प्रेरक प्रसंग

प्रेरक प्रसंग-"दूरियां इतनी न बढ़े जाएं कि वापस आना ही मुमकिन न हो"

एक बार एक संत अपने शिष्यों के साथ बैठे थे। अचानक उन्होंने सभी शिष्यों से एक सवाल पूछा। बताओ जब दो लोग एक दूसरे पर गुस्सा करते हैं तो जोर-जोर से चिल्लाते क्यों हैं? शिष्यों ने कुछ देर सोचा और एक ने उत्तर दिया : हम अपनी शांति खो चुके होते हैं इसलिए चिल्ल..

प्रेरक प्रसंग - दो रोटियां

बच्चे के पढाई के कमरे में जब अकस्मात् उसकी माँ पहुंची तब देखा कि अलमारी में पढने-लिखने वाली कापी-किताबों की और चींटियों की लाइन चली जा रही थी | कारण था कि उन कापी किताबों के पीछे दो रोटियां रखी थीं | जब बालक विद्यालय में पढ़कर आया तब उसकी माँ ने उन रोटिय..

गृहस्थी का मूल मंत्र/प्रेरक प्रसंग

संत कबीर रोज सत्संग किया करते थे। दूर दराज से लोग उनकी बात सुनने आते थे। एक दिन सत्संग खत्म होने पर भी एक आदमी बैठा ही रहा। कबीर ने इसका कारण पूछा तो वह बोला, मुझे आपसे कुछ पूछना है। मैं गृहस्थ हूं, घर में सभी लोगों से मेरा झगड़ा होता रहता है। मैं जानन..

देशद्रोही का वध (31 अगस्त/प्रेरक-प्रसंग)

स्वाधीनता प्राप्ति के प्रयत्न में लगे क्रांतिकारियों को जहां एक ओर अंग्रेजों ने लड़ना पड़ता था, वहां कभी-कभी उन्हें देशद्रोही भारतीय, यहां तक कि अपने गद्दार साथियों को भी दंड देना पड़ता था। बंगाल के प्रसिद्ध अलीपुर बम कांड में कन्हाईलाल दत्त, सत्येन्द्..

जब पेड़ों को काटा जाने लगा, तो लोगों के शरीर भी टुकड़े-टुकड़े होकर गिरने लगे

      खेजडली ‘पर्यावरण संरक्षण के लिए 363 बलिदान’  ( स्मरण दिवस भाद्रपद शुक्ल दशमी तदनुसार 31 अगस्त ) राजस्थानी की प्रसिद्ध कहावत “सर साठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण” (अर्थात सिर कटवा कर वृक्षों की रक्षा हो सक..

भगवान ने हमे ढेरो अवसरो के बीच जन्म दिया है

एक बार एक ग्राहक चित्रो की दुकान पर गया । उसने वहाँ पर अजीब से चित्र देखे । पहले चित्र मे चेहरा पूरी तरह बालो से ढँका हुआ था और पैरोँ मे पंख थे। एक दूसरे चित्र मे सिर पीछे से गंजा था।  ग्राहक ने पूछा – यह चित्र किसका है?  दुक..

जैसा विचार वैसा संसार

गुरु द्रोणाचार्य का आश्रम | पाण्डव-कौरव का अध्ययन चल रहा है | एक दिन द्रोणाचार्य के मान में विचार आया कि आज युधिष्ठिर और दुर्योधन के विचार और बुद्धि की परीक्षा की जाये | उन्होंने दोनों को बुलावाया | युधिष्ठिर और दुर्योधन ने आकर आचार्य को प्रणाम किया | प..

जीवन के चार कीमती रत्न

एक वृद्ध संत ने अपनी अंतिम घड़ी नज़दीक देख अपने बच्चों को अपने पास बुलाया और कहा, मैं तुम बच्चों को चार कीमती रत्न दे रहा हूँ, मुझे पूर्ण विश्वास है कि तुम इन्हें सम्भाल कर रखोगे और पूरी ज़िन्दगी इनकी सहायता से अपना जीवन आनंदमय तथा श्रेष्ठ बनाओगे। 1-..

"देने का आनंद"

स्वामी विवेकानंद के जीवन की यह एक घटना है।  भ्रमण  करने एवं भाषणों के बाद स्वामी विवेकानन्द अपने निवास स्थान पर आराम करने के लिए लौटे हुए थे।  उन दिनों वे अमेरिका में ठहरे हुए थे और वे अपने ही हाथों से भोजन  बनाते थे।  वे भोजन करन..

प्रेरक प्रसंग

शास्त्रों में निपुण, प्रसिद्ध ज्ञानी एवं प्रख्यात संत श्री देवाचार्य के शिष्य का नाम महेन्द्रनाथ था। एक शाम महेन्द्रनाथ अपने साथियों के साथ उद्यान में टहल रहे थे। और आपस में वे किसी विषय पर चर्चा कर रहे थे। चर्चा का विषय था- स्वर्ग-नरक। किसी एक साथी ने मह..

केवल लक्ष्य पर ध्यान लगाओ-स्वामी विवेकानंद

एक बार स्वामी विवेकानंद अमेरिका में भ्रमण कर रहे थे। अचानक, एक जगह से गुजरते हुए उन्होंने पुल पर खड़े कुछ लड़कों को नदी में तैर रहे अंडे के छिलकों पर बन्दूक से निशाना लगाते देखा। किसी भी लड़के का एक भी निशाना सही नहीं लग रहा था। तब उन्होंने ने एक लड़के ..

नागरी की शक्ति

पंडित मदन मोहन मालवीय जी को एक बार एक मौलवी ने अपना वकील बनाया। मुकदमे में कुछ अरबी पुस्तकों से न्यायालय के फैसलों के उद्धरण देने थे जिन्हें मालवीय जी ने अपने हाथ से नागरी लिपि में लिख लिया था। अदालत में विरोधी पक्ष जब ये उद्धरण देने लगा तो वह शुद्ध उच्चारण नहीं कर पा रहा था।मालवीय जी ने जज से कहा कि यह अशुद्ध पढ़ा जा रहा है। अगर आप इजाज़त दें तो मैं इनको ठीक से पढ़ दूं। जज की अनुमति मिलते ही उन्होंने अपने हाथ का लिखा कागज़ निकाल कर बिना अटके शुद्ध ढंग से उन अरबी में लिखे गये नज़ीरों को पढ़ कर सुना दिया।नागरी ..

समय की पाबंदी- तरुण के.साहू

बात साबरमती आश्रम में गांधी जी के प्रवास के दिनों की है। एक दिन एक गाँव के कुछ लोग बापू के पास आए और उनसे कहने लगे, "बापू कल हमारे गाँव में एक सभा हो रही है, यदि आप समय निकाल कर जनता को देश की स्थिति व स्वाधीनता के प्रति कुछ शब्द कहें तो आपकी कृपा होगी।..

उपयोगिता

एक राजा था। उसने आज्ञा दी कि संसार में इस बात की खोज की जाय कि कौन से जीव-जंतु निरुपयोगी हैं। बहुत दिनों तक खोज बीन करने के बाद उसे जानकारी मिली कि संसार में दो जीव जंगली मक्खी और मकड़ी बिल्कुल बेकार हैं। राजा ने सोचा, क्यों न जंगली मक्खियों और मकड़ियों..

अहंकार की गति-रतनचंद जैन

एक मूर्तिकार उच्चकोटि की ऐसी सजीव मूर्तियाँ बनाता था, जो सजीव लगती थीं। लेकिन उस मूर्तिकार को अपनी कला पर बड़ा घमंड था। उसे जब लगा कि जल्दी ही उसक मृत्यु होने वाली है तो वह परेशानी में पड़ गया। यमदूतों को भ्रमित करने के लिये उसने एकदम अपने जैसी दस मूर्..

अपना अपना स्वभाव-सीमा खुराना

एक बार एक भला आदमी नदी किनारे बैठा था। तभी उसने देखा एक बिच्छू पानी में गिर गया है। भले आदमी ने जल्दी से बिच्छू को हाथ में उठा लिया। बिच्छू ने उस भले आदमी को डंक मार दिया। बेचारे भले आदमी का हाथ काँपा और बिच्छू पानी में गिर गया। भले आदमी ने बिच्छू को ड..

महापुरूषों के जीवन कभी भी एक दिन में तैयार नहीं होते

ईश्वरचंद विद्यासागर के बचपन की यह एक सच्ची घटना है । एक सवेरे उनके घर के द्वार पर एक भिखारी आया । उसको हाथ फैलाये देख उनके मन में करुणा उमड़ी । वे तुरंत घर के अंदर गए और उन्होंने अपनी माँ से कहा कि वे उस भिखारी को कुछ दे दें । माँ के पास उस समय कुछ भी नह..

देव या दानव

आचार्य विनोबा भावे के बचपन का प्रसंग है  उनके घर के आँगन में पपीते का वृक्ष था l वे उसको प्रतिदिन पानी से सींचते थे l जब उनमे कच्चे फल आने शुरू हुए उनका बालमन उन्हें खाने को हुआ l माँ ने कहा “ बेटे अभी नहीं ! कच्चे फल नहीं खाए जाते l” लम्बी प्रतीक्षा के बाद फल पके l उन्हें तोडा गया, अच्छी तरीके से काटे हुए पपीते की फांकों को संवार कर थाल में सजाया गया l विनोबा के मन में अपनी मेहनत के फल चखने की अत्याधिक उत्सुकता थी l विनोबा जब पपीता खाने लगे तो माँ ने कहा विनिया ! तुम देव बनना चाहते ..

19 जनवरी / प्रेरक प्रसंग – क्रांतिवीर निर्मलकांत राय जी

देश की स्वाधीनता के लिए गांधी जी के नेतृत्व में जहां हजारों लोग अहिंसक मार्ग से सत्याग्रह कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर क्रांतिवीर हिंसक मार्ग से अंग्रेजों को भगाने के लिए प्रयासरत थे l वे अंग्रेज अधिकारियों के साथ ही उन भारतीय अधिकारियों को भी दंड देते थे, जो..

कुछ करुणा-कुछ जीवट-यही है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

  कृतिरूप संघ दर्शन नागालेंड के मगुलोंग गाँव में एक बैठक संपन्न होने के बाद कुछ संघ स्वयंसेवक गाँव के लोगों से मिलने निकले ! ऐसे पहाडी प्रवासों में कार्यकर्ता कुछ प्राथमिक दवाईयां भी साथ रखते थे, जो गाँव के बीमार लोगों के उपचार में काम आती थीं ! ऐसे में उन लोगों को एक बुखार ग्रस्त वृद्ध माँ मिलीं ! साथ के नागा कार्यकर्ता ने पूछताछ कर बुखार उतारने वाली दस गोलियों की एक पत्ती उन्हें दी ! वृद्धा बोलीं, मुझे इतनी गोलियां नहीं चाहिए, पांच गोलियां पर्याप्त होंगी ! जबाब में कार्यकर्ता ने कहा, ..

"स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुडी प्रेरणादायक घटनाएँ"

स्वामी विवेकान्द जी के जीवन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है l उन्होंने अपने जीवन में कई उत्कृष्ठ  कार्य किये l पुनर्जागरण के लिए पूरे भारत का भ्रमण किया और अपने देश कि संस्कृति ,अध्यात्म और धर्म के प्रचार के लिए विदेश में भी रहे l स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से जुडी कुछ घटनाएँ हैं जो बहुत ही प्रेरणादायक हैl पूना प्रवास के दौरान स्वामी विवेकानंद जी के साथ  एक विलक्षण घटना घटी, जिससे उनके विराट व्यक्तित्व का परिचय मिलता हैl गाड़ी में स्वामीजी को द्वितीय श्रेणी से भ्रमण करते देख कर कुछ शिक्षित ..

मेघालय के क्रांतिवीर उक्यांग नागवा बलिदान दिवस – 30 दिसम्बर

उक्यांग नागवा मेघालय के एक क्रान्तिकारी वीर थे। 18 वीं शती में मेघालय की पहाड़ियों पर अंग्रेजों का शासन नहीं था। वहाँ खासी और जयन्तियाँ जनजातियाँ स्वतन्त्र रूप से रहती थीं। इस क्षेत्र में आज के बांग्लादेश और सिल्चर के 30 छोटे-छोटे राज्य थे। इनमें से एक ..

29 दिसम्बर बलिदान दिवस – धौलाना के अमर बलिदानी

क्रांतिकारी धन सिंह गुर्जर   भारत के स्वाधीनता संग्राम में मेरठ की 10 मई, 1857 की घटना का बड़ा महत्व हैl इस दिन गाय और सूअर की चर्बी लगे कारतूसों को मुंह से खोलने से मना करने वाले भारतीय सैनिकों को हथकड़ी-बेड़ियों में कसकर जेल में बंद कर दिया गयाl जहां-जहां यह समाचार पहुंचा, वहां की देशभक्त जनता तथा भारतीय सैनिकों में आक्रोश फैल गयाl मेरठ पुलिस कोतवाली में उन दिनों धनसिंह गुर्जर कोतवाल थेl वे परम देशभक्त तथा गौभक्त थेl अपने संपर्क के गांवों में उन्होंने यह समाचार भेज दियाl उनकी योजनानुसार ..

ऐसे थे अपने दीनदयाल जी-सुशील कुमार

यह रोचक घटना उस समय की है जब पं. दीनदयाल उपाध्याय आगरा में एम. ए. (अंग्रेजी साहित्य) के छात्र थे l इस घटना से उनकी सरलता ,सहजता एवं प्रमाणिकता प्रकट होती है l आज के युवा इस से बहुत कुछ सीख सकते हैं l 45-50 साल पहले तक एक पैसे का सिक्का भी चलन में था l ये सिक्के तांबे के बने होते थे l एक बड़ा सिक्का जिसमे काफी तांबा लगता था फिर उसमे एक गोल छेद करके उसका वजन कम किया गया l जो बड़ा और वजनदार सिक्का था ,जिसे डबली या डबल पैसा भी कहा जाता था ,वह जब घिस जाता था ,दुकानदार उसे खोटा पैसा कहकर लौटा देते थे ..

इतिहास स्मृति -कोटली के अमर बलिदानी "स्वयंसेवक"

हंस के लिया है पाकिस्तान, लड़ के लेंगे हिन्दुस्तान’ की पूर्ति के लिए नवनिर्मित पाकिस्तान ने वर्ष 1947 में ही कश्मीर पर हमला कर दिया था. देश रक्षा के दीवाने संघ के स्वयंसेवकों ने उनका प्रबल प्रतिकार किया. उन्होंने भारतीय सेना, शासन तथा जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरिसिंह को इन षड्यन्त्रों की समय पर सूचना दी. इस गाथा का एक अमर अध्याय 27 नवम्बर, 1948 को कोटली में लिखा गया, जो इस समय पाक अधिकृत कश्मीर में है. युद्ध के समय भारतीय वायुयानों द्वारा फेंकी गयी गोला-बारूद की कुछ पेटियां शत्रु सेना क्षेत्र ..

स्व. लाल बहादुर शास्त्री जी की महानता

भारत में बहुत कम लोग ऐसे हुए हैं जिन्होंने समाज के बेहद साधारण वर्ग से अपने जीवन की शुरुआत कर देश के सबसे पड़े पद को प्राप्त किया ! चाहे रेल दुर्घटना के बाद उनका रेल मंत्री के पद से इस्तीफ़ा हो या 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनका नेतृत्व या फिर उनका दिया 'जय जवान जय किसान' का नारा, लाल बहादुर शास्त्री ने सार्वजनिक जीवन में श्रेष्ठता के जो प्रतिमान स्थापित किए हैं, उसके बहुत कम उदाहरण मिलते हैं ! उनके जीवन से जुड़े कुछ नायाब पहलू - स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाला लाजपतराय ने सर्वेंट्स ऑफ़ ..