मध्य भारत

शिवपुरी संघ गाथा

पृष्ठभूमि - आगरा मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित, सुरम्य प्राकृतिक छटा के लिये विख्यात शिवपुरी आज़ादी के पूर्व तत्कालीन ग्वालियर रियासत की ग्रीष्म कालीन राजधानी थी ! नाम के अनुरूप भगवान शंकर के अनेक प्राचीन मंदिरों को अपने अंचल में समेटे&..

विदिशा विभाग संघ गाथा 

पृष्ठभूमि - वेत्रवती नदी के किनारे स्थित विदिशा का वर्णन भारतीय इतिहास में एक स्वतंत्र, संपन्न व शक्तिशाली राज्य के रूप में मिलता है ! विक्रमादित्य की पत्नी महारानी ध्रुव देवी एवं अपनी विद्वत्ता के लिये प्रसिद्ध गल्हण विदिशा के ही थे !इस जिले के रावण&nbs..

राजगढ़ संघ गाथा

मध्य प्रदेश बनने के पूर्व राजगढ़ अनेक देसी रियासतों में बंटा हुआ था, जिनमें प्रमुख थी - नरसिंहगढ़, राजगढ़, खिलचीपुर तथा होलकर रियासत | संघ कार्य योजना में प्रथक विभाग बनने के पूर्व तक राजगढ़ जिला उज्जैन विभाग में समाहित था | प्रथक विभाग बनने पर उज्जैन विभा..

मुरैना संघगाथा

पृष्ठभूमि – चम्बल नदी मुरैना की उत्तरी और पूर्वी सीमा को राजस्थान से प्रथक करती है ! इसके उत्तरी पूर्वी सीमा का छोटा सा भाग, उसेदघाट पर उत्तर प्रदेश को स्पर्श करता है ! इसके पूर्व में भिंड तो दक्षिण में ग्वालियर तथा शिवपुरी जिले हैं ! एसा कहा जाता ..

भोपाल संघ गाथा

पृष्ठभूमि – देश की स्वतन्त्रता के पूर्व भोपाल एक नबाबी रियासत थी | इसमें सीहोर व रायसेन दो जिले थे | भोपाल नाम का कोई जिला तो दूर कोई तहसील भी नही थी | उस समय वह सीहोर जिले की हुजूर तहसील का एक नगर मात्र था | चारों ओर घने जंगल के बीच एक प..

नर्मदापुर संघ गाथा

पृष्ठभूमि सतपुडा की तराई में नर्मदा नदी के दक्षिण तट पर बसा हुआ है होशंगावाद जिला ! देश को आजादी मिलने व् राज्यों के पुनर्गठन होने के बाद यह नवनिर्मित मध्य प्रदेश का अंग बना ! परम पावन नर्मदा के तट पर स्थित होने के कारण इसका धार्मिक महत्व भी है ! नर्मदा ..

ग्वालियर संघ गाथा

ग्वालियर संघ गाथा पृष्ठभूमि - आज़ादी के पूर्व ग्वालियर विभाग देसी रियासत के अधीन होने के कारण यहाँ कांग्रेस का काम सार्वजनिक सभा के नाम से चलता था | उसी के माध्यम से स्वतन्त्रता प्राप्ति के अखिल भारतीय आन्दोलन से यहाँ की जनता जुड़ पाई..

स्वदेशी सांस्कृतिक चिन्तन मात्र से एकाकीपन होता है दूर – स्वामी अवधेशानन्द गिरी

जोधपुर (विसंकें). महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी ने कहा कि भारत के पौराणिक साहित्य एवं उनके मौलिक तत्वों से परिपूर्ण स्वदेशी संस्कृति के चिन्तन मात्र से मनुष्य का एकाकीपन दूर होता है. समय बड़ा बलवान है और इस समय की अनुभूति हमें करनी चाहिए. प्रत्य..