साहित्य

प्रिय पाकिस्तान – विजय मनोहर तिवारी

भोपाल(विसंके). 14 अगस्त को आजादी का जश्न मनाते हुए तुम्हें देखता हूं तो कई सवाल जेहन में उतर आते हैं। तुम यह जश्न क्यों मनाते हो? तुम किससे आजाद हुए? तुम थे कहां जो आजाद हुए? मनाना ही है तो अपना जन्मदिन मनाओ। उम्र के साल गिनो। आजादी के जश्न से लगता है कि ..

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम - नरेन्द्र सहगल – भाग- 3 (1 अगस्त से 14 अगस्त तक जारी)

भोपाल(विसंके). भारत को ब्रिटिश साम्राज्यवाद के क्रूर पंजे से मुक्त करवाने के लिए समस्त भारत में एक संगठित सशस्त्र क्रांति का आधार तैयार करने हेतु केशवराव हेडगेवार को तत्कालीन राष्ट्रवादी नेताओं विशेषतया लोकमान्य तिलक ने कलकत्ता भेजा था। तिलक की सांस्कृतिक..

गांधी जी की तरह प्रेमचंद्र ने भी लड़ी हैं लड़ाइयां

बीसवीं सदी का वह भारत, जिसकी सोई हुई आस्था जागने के लिये अकुलाने लगी थी...उसमें एक नाम साहित्य की दुनिया से था तो दूसरा राजनीतिक हलचलों से, वे नाम थे...प्रेमचंद और महात्मा गांधी। देश के और सामाजिक कुरीतियों के प्रति दोनों महापुरुषों की चिंता समान थी। एक न..

आज की अभिव्यक्ति

  अपना धर्म , अपनी संस्कृति अथवा अपनी सभ्यता छोड़कर दूसरों की नक़ल करने से कल्याण की संभावनाएं समाप्त हो जाती हैं।  - श्रीराम शर्मा आचार्य ..

मानव के कर्तव्य पंच महायज्ञ

भोपाल(विसंके). “यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्म” अर्थात् प्रत्येक श्रेष्ठ कर्म यज्ञ कहलाता है अथवा यज्ञ करना सबसे श्रेष्ठ कर्म है । स्वामी दयानन्द जी ने वेदों के आधार पर कहा कि प्रत्येक मनुष्य को प्रतिदिन अपने जीवन में पाँच महायज्ञ जरूर करने चाहिए। ..

असहिष्णुता के सुनियोजित प्रोपेगंडा के बरक्स - डॉ. आशीष द्विवेदी (पुस्तक समीक्षा )

भोपाल(विसंके). आज के जमाने में लिखा और कहा तो बहुत कुछ जा रहा है पर उसमें उतना असर दिखता नहीं है। कारण अंतस से मन, वचन और कर्म को एकाकार कर लिखने वाले गिनती के हैं। शायद इसीलिए वह लेखन शाम ढलते ही किसी अंधेरे कोने में दुबक जाता है। लेखन में मारक क्षमता तभ..

आज की अभिव्यक्ति

अनेकता में एकता और विभिन्न रूपों में एकता की अभिव्यक्ति भारतीय संस्कृति की सोच रही है-पंडित दीनदयाल उपाध्याय ..