आज की अभिव्यक्ति

आज की अभिव्यक्ति

जिंदगी में हमें बने बनाए रास्ते नहीं मिलते हैं, जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए हमें खुद अपने रास्ते बनाने पड़ते हैं-स्वामी विवेकानंद..

Today's Expression

खड़े हो जाओ, और हिम्मत करके अपनी सारी ज़िम्मेदारी खुद ले लो. यह तय करो कि अब से अपनी असफलता के लिए किसी और को दोषी नहीं ठहराओगे. न किसी और के भरोसे कोई काम करने की सोचोगे…. तभी तुम अपने भाग्य निर्माण खुद कर पाओगे और तुम्हारा भविष्य तभी उज्ज्वल होगा. ..

आज की अभिव्यक्ति

लोग तुम्हारी प्रशंसा करें या आलोचना, तुम्हारे पास धन हो या नहीं हो, तुम्हारी मृत्यु आज हो या बड़े समय बाद हो, तुम्हें पथभ्रष्ट कभी नहीं होना चाहिए.-स्वामी विवेकानंद..

आज की अभिव्यक्ति

बीज की एक इकाई विभिन्न रूपों में प्रकट होती है – जड़ें, तना, शाखाएं, पत्तियां, फूल और फल. इन सबके रंग और गुण अलग-अलग होते हैं. फिर भी बीज के द्वारा हम इन सबके एकत्व के रिश्ते को पहचान लेते हैं-पंडित दीनदयाल उपाध्याय  ..

आज की अभिव्यक्ति

जब तक जीवित हो तब तक अपने और दूसरों के अनुभवों से सीखते रहना चाहिए. क्योंकि अनुभव सबसे बड़ा गुरु होता है...

आज की अभिव्यक्ति

जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो, ठीक उसी समय पर उसे करना ही चाहिये, नहीं तो लोगो का विश्वास उठ जाता है.-स्वामी विवेकानंद..

आज की अभिव्यक्ति

धर्म एक बहुत व्यापक अवधारणा है जो समाज को बनाए रखने के जीवन के सभी पहलुओं से संबंधित है-पंडित दीनदयाल उपाध्याय ..

आज की अभिव्यक्ति

स्वतंत्र होने का साहस करो, जहाँ तक तुम्हारे विचार जाते हैं वहां तक जाने का साहस करो, और उन्हें अपने जीवन में उतारने का साहस करो-स्वामी विवेकानंद..

आज की अभिव्यक्ति

विश्व एक व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं-स्वामी विवेकानंद ..

आज की अभिव्यक्ति

ज्ञान स्वयं में वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका आविष्कार करता है-स्वामी विवेकानंद ..

आज की अभिव्यक्ति

एक राष्ट्र लोगों का एक समूह होता है जो एक लक्ष्य, एक आदर्श, एक मिशन’ के साथ जीते हैं और एक विशेष भूभाग को अपनी मातृभूमि के रूप में देखते हैं. यदि आदर्श या मातृभूमि  दोनों में से किसी का भी लोप हो तो एक राष्ट्र संभव नहीं हो सकता.-पंडित दीनदयाल उपाध्याय..

आज की अभिव्यक्ति

दुनियाँ में 3 तरह के लोग पाये जाते हैं , स्वार्थी , नि:स्वार्थी और परमार्थी। कुछ का साथ विधि से तय है और कुछ विवेक से तय करने होते हैं। शिशु स्वार्थ का प्रथम अनुगामी और माँ नि:स्वार्थ की शिखर पताका प्रतीत होती है। सामाजिक परिष्कार और अनुभूतियाँ व्यक्ति ..

आज की अभिव्यक्ति

हेगेल ने थीसिस, एंटी थीसिस और संश्लेषण के सिद्धांतों को आगे रखा, कार्ल मार्क्स ने इस सिद्धांत को एक आधार के रूप में इस्तेमाल किया और इतिहास और अर्थशास्त्र के अपने विश्लेषण को प्रस्तुत किया, डार्विन ने  योग्यतम की उत्तरजीविता के सिद्धांत को जीवन का ..

आज की अभिव्यक्ति

जब स्वाभाव को धर्म के सिद्धांतों के अनुसार बदला जाता है, तो हमें संस्कृति और सभ्यता प्राप्त होते हैं- पंडित दीनदयाल उपाध्याय  ..

कानून का पालन

नागपुर की घटना है। कृष्ण माधव घटाटे गुरु जी मा. स. गोलवरकर को कार में कहीं ले जा रहे थे। कार पटवर्धन मैदान के निकट चौराहे के पास पहुँची। यह चौराहा काफ़ी छोटा है। उस समय चौराहे पर यातायात पुलिस नहीं थी। इसलिए कृष्ण माधव घटाटे ने चौराहे का चक्कर न लगाते ह..

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जब तक जीना, तब तक सीखना, अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है -स्वामी विवेकानंद..

आज की अभिव्यक्ति

जब अंग्रेज हम पर राज कर रहे थे, तब हमने उनके विरोध में गर्व का अनुभव किया, लेकिन हैरत की बात है कि  अब  जबकि अंग्रेजों चले गए हैं, पश्चिमीकरण प्रगति का पर्याय बन गया है-पंडित दीनदयाल उपाध्याय    ..

आज की अभिव्यक्ति

स्वतंत्र  होने  का  साहस  करो। जहाँ  तक  तुम्हारे  विचार  जाते  हैं वहां  तक  जाने का  साहस  करो , और  उन्हें  अपने  जीवन  में उतारने  का  साहस  करो- स्वाम..

आज की अभिव्यक्ति

लोग तुम्हारी स्तुति करें या निन्दा, लक्ष्य तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहांत आज हो या युग में, तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न हो-स्वामी विवेकानंद ..

आज की अभिव्यक्ति

हम जितना ज्यादा बाहर जायें और दूसरों का भला करें, हमारा ह्रदय उतना ही शुद्ध होगा, और परमात्मा उसमे बसेंगे-स्वामी विवेकानंद ..

आज की अभिव्यक्ति

जिस  क्षण  मैंने  यह  जान  लिया  कि  भगवान  हर एक  मानव  शरीर  रुपी  मंदिर में  विराजमान  हैं , जिस  क्षण  मैं  हर  व्यक्ति  के  सामने  श्रद्धा  ..

आज की अभिव्यक्ति

"ऐसी कोई भी राष्ट्रीय आकांक्षा नहीं है, जो संगठन द्वारा प्राप्त न होती हो। हम लोग हमेशा राष्ट्रीयता की दृष्टि से ही विचार करते हैं। चौबिसों घंटे वही राष्ट्रीयता के विचार हमारे मनों मे गूंजते  रहे, इसी लिये संघ का नाम राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ रखा गया ह..

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विश्व एक व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं-स्वामी विवेकानंद ..

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"हमें अतीत के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए, न ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए। विवेकवान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में ही जीते हैं।”  –चाणक्य ..

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उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो, तुम तत्व नहीं हो, ना ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो-स्वामी विवेकानंद ..

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नैतिकता के सिद्धांतों को कोई एक व्यक्ति नहीं बनाता है, बल्कि इनकी खोज की जाती है-पंडित दीनदयाल उपाध्याय ..

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सतुंलित दिमाग जैसी कोई सादगी नही,संतोष जैसा कोई सुख नही,लोभ जैसी कोई बीमारी नही और दया जैसा कोई पुण्य नही है- चाणक्य..

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बड़े-बड़े दिग्गज बह जाएंगे। छोटे-मोटे की तो बात ही क्या है! तुम लोग कमर कसकर कार्य में जुट जाओ, हुंकार मात्र से हम दुनिया को पलट देंगे। अभी तो केवल मात्र प्रारम्भ ही है। किसी के साथ विवाद न कर हिल-मिलकर अग्रसर हो यह दुनिया भयानक है, किसी पर विश्वास..

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जब स्वाभाव को धर्म के सिद्धांतों के अनुसार बदला जाता है, तो हमें संस्कृति और सभ्यता प्राप्त होते हैं.-पंडित दीनदयाल उपाध्याय ..

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भारतीय संस्कृति की मूलभूत विशेषता है कि यह जीवन को एक एकीकृत रूप में देखती है- पंडित दीनदयाल उपाध्याय ..

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तुम्हारे ऊपर जो प्रकाश है, उसे पाने का एक ही साधन है – तुम अपने भीतर का आध्यात्मिक दीप जलाओ, पाप ऒर अपवित्रता स्वयं नष्ट हो जायेगी। तुम अपनी आत्मा के उददात रूप का ही चिंतन करो-स्वामी विवेकानंद..

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भारतीय संस्कृति की मूलभूत विशेषता है कि यह एक एकीकृत समग्र रूप से जीवन पर दिखती है—पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ..

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जो व्यक्ति शक्ति न होने पर मन में हार नहीं मानता उसे संसार की कोई भी ताकत परास्त नहीं कर सकती- चाणक्य..

आज की अभिव्यक्ति

स्वतंत्र होने की हिम्मत करो. तुम्हारे विचार तुम्हें जहाँ तक ले जाते हैं वहां तक जाने की हिम्मत करो, और अपने विचारों को जीवन में उतारने की हिम्मत करो.  ..

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आलसी मनुष्य का वर्तमान और भविष्य नही होता-चाणक्य   भोपाल (विसंकें) l चाणक्य की कही इन पंक्तियों में काफी गहराई है कि 'आलसी मनुष्य का वर्तमान और भविष्य नही होता-चाणक्य' आलस्य मनुष्य का शत्रु होता है l और जो भी व्यक्ति आलस्य करता है वह कभी सफल नहीं हो पाता l अतः हमेशा सजग रहें और इस आलस्य रुपी शत्रु को अपने से दूर रखें l ..

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उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो, तुम तत्व नहीं हो, ना ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो -स्वामी विवेकानंद..

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पुरुषार्थ से दरिद्रता का नाश होता है, जप से पाप दूर होता है, मौन से कलह की उत्पत्ति नहीं होती और सजगता से भय नहीं होता – चाणक्य..

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एक विचार लो । उससे अपना जीवन बनाओ – उसके बारे में सोचो, उसका सपना देखो, उस विचार पर जीवन जियो । आपके दिमाग, मांसपेशियां, नसें, शरीर के हर हिस्से उस विचार से भरे हों और दूसरे हर विचार को अकेला छोड़ दो । यह सफलता का रास्ता है ।..

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मेहनत करने से दरिद्रता नहीं रहती, धर्म करने से पाप नहीं रहता, मौन रहने से कलह नहीं होता | - चाणक्य..

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जब तक हम खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक हम भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते. – स्वामी विवेकानंदfभगवान् पे, ईश्वर पे भरोसा तभी होगा,जब हम खुद पर भरोसा करें l अतः खुद पर विश्वास करे तभी आप ईश्वर पर भी पूरे मन से विश्वास कर पायेंगे l ..

आज की अभिव्यक्ति

"मन का संकल्प और शरीर का पराक्रम यदि किसी काम में पूरी तरह लगा दिया जाए तो सफलता मिल कर रहेगी । - स्वामी विवेकानंद" भोपाल (विसंकें) l वाकई स्वामी विवेकानंद जी के ये विचार प्रभावशाली हैं l अगर हम कोई भी कार्य करना चाहते हैं तो हमें अपने मन में एक संकल्प करना होगा l ये संकल्प ही वह कारक है जो सफलता तक आपको ले जायेगा l अपने उद्देश्य के लिए किया गया संकल्प और शरीर का पराक्रम याने कि उस कार्य को, उस संकल्प को निभाने की पूरी निष्ठा आपको सफलता तक ले जाएगी l इतिहास गवाह है आज तक जितने भी सफल व्यक्ति रहे ..

विचार -कण

" हमारा कार्य सम्पूर्ण हिन्दू समाज के लिए होने के कारण उसके किसी भी अंग की उपेक्षा करने से काम नहीं चलेगा l समस्त हिन्दू बंधुओं से फिर वे किसी भी श्रेणी के क्यों न हों,हमारा व्यवहार समान रूप से प्रेम का होना चाहिए । किसी भी हिन्दू बंधू को निम्न समझकर दुत्..