जयंती/पुण्यतिथि

आधुनिक लद्दाख के निर्माता कुशक बकुला रिम्पोछे 

भगवान बुद्ध के शरीर त्याग के समय उनके 16 शिष्यों ने प्रतिज्ञा ली  थी कि जब तक उनके विचार पूरे विश्व में नहीं फैलेंगे, तब तक वे मोक्ष से दूर रहकर बार-बार जन्म लेंगे और यह काम पूरा करेंगे। इन 16 में से एक कुशोक बकुला अब तक 20 बार जन्म ले चुके हैं। उनके..

आजाद हिन्द फौज के सेनानी लेफ्टिनेंट ज्ञानसिंह बिष्ट / बलिदान दिवस – 17 मार्च, 1945

द्वितीय विश्व युद्ध में अंग्रेजों एवं मित्र देशों की सामरिक शक्ति अधिक होने पर भी आजाद हिन्द फौज के सेनानी उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे थे। लेफ्टिनेंट ज्ञानसिंह बिष्ट भी ऐसे ही एक सेनानायक थे, जिन्होंने अपने से छह गुना बड़ी अंग्रेज टुकड़ी को भागने पर मजबूर ..

सेवाभावी डा. रामेश्वर दयाल पुरंग

डा. रामेश्वर दयाल पुरंग का जन्म 13 मार्च, 1918 को ग्राम आदमपुर (जिला जालंधर, पंजाब) में हुआ था। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.बी.बी.एस. करते समय उन्होंने संघ के संस्थापक डा. हेडगेवार के पहली बार दर्शन किये। वे उन दिनों वहां शाखा विस्तार के लिए आये हु..

अटल जी को स्वयंसेवक बनाने वाले नारायण राव तर्टे

अपनी शिक्षा-दीक्षा पूर्ण कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक बनकर अपना सम्पूर्ण जीवन समाज सेवा हेतु समर्पित करने वाले कार्यकर्ताओं की एक लम्बी मालिका है। 13 मार्च, 1913 को अकोला (महाराष्ट्र) में जन्मे श्री नारायण राव तर्टे इस मालिका के एक सुवासित पुष्..

कलम और बम-गोली के धनी अज्ञेय

प्रसिद्ध साहित्यकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्सयायन ‘अज्ञेय’ कलम के साथ ही बम और गोली के भी धनी थे। युवावस्था में उन्होंने भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद, भगवतीचरण बोहरा, सुखदेव आदि के साथ काम किया था। क्रांतिकारी जीवन में एक बार रावी नदी में काफी ऊंचाई से छलांग लगाने से उनके घुटने की टोपी उतर गयी, जिससे वे जीवन भर कष्ट भोगते रहे। अज्ञेय का जन्म सात मार्च, 1911 को कसया (कुशीनगर, उ0प्र0) के एक उत्खनन शिविर में पुरातत्ववेत्ता श्री हीरानंद शास्त्री एवं श्रीमती कांतिदेवी के घर में हुआ था। बचपन ..

धर्मवीर पण्डित लेखराम

हिन्दू धर्म के प्रति अनन्य निष्ठा रखकर धर्म प्रचार में अपना जीवन समर्पण करने वाले धर्मवीर पंडित लेखराम का जन्म अविभाजित भारत के ग्राम सैयदपुर (तहसील चकवाल, जिला झेलम, पंजाब) में मेहता तारासिंह के घर आठ चैत्र, वि0सं0 1915 को हुआ था। बाल्यकाल में उनका अध्यय..

क्रान्तिकारी सुशीला दीदी

सुशीला दीदी का जन्म पांच मार्च, 1905 को ग्राम दत्तोचूहड़ (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। जालंधर कन्या महाविद्यालय में पढ़ते हुए वे कुमारी लज्जावती और शन्नोदेवी के सम्पर्क में आयीं। इन दोनों ने सुशीला के मन में देशभक्ति की आग भर दी। शिक्षा पूर्ण कर वे कोलक..

शास्त्रीय स्वर की साधिका गंगूबाई हंगल 

भारतीय शास्त्रीय संगीत को नये आयाम देने वाली स्वर साधिका गंगूबाई हंगल का जन्म पांच मार्च, 1913 को कर्नाटक के धारवाड़ जिले में एक केवट परिवार में हुआ था। इस परिवार में एक कुप्रथा के रूप में कई कन्याओं को छोटी अवस्था में ही मंदिर में देवदासी के रूप में भेंट..

क्रान्तिकारी की मानव कवच तोसिको बोस

तोसिको बोस का नाम भारतीय क्रान्तिकारी इतिहास में अल्पज्ञात है। अपनी जन्मभूमि जापान में वे केवल 28 वर्ष तक ही जीवित रहीं। फिर भी सावित्री तुल्य इस सती नारी का भारतीय स्वाधीनता संग्राम को आगे बढ़ाने में अनुपम योगदान रहा। रासबिहारी बोस महान क्रान्तिकारी..

राष्ट्रीय चेतना के अमर गायक रामनरेश त्रिपाठी

भारत के अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों में एक प्रार्थना बोली जाती है -   हे प्रभो आनन्ददाता, ज्ञान हमको दीजिये,शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये।लीजिये हमको शरण में हम सदाचारी बनें,ब्रह्मचारी धर्मरक्षक वीरव्रतधारी बनें।।यह प्रार्थना एक समय..

स्वतन्त्रता सेनानी लाला हरदयाल

देश को स्वतन्त्र कराने की धुन में जिन्होंने अपनी और अपने परिवार की खुशियों को बलिदान कर दिया, ऐसे ही एक क्रान्तिकारी थे 14 अक्तूबर, 1884 को दिल्ली में जन्मे लाला हरदयाल। इनके पिता श्री गौरादयाल तथा माता श्रीमती भोलीरानी थीं। इन्होंने अपनी सभी परीक्षाएँ सद..

निर्धनों के वास्तुकार लारी बेकर

 दुनिया में ऐसे लोग बहुत कम होते हैं, जिनमें प्रतिभा के साथ-साथ सेवा और समर्पण का भाव भी उतना ही प्रबल हो। इंग्लैंड के बरमिंघम में दो मार्च,  1917 को जन्मे भवन निर्माता एवं वास्तुकार लारेन्स विल्फ्रेड (लारी) बेकर ऐसे ही व्यक्ति थे, जिन्होंने क..

स्वाभिमान के सूर्य पंडित सूर्यनारायण व्यास

उज्जैन महाकाल की नगरी है। अंग्रेजी साम्राज्य का डंका जब पूरी दुनिया में बजा, तो जी.एम.टी (ग्रीनविच मीन टाइम) को मानक मान लिया गया; पर इससे पूर्व उज्जैन से ही विश्व भर में समय निर्धारित किया जाता था। इसी उज्जैन के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित नारायण..

सम्बलपुर का क्रांतिवीर सुरेन्द्र साय

भारत में जब से ब्रिटिश लोगों ने आकर अपनी सत्ता स्थापित की, तब से ही उनका विरोध हर प्रान्त में होने लगा था। 1857 में यह संगठित रूप से प्रकट हुआ; पर इससे पूर्व अनेक ऐसे योद्धा थे, जिन्होंने अंग्रेजों की नाक में दम किये रखा। वीर सुरेन्द्र साय ऐसे ही एक क्र..

संकीर्तन द्वारा धर्म बचाने वाले चैतन्य महाप्रभु

अपने संकीर्तन द्वारा पूर्वोत्तर में धर्म बचाने वाले निमाई (चैतन्य महाप्रभु) का जन्म विक्रमी सम्वत् 1542 की फागुन पूर्णिमा (27 फरवरी, 1486) को बंगाल के प्रसिद्ध शिक्षा-केन्द्र नदिया (नवद्वीप) में हुआ था। इनके पिता पण्डित जगन्नाथ मिश्र तथा माता शची देवी थ..

पुण्य तिथि विशेष: आखिर तक आजाद 'आजाद' ही रहे

  23 जुलाई 1906 को मध्यप्रदेश भावरा में चंद्रशेखर तिवारी जिन्हें हम चंद्रशेखर आजाद के नाम से जानते हैं उनका जन्म हुआ था. उनके पिता का नाम सीताराम तिवारी और मां जगरानी देवी थी. किशोर अवस्था में ही वह बड़े - बड़े सपनों को पूरा करने के लिए अपना घर छो..

चंद्रशेखर आजाद, जो सदा आजाद रहे

भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानियों में चन्द्रशेखर आजाद का नाम सदा अग्रणी रहेगा। उनका जन्म 23 जुलाई, 1906 को ग्राम माबरा (झाबुआ, मध्य प्रदेश) में हुआ था। उनके पूर्वज गाँव बदरका (जिला उन्नाव, उत्तर प्रदेश) के निवासी थे; पर अकाल के कारण इनके पिता श्री स..

हिन्दी और हिन्दुत्व प्रेमी वीर सावरकर

वीर विनायक दामोदर सावरकर दो आजन्म कारावास की सजा पाकर कालेपानी नामक कुख्यात अन्दमान की सेल्युलर जेल में बन्द थे। वहाँ पूरे भारत से तरह-तरह के अपराधों में सजा पाकर आये बन्दी भी थे। सावरकर उनमें सर्वाधिक शिक्षित थे। वे कोल्हू पेरना, नारियल की रस्सी बँटना ..

पालखेड़ का ऐतिहासिक संग्राम

द्वितीय विश्व युद्ध के प्रसिद्ध सेनानायक फील्ड मार्शल मांटगुमरी ने युद्धशास्त्र पर आधारित अपनी पुस्तक ‘ए कन्साइस हिस्ट्री ऑफ़ वारफेयर’ में  विश्व के सात प्रमुख युद्धों की चर्चा की है। इसमें एक युद्ध पालखेड़ (कर्नाटक) का है, जिसमें ..

लोकदेवता कल्ला जी राठौड़

राजस्थान में अनेक वीरों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया, जिससे उनकी छवि लोकदेवता जैसी बन गयी। कल्ला जी राठौड़ ऐसे ही एक महामानव थे। उनका जन्म मेड़ता राजपरिवार में आश्विन शुक्ल 8, विक्रम संवत 1601 को हुआ था। इनके पिता मेड़ता के राव जयमल..

जयंती विशेष: शत नमन माधव चरण में ...

संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने अपने देहान्त से पूर्व जिनके समर्थ कंधों पर संघ का कार्यभार सौंपा, वह थे श्री माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर, जिन्हें हम सब प्रेम से श्री गुरुजी कहकर पुकारते हैं। ‘परंम् वैभवम नेतुमेतत्वस्वराष्ट्रं’ यानी ..

सिद्धांतप्रिय राजनेता वसंतभाई गजेन्द्र गडकर

आजकल राजनीति को सिद्धांतप्रियता का विलोम माना जाता है; पर वसंतभाई गजेन्द्र गडकर इस मामले में अपवाद रहे। गुजरात में जनसंघ के कार्य को दृढ़ करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अपने परिचितों में वे ‘राव साहब’ के नाम से प्रसिद्ध थे। वे कर्णा..

‘हिन्दू चेतना’ के संपादक जगदीश चंद्र त्रिपाठी

संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री जगदीश चंद्र त्रिपाठी का जन्म तीन जनवरी, 1936 को अल्मोड़ा (उत्तराखंड) में श्री शिवदत्त त्रिपाठी के घर में हुआ था। 1946 में वे स्वयंसेवक बने। 1948 में गांधी जी की हत्या के बाद संघ पर प्रतिबंध लगा तथा सर्वत्र उसका विरोध होने लगा। ..

श्रमिक हित को समर्पित रमण भाई शाह

श्रमिकों के हित के लिए प्रदर्शन और आन्दोलन तो कई लोग करते हैं; पर ऐसे व्यक्तित्व कम ही हैं, जिन्होंने इस हेतु अच्छे वेतन और सुख सुविधाओं वाली नौकरी ही छोड़ दी। रमण भाई शाह ऐसी ही एक महान विभूति थे। रमण भाई का जन्म पुणे के पास ग्राम तलेगाँव दाभाड़े मे..

कर्तव्यनिष्ठ व सेवाभावी श्रीकृष्णचंद्र भारद्वाज

संघ के प्रचारक का अपने घर से मोह प्रायः छूट जाता है; पर 24 दिसम्बर, 1920 को पंजाब में जन्मे श्रीकृष्णचंद्र भारद्वाज के एक बड़े भाई नेत्रहीन थे। जब वे वृद्धावस्था में बिल्कुल अशक्त हो गये, तो श्रीकृष्णचंद्र जी ने अंतिम समय तक एक पुत्र की तरह लगन से उनकी से..

भारत रत्न सीमान्त गांधी

आज जैसा कटा-फटा भारत हमें दिखाई देता है, किसी समय वह ऐसा नहीं था। तब हिमालय के नीचे का सारा भाग भारत ही कहलाता था; पर मुस्लिम आक्रमण और धर्मान्तरण के कारण इनमें से पूर्व और पश्चिम के अनेक भाग भारत से कट गये। अफगानिस्तान से लगे ऐसे ही एक भाग पख्तूनिस्तान..

कार्यकर्ताओं के कुशल शिल्पी बाबूलाल जी

श्री बाबूलाल जी का जन्म उ.प्र. के बुलन्दशहर जिले की स्याना तहसील में हुआ था। उनके पिता पुलिस विभाग में थानेदार थे। चार भाइयों में बाबूलाल जी का क्रमांक तीसरा था। प्रारम्भिक शिक्षा अपने गांव और फिर स्याना में पाकर उन्होंने पीलीभीत के शासकीय आयुर्वेद महाविद..

सोनाखान के हुतात्मा वीर नारायण सिंह

छत्तीसगढ़ भारत का एक वन सम्पदा से भरपूर राज्य है। पहले यह मध्य प्रदेश का ही एक भाग था। अंग्रेजी शासन में जब दत्तक पुत्र को अस्वीकार करने का निर्णय हुआ, तो छत्तीसगढ़ भी अंग्रेजों के अधीन आ गया। रायपुर में अंग्रेजों ने एक कमिश्नरी की स्थापना की थी। वहा..

उच्च मनोबल के धनी डा. अन्ना साहब देशपांडे

डा. अन्ना साहब देशपांडे संघ के प्रारम्भिक कार्यकर्ताओं में से एक थे। उनका जन्म सात दिसम्बर, 1890 को वर्धा जिले के आष्टी गांव में हुआ था। प्राथमिक शिक्षा नागपुर में होने से उनकी मित्रता डा. हेडगेवार से हो गयी। उनकी भव्य कद-काठी और बोलने की शैली भी डा. जी स..

यशस्वी व्यक्तित्व के धनी उत्तमचंद इसराणी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक का काम ऐसे समर्पित लोगों के बल पर खड़ा है, जिन्होंने गृहस्थ होते हुए भी अपने जीवन में संघ कार्य को सदा प्राथमिकता दी। ऐसे ही एक यशस्वी अधिवक्ता थे श्री उत्तमचन्द इसराणी। श्री इसराणी का जन्म 10 नवम्बर, 1923 को सिन्ध प्रान्त में सक्..

राष्ट्रधर्म के सम्पादक आनन्द मिश्र ‘अभय’

 लखनऊ से प्रकाशित हो रही राष्ट्रधर्म पत्रिका की स्थापना रक्षाबन्धन 31 अगस्त, 1947 को उ.प्र. के तत्कालीन प्रांत प्रचारक श्री भाऊराव देवरस तथा सह प्रान्त प्रचारक श्री दीनदयाल उपाध्याय ने की थी। इसके प्रथम सम्पादक थे श्री अटल बिहारी वाजपेयी, जो आ..

नव दधीचि नाना भागवत

बिहार में पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और फिर विश्व हिन्दू परिषद के कार्य विस्तार में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले दत्तात्रेय बालकृष्ण (नाना) भागवत का जन्म वर्धा (महाराष्ट्र) में चार दिसम्बर, 1923 को हुआ था। छात्र जीवन में ही ये संघ के संस्थापक डा. ..

धुन के पक्के भूषणपाल जी

भूषणपाल जी का जन्म 30 नवम्बर, 1954 को जम्मू-कश्मीर राज्य के किश्तवाड़ नामक नगर में हुआ था। उनके पिता श्री चरणदास गुप्ता तथा माता श्रीमती शामकौर थीं। चारों ओर फैली सुंदर हिमाच्छादित पर्वत शृंखलाओं और कल-कल बहती निर्मल नदियों ने उनके मन में भारत माता के प..

रामसिंह कूका ने शुरू किया था अंग्रेजो के खिलाफ असहकार आन्दोलन

सन 1816 में राम सिंह का जन्म लुधियाना जिले (पंजाब) में भैनी में हुआ था। आगे चलकर वे सिख सेना के सैनिक बन गए । उस समय वे भाई बालक सिंह से काफी प्रभावित हुए थ । बालक सिंह की मृत्यु होने के बाद मिशनरी के काम की सारी जिम्मेदारी राम सिंह ने अपने कंधो पर ली थ..

सेवाव्रती ठक्कर बापा

पूजा का अर्थ एकान्त में बैठकर भजन करना मात्र नहीं है। निर्धन और निर्बल, वन और पर्वतों में रहने वाले अपने भाइयों की सेवा करना भी पूजा ही है। अमृतलाल ठक्कर ने इसे अपने आचरण से सिद्ध कर दिखाया। उनका जन्म 29 नवम्बर, 1869 को भावनगर (सौराष्ट्र, गुजरात) में..

जन्म दिवस - क्रान्तिकारी भाई हिरदाराम

भारत का चप्पा-चप्पा उन वीरों के स्मरण से अनुप्राणित है, जिन्होंने स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिए अपना तन, मन और धन समर्पित कर दिया। उनमें से ही एक भाई हिरदाराम का जन्म 28 नवम्बर, 1885 को मण्डी (हिमाचल प्रदेश) में श्री गज्जन सिंह स्वर्णकार के घर में हुआ था।..

क्रान्तिकारी भाई हिरदाराम

भारत का चप्पा-चप्पा उन वीरों के स्मरण से अनुप्राणित है, जिन्होंने स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिए अपना तन, मन और धन समर्पित कर दिया। उनमें से ही एक भाई हिरदाराम का जन्म 28 नवम्बर, 1885 को मण्डी (हिमाचल प्रदेश) में श्री गज्जन सिंह स्वर्णकार के घर में हुआ था।&n..

कोटली के अमर बलिदानी

‘हंस के लिया है पाकिस्तान, लड़ के लेंगे हिन्दुस्तान’ की पूर्ति के लिए नवनिर्मित पाकिस्तान ने 1947 में ही कश्मीर पर हमला कर दिया। देश रक्षा के दीवाने संघ के स्वयंसेवकों ने उनका प्रबल प्रतिकार किया। उन्होंने भारतीय सेना, शासन तथा जम्मू-कश्मीर ..

जन्म-दिवस : वीरांगना झलकारी बाई

    भारत की स्वाधीनता के लिए 1857 में हुए संग्राम में पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी कन्धे से कन्धा मिलाकर बराबर का सहयोग दिया था। कहीं-कहीं तो उनकी वीरता को देखकर अंग्रेज अधिकारी एवं पुलिसकर्मी आश्चर्यचकित रह जाते थे। ऐसी ही एक वीरांगना थी झल..

बाल शाखाओं के आग्रही रोशनलालजी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के काम में सायं शाखा का बड़ा महत्व है, चंूकि इनमें विद्यार्थी आते हैं। इस समय मिले विचार और संस्कार स्थायी होते हैं। यही स्वयंसेवक फिर कार्यकर्ता बनते हैं। सायं शाखा पर आने वाले बाल और शिशु स्वयंसेवक प्रायः चंचल और ऊधमी होते हैं। क..

वनांचल के ज्योतिपुंज गहिरा गुरु

मध्यप्रदेश के रायगढ़ और सरगुजा जिले में गोंड, कंवर, उरांव, कोरवा, नगेसिया, पंडो आदि वनवासी जातियां वर्षों से रहती हैं। ये स्वयं को घटोत्कच की संतान मानती हैं। मुगल आक्रमण के कारण उन्हें जंगलों में छिपना पड़ा। अतः वे मूल हिन्दू समाज से कट गये। गरीबी तथा ..

महान आत्मा ठाकुर गुरुजन सिंह

विश्व हिन्दू परिषद में कार्यरत वरिष्ठतम प्रचारक ठाकुर गुरजन सिंह का जन्म मार्गशीर्ष कृष्ण 13 (20 नवम्बर, 1918) को ग्राम खुरहुंजा (जिला चंदौली, उ.प्र.) में श्री शिवमूरत सिंह के घर में हुआ था। उनका मूल नाम दुर्जन सिंह था; पर सरसंघचालक श्री गुरुजी ने उसे ग..

वैकल्पिक सरसंघचालक डा. लक्ष्मण वासुदेव परांजपे 

स्वाधीनता संग्राम के दौरान संघ के संस्थापक डा. हेडगेवार ने 1930-31 में जंगल सत्याग्रह में भाग लिया था। उन दिनों संघ अपनी शिशु अवस्था में था।  शाखाओं की संख्या बहुत कम थी। डा. जी नहीं चाहते थे कि उनके जेल जाने से संघ कार्य में कोई बाधा आये..

परोपकार की प्रतिमूर्ति स्वामी प्रेमानन्द

भारत में संन्यास की एक विशेष परम्परा है। हिन्दू धर्म में ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और फिर संन्यास को आश्रम व्यवस्था कहा गया है; पर कई लोग पूर्व जन्म के संस्कार या वर्तमान जन्म में अध्यात्म और समाज सेवा के प्रति प्रेम होने के कारण ब्रह्मचर्य से सीधे सं..

तेजस्वी कार्यकर्ता मोरुभाऊ मुंजे

  प्रचारक और फिर गृहस्थ जीवन बिताते हुए भी संघ कार्य को ही अपने जीवन की प्राथमिकता मानने वाले कार्यकर्ताओं की विशाल मालिका के बल पर ही आज रा.स्व.संघ का काम दुनिया भर में प्रभावी हुआ है। श्री मोरेश्वर राघव (मोरुभाऊ) मुंजे ऐसे ही एक कार्यकर्ता थे। उ..

हिन्दी पत्रकारिता के जनक बाबूराव विष्णु पराड़कर

श्री बाबूराव विष्णु पराड़कर भारत के उन महान पत्रकारों में से थे, जिन्होंने पत्रकारिता को न केवल नयी दिशा दी, बल्कि उसका स्वरूप भी सँवारा। उनका जन्म 16 नवम्बर, 1883 को वाराणसी (उ.प्र.) में हुआ था। उन्होंने 1906 में पत्रकारिता जगत में प्रवेश किया और ..

भगतसिंह के प्रेरणास्रोत करतार सिंह सराबा

अमर बलिदानी करतार सिंह सराबा को भगतसिंह अपना अग्रज, गुरु, साथी तथा प्रेरणास्रोत मानते थे। वे भगतसिंह से 11 वर्ष बड़े थे और उनसे 11 वर्ष पूर्व केवल 19 वर्ष की तरुणावस्था में ही भारतमाता के पावन चरणों में उन्होंने हंसते हुए अपना शीश अर्पित कर दिया। क..

प्रयोगधर्मी शिक्षक गिजूभाई 

शिक्षक वह दीपक है, जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाशमान करता है। इस प्रसिद्ध कहावत को गिजूभाई के नाम से प्रसिद्ध प्रयोगधर्मी शिक्षक श्री गिरिजाशंकर वधेका ने पूरा कर दिखाया। 15 नवम्बर, 1885 को चित्तल (सौराष्ट्र, गुजरात) में जन्मे गिजूभाई के पिता अधिवक्ता थे। ..

थालाक्कल चंडु का बलिदान 

अंग्रेजों ने अपने शासन के दौरान कई जगह स्थानीय लोगों पर घोर अत्याचार किये। यद्यपि उन दिनों देश भर में स्थानीय जमींदार तथा छोटे राजाओं के राज्य थे। कर तो वे भी लेते थे; पर उनमें से अधिकांश जनता को पुत्रवत स्नेह भी करते थे। लेकिन इन शासकों को अंग्रेजों की ब..

धर्म रक्षा हेतु बलिदान  : गुरु तेगबहादुर

एक बार सिखों के नवें गुरु श्री तेगबहादुर जी हर दिन की तरह दूर-दूर से आये भक्तों से मिल रहे थे। लोग उन्हें अपनी निजी समस्याएँ तो बताते ही थे; पर मुस्लिम अत्याचारों की चर्चा सबसे अधिक होती थी। मुस्लिम आक्रमणकारी हिन्दू गाँवों को जलाकर मन्दिरों और गुरुद्वार..

विरक्त सन्त श्री दिगम्बर स्वामी

अनादि काल से भारत भूमि पर हजारों सन्त महात्माओं ने जन्म लेकर अपने उपदेशों से जनता जर्नादन का कल्याण किया है। इन्हीं ऋषि-मुनियों की परम्परा में थे श्री दिगम्बर स्वामी, जिनके सत्संग का लाभ उठाकर हजारों भक्तों ने अपना जीवन सार्थक किया। स्वामी जी का जन्म ग..

नोबेल पुरस्कार विजेता डा. रामन

बात 1903 की है। मद्रास के प्रेसिडेन्सी कालेज में बी.ए. में पढ़ाते समय प्रोफेसर इलियट ने एक छोटे छात्र को देखा। उन्हें लगा कि यह शायद भूल से यहाँ आ गया है। उन्होंने पूछा, तो उस 14 वर्षीय छात्र चन्द्रशेखर वेंकटरामन ने सगर्व बताया कि वह इसी कक्षा का छात्र है..

संघ समर्पित माधवराव मुले

7 नवम्बर, 1912 (कार्तिक कृष्ण 13, धनतेरस) को ग्राम ओझरखोल (जिला रत्नागिरी, महाराष्ट्र) में जन्मे माधवराव कोण्डोपन्त मुले प्राथमिक शिक्षा पूरी कर आगे पढ़ने के लिए 1923 में बड़ी बहन के पास नागपुर आ गये थे।  यहाँं उनका सम्पर्क संघ के संस्थापक डा. हे..

भारत के अन्तिम हिन्दू सम्राट महाराजा रणजीत सिंह

अठारहवीं शती के पंजाब में सिखों की शुकरचकिया मिसल (छोटी रियासत) के उत्तराधिकारी के रूप में दो नवम्बर 1780 को गुजराँवाला मे जन्मे रणजीत सिंह ने अपने शौर्य, पराक्रम, सूझबूझ और कूटनीति से सिख राज्य की सीमाएँ अटक, पेशावर, काबुल और जमरूद तक पहुँचा दी थीं।रणजीत..

लोकप्रिय लेखक आर.के.नारायण

    10 अक्तूबर/जन्म-दिवस    अंग्रेजी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार श्री राशिपुरम कृष्णास्वामी  नारायणस्वामी अय्यर अर्थात आर.के.नारायण का जन्म 10 अक्टूबर, 1906 को मद्रास में हुआ था। उनके पिता एक विद्यालय में प्रधानाचार्य थे। इसलि..

बलिदान दिवस - स्वाभिमानी राजा विजय सिंह

सामान्यतः भारत में स्वाधीनता के संघर्ष को 1857 से प्रारम्भ माना जाता है; पर सत्य यह है कि जब से विदेशी और विधर्मियों के आक्रमण भारत पर होने लगे, तब से ही यह संघर्ष प्रारम्भ हो गया था। भारत के स्वाभिमानी वीरों ने मुगल, तुर्क,&nbs..

पुण्यतिथि - बौद्धिक योद्धा डा. स्वराज्य प्रकाश गुप्त

  यह देश का दुर्भाग्य ही है कि अंग्रेजों ने जो भ्रामक इतिहास शिक्षा के माध्यम से जन-जन में प्रसारित किया, स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद भी उसमें सुधार का प्रयास नहीं हुआ। प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरू का विचार था कि भारत के पुरातन ग्रन्थो..

जन्मदिवस - भारत भक्त विदेशी महिला डा. एनी बेसेंट

डा. एनी वुड बेसेंट का जन्म एक अक्तूबर, 1847 को लंदन में हुआ था। इनके पिता अंग्रेज तथा माता आयरिश थीं। जब ये पांच वर्ष की थीं, तब इनके पिता का देहांत हो गया। अतः इनकी मां ने इन्हें मिस मेरियट के संरक्षण में हैरो भेज दिया। उनके साथ वे जर्मन..

कर्नाटक में हिन्दी के सेवक विद्याधर गुरुजी

    यों तो भारत में देववाणी संस्कृत के गर्भ से जन्मी सभी भाषाएँ राष्ट्रभाषाएँ हैं, फिर भी सबसे अधिक बोली और समझी जाने के कारण हिन्दी को भारत की सम्पर्क भाषा कहा जाता है। भारत की एकता में हिन्दी के इस महत्व को अहिन्दी भाषी प्रान्तों में ..

28 सितम्बर जन्मदिवस-स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर

  अपने सुरीले स्वर में 20 से भी अधिक भाषाओं में 50,000 से भी अधिक गीत गाकर ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड’ में नाम लिखा चुकीं स्वर सम्राज्ञी लता मंगेषकर को कौन नहीं जानता ? लता मंगेशकर का जन्म ..

विवेकानंद शिला स्मारक के शिल्पी – एकनाथ रानाडे

एकनाथ रानाडे का जन्म 19 नवम्बर, 1914 को ग्राम टिलटिला (जिला अमरावती, महाराष्ट्र) में हुआ था. पढ़ने के लिए वे अपने बड़े भाई के पास नागपुर आ गए. वहीं उनका सम्पर्क डॉ. हेडगेवार से हुआ. बचपन से ही प्रतिभावान एवं शरारती थे. कई बार शरारतों के कारण उन्हें शाखा..

विश्व हिन्दू परिषद के प्रथम अध्यक्ष जयचामराज वाडियार

विश्व भर के हिन्दुओं को संगठित करने के लिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (29 अगस्त, 1964) को स्वामी चिन्मयानंद जी की अध्यक्षता में, उनके मुंबई स्थित सांदीपनि आश्रम में विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना हुई। इस अवसर पर धार्मिक, और सामाजिक क्षेत्र की अनेक महान वि..

जन्म दिवस-सरल व सौम्य शालिगराम तोमर

संघ के वरिष्ठ प्रचारक, सरल व सौम्य व्यवहार के धनी, समयपालन व अनुशासनप्रिय श्री शालिगराम तोमर का जन्म मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के ग्राम पोलायकलां में चार जुलाई, 1941 को एक सामान्य किसान परिवार में हुआ था। इनके पिता श्री उमराव सिंह तथा म..

जन्म दिवस-सिद्धयोगी स्वामी राम

त्यागी और तपस्वियों की भूमि भारत में अनेक तरह के योगी हुए हैं। केवल भारत ही नहीं, तो विश्व के धार्मिक विद्वानों, वैज्ञानिकों एवं चिकित्सकों को अपनी यौगिक क्रियाओं से कई बार चमत्कृत कर देने वाले सिद्धयोगी स्वामी राम का नाम असहज योग की परम्परा म..

भारत रत्न डा. विधानचन्द्र राय

  भारत रत्न  डा. विधानचन्द्र राय डा. विधानचन्द्र राय का जन्म बिहार की राजधानी पटना में एक जुलाई 1882 को हुआ था। बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि विधानचन्द्र राय की रुचि चिकित्सा शास्त्र के अध्ययन में थी। भारत से इस सम्बन्ध मे..

जन्म-दिवस अनुपम दानी : भामाशाह

      दान की चर्चा होते ही भामाशाह का नाम स्वयं ही मुँह पर आ जाता है। देश रक्षा के लिए महाराणा प्रताप के चरणों में अपनी सब जमा पूँजी अर्पित करने वाले दानवीर भामाशाह का जन्म अलवर (राजस्थान) में 28 जून, 1547 को हुआ था। उनक..

कारगिल युद्ध के अमर बलिदानी

अमर बलिदानी कैप्टन विजयंत थापर कैप्टन विजयंत थापर की बटालियन ने जब 13 जून 1999 को तोलोलिंग जीता, तब वो कारगिल में भारतीय सेना की पहली बड़ी विजय थी. 22 साल की उम्र में अमर बलिदानी विजयंत थापर ने जी भर के ज़िन्दगी जी. खेले, प्यार किया, अपनी पसंद के पेश..

जन्म-दिवस - वन्देमातरम् के गायक : बंकिमचन्द्र चटर्जी

भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में वन्देमातरम् नामक जिस महामन्त्र ने उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक जन-जन को उद्वेलित किया, उसके रचियता बंकिमचन्द्र चटर्जी का जन्म ग्राम काँतलपाड़ा, जिला हुगली,पश्चिम बंगाल में 26 जून, 1838 को ह..

नगर सेठ अमरचन्द बांठिया को फांसी

स्वाधीनता समर के अमर सेनानी सेठ अमरचन्द मूलतः बीकानेर (राजस्थान) के निवासी थे। वे अपने पिता श्री अबीर चन्द बाँठिया के साथ व्यापार के लिए ग्वालियर आकर बस गये थे। जैन मत के अनुयायी अमरचन्द जी ने अपने व्यापार में परिश्रम, ईमानदारी एवं सज्जनता के ..

वन्य जीवन के चित्रकार : रामेश बेदी

अपने कैमरे से वन्य जीवन की विविधता एवं रोमा॰च का सम्पूर्ण विश्व को दर्शन कराने वाले अद्भुत चित्रकार रामेश बेदी का जन्म 20 जून, 1915 को कालाबाग (वर्त्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। श्री बेदी गुरु नानक की 16 वीं पीढ़ी में थे। इन..

बलिदान-दिवस - राजा दाहरसेन का बलिदान

इतिहास साक्षी है कि भारत भूमि पर होने वाले आक्रमणों को सिंध ने सदैव ही अपनी छाती पर झेला है। भारत पर जितने भी विदेशी आक्रमण हुए है वह सभी खैबर के दरें से हुए हैं। खैबर का दर्रा सिंध देश के पास है भारतीय सीमाओं के अंतिम प्रहरी सिंधु सम्राट महाराजा दाहिरस..

सदा प्रसन्न वीरेन्द्र भटनागर

कुछ लोग हर परिस्थिति में प्रसन्न रहकर सबको प्रसन्न रखते हैं। श्री वीरेन्द्र भटनागर ऐसे ही एक प्रचारक थे। उनके पिता श्री ज्ञानेन्द्र स्वरूप भटनागर लखनऊ के मुख्य डाकपाल कार्यालय में काम करते थे। किसी विवाह कार्यक्रम में वे परिवार सहित मथुरा आये थे। वहीं 1..

शुद्धता के अनुरागी : उस्ताद असद अली खां

आजकल संगीत में सब ओर मिलावट (फ्यूजन) का जोर है। कई तरह के देशी और विदेशी वाद्य एक साथ मंच पर स्थान पा रहे हैं। कभी-कभी तो शास्त्रीय और विदेशी शैलियों को मिलाकर बने कार्यक्रम को देख और सुनकर सच्चे संगीत प्रेमी सिर पीट लेते हैं। एक ओर कान फाड़ने वाला विदे..

प्रसिद्धि से दूर : भाऊसाहब भुस्कुटे

संघ संस्थापक डा. हेडगेवार की दृष्टि बड़ी अचूक थी। उन्होंने ढूँढ-ढूँढकर ऐसे हीरे एकत्र किये, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन और परिवार की चिन्ता किये बिना पूरे देश में संघ कार्य के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। ऐसे ही एक श्रेष्ठ प्रचारक थ..

गणेश दामोदर सावरकर उपाख्य बाबाराव सावरकर

  वीर सावकर के बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर उपाख्य बाबाराव सावरकर भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी थे. बाबाराव सावरकर का जन्म 13 जून को महाराष्ट्र के भगूर गाँव में हुआ था. बचपन से ही भारत को स्वाधीन करवाने की इच्छा उनके मन में बलवती होने ..

महासमर के योद्धा : बाबासाहब नरगुन्दकर

भारत माँ को दासता की शृंखला से मुक्त कराने के लिए 1857 में हुए महासमर के सैकड़ों ऐसे ज्ञात और अज्ञात योद्धा हैं, जिन्होंने अपने शौर्य,पराक्रम और उत्कट देशभक्ति से ने केवल उस संघर्ष को ऊर्जा दी, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए भी वे प्रेरण..

काकोरी कांड के नायक :पंडित रामप्रसाद बिस्मिल

पंडित रामप्रसाद का जन्म 11 जून, 1897 को शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। इनके पिता श्री मुरलीधर शाहजहाँपुर नगरपालिका में कर्मचारी थे; पर आगे चलकर उन्होंने नौकरी छोड़कर निजी व्यापार शुरू कर दिया। रामप्रसाद जी बचपन से महर्षि द..

29 मई/बलिदान दिवस-हैदराबाद सत्याग्रह के बलिदानी नन्हू सिंह

15 अगस्त, 1947 को अंग्रेजों ने भारत को स्वतन्त्र कर दिया; पर इसके साथ ही वे यहाँ की सभी रियासतों, राजे-रजवाड़ों को यह स्वतन्त्रता भी दे गये, कि वे अपनी इच्छानुसार भारत या पाकिस्तान में जा सकती हैं। देश की सभी रियासतें भारत में मिल गयीं; पर जूनागढ़ और भा..

निष्ठावान स्वयंसेवक बंसीलाल सोनी

संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री बंसीलाल सोनी का जन्म एक मई, 1930 को वर्तमान झारखंड राज्य के सिंहभूम जिले में चाईबासा नामक स्थान पर अपने नाना जी के घर में हुआ था। इनके पिता श्री नारायण सोनी तथा माता श्रीमती मोहिनी देवी थीं। इनके पुरखे मूलतः राजस्थान के थे, जो..

30 अप्रैल / जन्मदिवस – राष्ट्रसन्त तुकड़ो जी महाराज

नई दिल्ली. 23 जुलाई, 1955 को जापान के विश्व धर्म सम्मेलन में एक सन्यासी जब बोलने खड़ा हुआ तो भाषा न समझते हुए भी उनके चेहरे के भाव और कीर्तन के मधुर स्वर ने ऐसा समां बांधा कि श्रोता मन्त्रमुग्ध हो उठे. लोगों को भावरस में डुबोने वाले वे महानुभाव राष्ट्रसंत..

30 अप्रैल - बलिदान दिवस / वीर हरिसिंह नलवा

भारत पर विदेशी आक्रमणकारियों की मार सर्वप्रथम सिन्ध और पंजाब को ही झेलनी पड़ी। 1802 में रणजीत सिंह विधिवत महाराजा बन गये। 40 साल के शासन में उन्हें लगातार अफगानों और पठानों से जूझना पड़ा। इसमें मुख्य भूमिका उनके सेनापति हरिसिंह नलवा की रही। 1802 में उन्..

29 अप्रैल - जन्म दिवस / अद्वित्य चित्रकार राजा रवि वर्मा

आज घर-घर में देवी-देवताओं की तस्वीरें आम हैं. लेकिन अब से करीब सवा सौ साल पहले ये देवी-देवता ऐसे सुलभ न थे. उनकी जगह केवल मंदिरों में थी. वहां सबको जाने की इजाजत भी नहीं थी. जात-पांत का भी भेद होता था. घर में भी यदि वे होते तो मूर्तियों के रूप में. तस्वीर..

27 अप्रैल – इतिहास स्मृति / कांगला दुर्ग (मणिपुर) का पतन

1857 के स्वाधीनता संग्राम में सफलता के बाद अंग्रेजों ने ऐसे क्षेत्रों को भी अपने अधीन करने का प्रयास किया, जो उनके कब्जे में नहीं थे। पूर्वोत्तर भारत में मणिपुर एक ऐसा ही क्षेत्र था। स्वाधीनता प्रेमी वीर टिकेन्द्रजीत सिंह वहां के युवराज तथा सेनापति थे। उन..

26 अप्रैल / पुण्यतिथि – भारत दर्शन कार्यक्रम के प्रणेता विद्यानंद शेणाय

भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के हीरो रहे जगदीशपुर के बाबू वीर कुंवर सिंह को एक  बेजोड़ व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है जो 80 वर्ष की उम्र में भी लड़ने तथा विजय हासिल करने का माद्दा रखते थे. अपने ढलते उम्र और बिगड़ते सेहत के बावजूद भी उन्होंने ..

26 अप्रैल - पुण्यतिथि / “वीर कुंवर सिंह” 1857 के महासमर के वयोवृद्ध योद्धा

भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के हीरो रहे जगदीशपुर के बाबू वीर कुंवर सिंह को एक  बेजोड़ व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है जो 80 वर्ष की उम्र में भी लड़ने तथा विजय हासिल करने का माद्दा रखते थे. अपने ढलते उम्र और बिगड़ते सेहत के बावजूद भी उन्होंने ..

25 अप्रैल - जन्म दिवस / अ.भा.वि.प .(ABVP) की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण आधार “यशवंत वासुदेव केलकर”

‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ की कार्यप्रणाली को जिन्होंने महत्वपूर्ण आधार दिया, वे थे श्री यशवंत वासुदेव केलकर। उनका जन्म 25 अप्रैल, 1925 को पंढरपुर (महाराष्ट्र) में हुआ था। उनके पिता शिक्षा विभाग में नौकरी करते थे। वे रूढि़वादी थे..

24 अप्रैल / पुण्यतिथि – गौरक्षा के लिये 166 दिन अनशन करने वाले महात्मा रामचंद्र वीर

नई दिल्ली. वर्ष 1966 में दिल्ली में गौरक्षार्थ 166 दिन का अनशन करने वाले महात्मा रामचंद्र वीर का जन्म आश्विन शुक्ल प्रतिपदा, विक्रमी संवत 1966 (1909 ई) में महाभारतकालीन विराट नगर (राजस्थान) में हुआ था. इनके पूर्वज स्वामी गोपालदास बाणगंगा के तट पर स्थित ग..

24 अप्रैल - पुण्यतिथि / राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्म बिहार प्रदेश के बेगूसराय (पुराने मुंगेर) जिले के सिमरिया गांव में एक निम्न मध्यवर्गीय भूमिहार ब्राह्मण किसान परिवार में 23 सिंतबर 1908 को हुआ था।  उस जमाने में सिमरिया गांव के घर–घर में नित्य &lsquo..

23 अप्रैल, 1930 - इतिहास स्मृति / पेशावर कांड के नायक चन्द्रसिंह गढ़वाली

चन्द्रसिंह का जन्म ग्राम रौणसेरा, (जिला पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड) में 25 दिसम्बर, 1891 को हुआ था। वह बचपन से ही बहुत हृष्ट-पुष्ट था। ऐसे लोगों को वहाँ ‘भड़’ कहा जाता है। 14 वर्ष की अवस्था में उनका विवाह हो गया। उन दिनों प्रथम विश्वयुद्ध प्रारम..

22 अप्रैल - पुण्य तिथि / क्रान्ति और सेवा के राही योगेश चन्द्र चटर्जी

क्रान्तिवीर योगेश चन्द्र चटर्जी का जीवन देश को विदेशी दासता से मुक्त कराने की गौरवमय गाथा है। उनका जन्म अखंड भारत के ढाका जिले के ग्राम गोकाडिया, थाना लोहागंज में तथा लालन-पालन और शिक्षा कोमिल्ला में हुई। 1905 में बंग-भंग से जो आन्दोलन शुरू हुआ, योगेश दा ..

21 अप्रैल - बलिदान-दिवस / स्वतंत्रता सेनानी गणपतराय

गणपतराय का जन्म 17 जनवरी 1808 को ग्राम भौरो (जिला लोहरदगा, झारखंड) में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। इनके पिता श्री किसनराय तथा माता श्रीमती सुमित्रादेवी थीं। बचपन से ही वनों में घूमना, घुड़सवारी, आखेट आदि उनकी रुचि के विषय थे। इस कारण उनके मित्र उन्हें &..

20 अप्रैल - जन्मदिवस / आधुनिक मीरा जुथिका रॉय

जुथिका राय को मीरा बाई के बाद आधुनिक मीरा के नाम से जाना जाता है . जो लोग कला जगत में बहुत ऊंचाई पर पहुंच जाते हैं, उनमें से अधिकांश को आचार-व्यवहार की अनेक दुर्बलताएं घेर लेती हैं; पर भजन गायन की दुनिया में अपार प्रसिद्धि प्राप्त जुथिका राॅय का..

19 अप्रैल - बलिदान दिवस / युवा बलिदानी अनन्त कान्हेरे

भारत माँ की कोख कभी सपूतों से खाली नहीं रही। ऐसा ही एक सपूत थे अनन्त लक्ष्मण कान्हेरे, जिन्होंने देश की स्वतन्त्रता के लिए केवल 19 साल की युवावस्था में ही फाँसी के फन्दे को चूम लिया। महाराष्ट्र के नासिक नगर में उन दिनों जैक्सन नामक अंग्रेज जिलाधीश कार्यर..

18 अप्रैल - बलिदान दिवस / 1857 के नायक तात्या टोपे

छत्रपति शिवाजी के उत्तराधिकारी पेशवाओं ने उनकी विरासत को बड़ी सावधानी से सँभाला। अंग्रेजों ने उनका प्रभुत्व समाप्त कर पेशवा बाजीराव द्वितीय को आठ लाख वार्षिक पेंशन देकर कानपुर के पास बिठूर में नजरबन्द कर दिया। इनके दरबारी धर्माध्यक्ष रघुनाथ पाण्डुरंग भी इ..

17 अप्रैल – भगवान महावीर जयंती

आज 17 अप्रैल को महावीर जयंती का पर्व पूरे देश में मनाया जा रहा है। महावीर जयंती जैन समुदाय का सबसे प्रमुख त्योहार है। महावीर स्वामी का जन्म दिवस चैत्र की शुक्ल त्रयोदशी को मनाया जाता है। भगवान महावीर स्वामी, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे, जिन्होंने ..

17 अप्रैल - पुण्य तिथि / प्रसिद्ध दर्शनशास्त्री, आदर्श शिक्षक डा. राधाकृष्णन

प्रसिद्ध दर्शनशास्त्री, अध्यापक एवं राजनेता डा. राधाकृष्णन का जन्म पाँच सितम्बर 1888 को ग्राम प्रागानाडु (जिला चित्तूर, तमिलनाडु) में हुआ था। इनके पिता वीरस्वामी एक आदर्श शिक्षक तथा पुरोहित थे। अतः इनके मन में बचपन से ही हिन्दू धर्म एवं दर्..

16 अप्रैल - पुण्य तिथि / संविधान की मूल प्रति का चित्रांकन करने वाले चित्रकार नन्दलाल बोस

रवीन्द्रनाथ टैगोर और महात्मा  गाँधी घनिष्ठ मित्र थे; पर एक बार दोनों में बहस हो गयी। कुछ लोग टैगोर के पक्ष में थे, तो कुछ गाँधी  के। वहाँ एक युवा चित्रकार चुप बैठा था। पूछने पर उसने कहा कि चित्रकार को तो सभी रंग पसन्द होते हैं। इस कारण मेरे..

15 अप्रैल - जन्म दिवस / सिक्खों के पाँचवें गुरु गुरु अर्जन देव

गुरु अर्जन देव  सिक्खों के पाँचवें गुरु थे। ये 1 सितम्बर, 1581 ई. में गद्दी पर बैठे। गुरु अर्जन देव का कई दृष्टियों से सिक्ख गुरुओं में विशिष्ट स्थान है। ‘गुरु ग्रंथ साहब’ आज जिस रूप में उपलब्ध है, उसका संपादन इन्होंने ही क..

11 अप्रैल - जन्म दिवस / समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले

महात्मा ज्योतिबा फुले इनका जन्म 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र के सतारा ज़िले में हुआ था | उनका असली  नाम ज्योतिराव गोविंदराव फुले था | वह 19वी सदी  की एक बड़े समाज सुधारक, सक्रिय प्रतिभागी तथा विचारक थे |  ज्‍योतिबा फु..