्र प्रतिपदा -जन्मदिवस/प.पू. डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार

  भोपाल (विसंकें) l डॉ केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म युगाब्द 4991 (1889 ई.) की चैत्र प्रतिपदा के दिन नागपुर के वेदपाठी परिवार में हुआ था l जन्म के समय किसी भी प्रकार की अनुकूलता उन्हें प्राप्त नहीं थी l पुरोहिताई कर आजीविका चलाने वाला उनका परिवार नाग..

सेवा और समर्पण के साधक गुरु अंगद देव / पुण्य तिथि – 28 मार्च

सिख पन्थ के दूसरे गुरु अंगददेव का असली नाम ‘लहणा’ था। उनकी वाणी में जीवों पर दया, अहंकार का त्याग, मनुष्य मात्र से प्रेम, रोटी की चिन्ता छोड़कर परमात्मा की सुध लेने की बात कही गयी है। वे उन सब परीक्षाओं में सफल रहे, जिनमें गुरु नानक के ..

क्रांतिकारी पत्रकार गणेशशंकर ‘विद्यार्थी’ / बलिदान दिवस – 25 मार्च

क्रांतिकारी पत्रकार श्री गणेशशंकर ‘विद्यार्थी’ का जन्म 1890 ई0 (आश्विन शुक्ल 14, रविवार, संवत 1947) को प्रयाग के अतरसुइया मौहल्ले में अपने नाना श्री सूरजप्रसाद श्रीवास्तव के घर में हुआ था। इनके नाना सहायक जेलर थे। इनके पुरखे हथगांव (जिला फते..

पांचाल क्षेत्र में क्रान्ति के संचालक नवाब खान / बलिदान दिवस – 24 मार्च

उत्तर प्रदेश में बरेली और उसका निकटवर्ती क्षेत्र पांचाल क्षेत्र कहलाता है। जन मान्यता यह है कि महाभारत काल में द्रौपदी (पांचाली) का स्वयंवर इसी क्षेत्र में हुआ था। आगे चलकर विदेशी मुस्लिम रुहेलों ने इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया, इससे यह क्षेत्र रुहेलखण्..

वीर भगत सिंह, शिवराम हरि राजगुरु, सुखदेव थापर / शहीद दिवस – 23 मार्च

भगत सिंह, शिवराम हरि राजगुरु, सुखदेव थापर  भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने  देश की आज़ादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया, वह आज के युवकों के लिए एक बहुत बड़ा आदर्श है। इन्हो..

गीता प्रेस, गोरखपुर के संस्थापक भाई हनुमान प्रसाद पोद्दार / पुण्य तिथि – 22 मार्च

भारत ही नहीं, तो विश्व भर में हिन्दू धर्मग्रन्थों को शुद्ध पाठ एवं छपाई में बहुत कम मूल्य पर पहुँचाने का श्रेय जिस विभूति को है, उन श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाई जी) का जन्म शिलांग में 17 सितम्बर, 1892 को हुआ था। उनके पिता श्री भीमराज तथा माता श्रीमती..

विश्वविख्यात खगोलशास्त्री आर्यभट / जन्म दिवस – 21 मार्च

खगोलशास्त्र का अर्थ है ग्रह, नक्षत्रों की स्थिति एवं गति के आधार पर पँचांग का निर्माण, जिससे शुभ कार्यों के लिए उचित मुहूर्त निकाला जा सके। इस क्षेत्र में भारत का लोहा दुनिया को मनवाने वाले वैज्ञानिक आर्यभट के समय में अंग्रेजी तिथियाँ प्रचलित नहीं थीं। ..

क्रांतिवीर चारुचंद्र बोस / पुण्य तिथि – 19 मार्च

बंगाल के क्रांतिकारियों की निगाह में अलीपुर का सरकारी वकील आशुतोष विश्वास बहुत समय से खटक रहा था। देशभक्तों को पकड़वाने, उन पर झूठे मुकदमे लादने तथा फिर उन्हें कड़ी सजा दिलवाने में वह अपनी कानूनी बुद्धि का पूरा उपयोग कर रहा था। ब्रिटिश शासन के लिए ..

आजाद हिन्द फौज के सेनानी लेफ्टिनेंट ज्ञानसिंह बिष्ट / बलिदान दिवस – 17 मार्च, 1945

द्वितीय विश्व युद्ध में अंग्रेजों एवं मित्र देशों की सामरिक शक्ति अधिक होने पर भी आजाद हिन्द फौज के सेनानी उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे थे। लेफ्टिनेंट ज्ञानसिंह बिष्ट भी ऐसे ही एक सेनानायक थे, जिन्होंने अपने से छह गुना बड़ी अंग्रेज टुकड़ी को भागने पर मजबूर ..

क्रांतिकारी गणेश दामोदर सावरकर (बाबा सावरकर) / पूण्य तिथि -16 मार्च

प्रसिद्द क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर के बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर (बाबा सावरकर) का जन्म 1879 ई. में महाराष्ट्र राज्य के नासिक नगर के निकट भागपुर नामक स्थान में हुआ था। नासिक में ही उनकी शिक्षा हुई। आरं..

15 Marchकुश्ती को समर्पित पद्मश्री गुरु हनुमान – जन्म तिथि / 15 मार्च

भारत में कुश्ती गांव-गांव में प्रचलित है। हर गांव में सुबह और शाम नवयुवक अखाड़े में व्यायाम करते मिल जाते हैं; पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की इसमें कोई पहचान नहीं थी। इस पहचान को दिलाने का श्रेय गुरु हनुमान को है। उनका असली नाम विजय पाल था; पर आगे चलकर यह नाम लुप्त हो गया। उनका जन्म राजस्थान के चिड़ावा गांव में 15 मार्च, 1901 को एक निर्धन परिवार में हुआ था। निर्धनता और परिवार में शिक्षा के प्रति जागरूकता के अभाव में उनकी विद्यालयीन शिक्षा बिल्कुल नहीं हुई; पर गांव के अखाड़े में कुश्ती के लिए ..

15 मार्च / जन्मदिवस – संगठन को समर्पित व्यक्तित्व सुनील उपाध्याय जी

 नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारों से प्रेरित संगठनों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् का विशेष स्थान है. अन्य संगठनों में जहां सभी आयु वर्ग के लोग होते हैं, वहां विद्यार्थी परिषद् शुद्ध युवाओं का संगठन है. परिषद के काम को हिमाचल प्रदेश ..

अमर बलिदानी छत्रपति सम्भाजी / बलिदान दिवस – 11 मार्च

भारत में हिन्दू धर्म की रक्षार्थ अनेक वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। छत्रपति शिवाजी के बड़े पुत्र सम्भाजी भी इस मणिमाला के एक गौरवपूर्ण मोती हैं। उनका जन्म 14 मई, 1657 को मां सोयराबाई की कोख से  हुआ था। तीन अपै्रल, 1680 को शिवाजी के देह..

नारी संगठन को समर्पित सरस्वती ताई आप्टे / पुण्य तिथि – 9 मार्च

1925 में हिन्दू संगठन के लिए डा. हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य प्रारम्भ किया। संघ की शाखा में पुरुष वर्ग के लोग ही आते थे। उन स्वयंसेवक परिवारों की महिलाएँ एवं लड़कियाँ डा. हेडगेवार जी से कहती थीं कि हिन्दू संगठन के लिए नारी वर्ग का भी योगदान लिया जाना चाहिए। डा. हेडगेवार भी यह चाहते तो थे; पर शाखा में लड़के एवं लड़कियाँ एक साथ खेलें, यह उन्हें व्यावहारिक नहीं लगता था। इसलिए वे चाहते थे कि यदि कोई महिला आगे बढ़कर नारी वर्ग के लिए अलग संगठन चलाये, तभी ठीक होगा। उनकी इच्छा पूरी हुई और ..

चित्तौड़ का दूसरा जौहर / इतिहास स्मृति – 8 मार्च, 1535

मेवाड़ के कीर्तिपुरुष महाराणा कुम्भा के वंश में पृथ्वीराज, संग्राम सिंह, भोजराज और रतनसिंह जैसे वीर योद्धा हुए। आम्बेर के युद्ध में राणा रतनसिंह ने वीरगति पाई। इसके बाद उनका छोटा भाई विक्रमादित्य राजा बना। उस समय मेवाड़ पर गुजरात के पठान राजा बहादुरशाह..

नीमड़ा का नरसंहार / इतिहास स्मृति – 7 मार्च

अंग्रेजी शासन में देशवासी अंग्रेजों के साथ-साथ उनकी शह पर पलने वाले सामंतों के शोषण से भी त्रस्त थे। वनों और पर्वतों में रहने वाले सरल स्वभाव के निर्धन किसान, श्रमिक, वनवासी तथा गिरिवासी इस शोषण के सबसे अधिक शिकार होते थे। राजस्थान में गोविन्द गुरु ने धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से इन्हें जाग्रत करने का सफल आंदोलन चलाया। उनके प्रयास से भील, मीणा तथा गरासिया जैसी वनवासी जातियां सामाजिक रूप से जागरूक हुईं। उनके बाद इस चिन्गारी को श्री मोतीलाल तेजावत ने ज्वाला बना दिया । कोल्यारी गांव में जन्मे ..

04 मार्च / पुण्यतिथि – क्रान्तिकारी की मानव कवच तोसिको बोस

नई दिल्ली l तोसिको बोस का नाम भारतीय क्रान्तिकारी इतिहास में अल्पज्ञात है l अपनी जन्मभूमि जापान में वे केवल 28 वर्ष तक ही जीवित रहीं l फिर भी सावित्री तुल्य इस सती नारी का भारतीय स्वाधीनता संग्राम को आगे बढ़ाने में अनुपम योगदान रहा l रासबिहारी बोस महान..

स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी लाला हरदयाल / पुण्य तिथि – 4 मार्च

देश को स्वतन्त्र कराने की धुन में जिन्होंने अपनी और अपने परिवार की खुशियों को बलिदान कर दिया, ऐसे ही एक क्रान्तिकारी थे 14 अक्तूबर, 1884 को दिल्ली में जन्मे लाला हरदयाल । इनके पिता श्री गौरादयाल तथा माता श्रीमती भोलीरानी थीं। इन्होंने अपनी सभी परीक्षाएँ सदा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं । बी.ए में तो उन्होंने पूरे प्रदेश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया था । 1905 में शासकीय छात्रवृत्ति पाकर ये आॅक्सफोर्ड जाकर पढ़ने लगे। उन दिनों लन्दन में श्यामजी कृष्ण वर्मा का ‘इंडिया हाउस’ ..

कारगिल युद्ध मे अद्भुत पराक्रम के लिए ​परमवीर चक्र से सम्मानित संजय कुमार / जन्म दिवस – 3 मार्च

परमवीर चक्र से सम्मानित राइफ़लमैन संजय कुमार को यह सम्मान सन 1999 में कारगिल युद्ध मे अद्भुत पराक्रम के लिए दिया गया ।  संजय कुमार का जन्म 3 मार्च, 1976 को विलासपुर हिमाचल प्रदेश के एक गाँव में हुआ था । पाकिस्तान ने शिमला समझौते का उल्लंघन करते हुए 1972 में स्थापित नियंत्रण रेखा को पार करके युद्ध शुरू किया था। इस युद्ध की शुरुआत क़रीब-करीब मई 1999 से हो गई थी,  6 मई 1999 को स्थानीय ..

क्रान्तिवीर गोपीमोहन साहा / बलिदान दिवस – 1 मार्च

पुलिस अधिकारी टेगार्ट ने अपनी रणनीति से बंगाल के क्रान्तिकारी आन्दोलन को भारी नुकसान पहुँचाया। प्रमुख क्रान्तिकारी या तो फाँसी पर चढ़ा दिये गये थे या जेलों में सड़ रहे थे। उनमें से कई को तो कालेपानी भेज दिया गया था। ऐसे समय में भी बंगाल की वीरभूमि पर गो..