व्यक्ति परिचय

अनुशासित स्वयंसेवक अनंत रामचंद्र गोखले जी

नई दिल्ली. अनुशासन के प्रति अत्यन्त कठोर श्री अनंत रामचंद्र गोखले जी का जन्म 23 सितम्बर, 1918 (अनंत चतुर्दशी) को म.प्र. के खंडवा नगर में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था. ‘’ संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी के पिता श्री सदाशिव गोलवलकर जब खंडवा में अध्यापक थे, तब वे उनके घर में ही रहते थे. नागपुर से इंटर करते समय गोखले जी धंतोली सायं शाखा में जाने लगे. एक सितम्बर, 1938 को वहीं उन्होंने प्रतिज्ञा ली. इंटर की प्रयोगात्मक परीक्षा वाले दिन उन्हें सूचना मिली कि डॉ. हेडगेवार ने सब स्वयंसेवकों ..

श्री हल्देकर जी का संघ जीवन से बड़ा पुरुषार्थ क्या हो सकता है ? – सुरेश भय्या जी जोशी

केवल युद्ध करना ही पुरुषार्थ नहीं होता है, अपितु अंतःकरण की सभी भावनाओं को, संपूर्ण जीवन को केवल एक ध्येय के लिए समर्पित करना, यह भी पुरुषार्थ होता है l श्री रामभाऊ हल्देकर जी, जब 1954 में संघ के प्रचारक निकले, वह समय संघ के लिए सब प्रकार से विरोध का कालखण्ड था l ऐसी परिस्थितियों में जो संघ के प्रचारक निकले, उससे बड़ा पुरुषार्थ क्या हो सकता है? जो जो बंधु श्री हल्देकर जी के संपर्क में आए, उनको संघ समझाने के लिए किसी बौद्धिक, चर्चा की आवश्यकता नहीं हुई, क्योंकि श्री हल्देकर जी का जीवन ही संघ जीवन के ..

19 फरवरी /जन्मदिवस गोलवलकर जी

१९ फरवरी १९०६ माघ कृष्ण विजया एकादशी को जन्मे श्री गुरू जी के पिता जी का नाम सदाशिवराव तथा माँ का नाम लक्ष्मी बाई था | कोंकण महाराष्ट्र के गोलवली नामक स्थान के मूल निवासी होने के कारण आगे चलकर वे गोलवलकर कहलाये | वे अपने माता पिता की ९ संतानों में से एकमात्र जीवित संतान थे | बचपन से मातृभूमि भक्ति के संस्कार माँ से उन्हें मिले | एक बार जमीन में कील ठोकते देखकर माँ ने कहा जिस प्रकार मैं तुम्हें जन्म देने वाली माँ हूँ उसी प्रकार भूमि भी हम सबकी माँ है | पिताजी पहले डाकतार विभाग की सेवा में थे, परन्तु ..

17 फरवरी / बलिदान दिवस – सह्याद्रि का शेर वासुदेव बलवंत फड़के

घटना वर्ष 1870 की है l एक युवक तेजी से अपने गांव की ओर भागा जा रहा था l उसके मुंह से मां-मां….शब्द निकल रहे थे, पर दुर्भाग्य कि उसे मां के दर्शन नहीं हो सके l उसका मन रो उठा l लानत है ऐसी नौकरी पर, जो उसे अपनी मां के अन्तिम दर्शन के लिए भी छुट्टी न मिल सकी l वह युवक था वासुदेव बलवन्त फड़के l लोगों के बहुत समझाने पर वह शान्त हुआ, पर मां के वार्षिक श्राद्ध के समय फिर यही तमाशा हुआ और उसे अवकाश नहीं मिला l अब तो उसका मन विद्रोह कर उठा l वासुदेव का जन्म चार नवम्बर, 1845 को ग्राम शिरढोण (पुणे) में ..

23 दिसंबर - स्वामी श्रद्धानंद बलिदान दिवस

समाज-जीवन  के विभिन्न  क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले स्वामी श्रद्धानंद का जन्म १८५६ में पंजाब के जालंधर जिले के तलवन  नामक कस्बे में हुआ था lजीवन की  आरंभिक अवस्था में उनका सामना धर्म के नाम से चलने वाली कुरीतीयों से हुआ जिससे उनका मन अनास्था से भर उठा और वो नास्तिक हो गए lपर आगे चलकर जब वो आर्य समाज के दयानंद सरस्वती के संपर्क में आये तो उनका झुकाव पुनः धर्म की ओर हो उठा l फिर तो आगे चलकर वेदों के अपने अध्ययन और धर्म का अपने जीवन में प्रत्यक्ष आचरण के बल पर उनकी ख्याति ..

अमर बलिदानी-अशफाक उल्ला खां

‘काकोरी कांड’ में फाँसी पाने वाले अशफाक उल्ला खाँ का जन्म 1900 ई0 में शाहजहाँपुर (उ.प्र.) में हुआ था l युवावस्था में उनकी मित्रता रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ से हुई, जो फरार अवस्था में शाहजहाँपुर के आर्य समाज मन्दिर में रह रहे थे l पहले ..

संघ के पूर्व सरसंघचालक पूज्य बालासाहेब देवरस

संघ के तृतीय सरसंघचालक बालासाहब का पूरा नाम था मधुकर दत्तात्रय देवरस | उनका जन्म 11 दिसंबर 1915 को नागपुर में हुआ | पिता दत्तात्रय उपाख्य भैय्याजी देवरस महसूल विभाग में शासकीय अधिकारी थे | उनके पांच बेटे और चार बेटियों में बालासाहब चौथी संतान थे | बालासाहब को घर में सब लोग बाळ (बाल) कहा करते थे | इसीलिए आगे चलकर बाला साहब नाम प्रचलित हुआ | देवरस घराना मूलतः आंध्रप्रदेश के रहने वाले थे, मूल नाम देवराजू के कारण नागपुर आने पर देवरस हो गए |डाक्टर जी ने 1925 में संघ की शाखा प्रारंभ की | बारह वर्ष की आयु ..

सन्यासी योद्धा - प.पू. श्री माधव सदाशिवराव गोलवलकर

  सन्यासी योद्धा - प.पू. श्री माधव सदाशिवराव गोलवलकर       श्री गुरू जी कहते थे कि डाक्टर साहब द्वारा दिए गए मन्त्र की व्याख्या करने बाले हिंदू समाज के संगठन से ही भारत का कल्याण होगा ! डाक्टर साहब और श्री माधव सदाशिव राव गोलवलकर “गुरूजी”, दोनों में भिन्नता थी ! एक हृष्टपुष्ट तो दूसरे साधुसंत, एक क्रांतिकारी तो दूसरे आध्यात्मिक ! डाक्टर साहब ने राजनैतिक, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा क्रांतिकारियों के साथ काम करते हुए संघ की स्थापना की ! गुरूजी ने संघ चालक बनने ..

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आद्य सरसंघचालक परमपूज्य डॉ. हेडगेवार - पूज्य श्री सुदर्शन जी

आद्य सरसंघचालक   आदर्शों का बारम्बार स्मरण नई दृष्टि, नया उत्साह देता है ! शालीवाहन ने मिट्टी के हाथी, घोड़े, रथ, सिपाही बनाए, फिर उनमें प्राण फूंके ! डाक्टर साहब ने भी मृतप्राय हिन्दू समाज को प्राणवान करने का बीडा उठाया ! आंध्र प्रदेश की तहसील बोधन का कन्द्कुर्ती गाँव जहां हरिद्रा बंजारा गोदावरी नदी के तट पर हेडगेवार परिवार रहता था ! जैसे कर बैसे भर ! विद्या प्राप्त कर दान करना सबसे पवित्र माना जाता है ! परिवार का यही पुस्तैनी कार्य ! परिवार की एक शाखा नागपुर आकर बसी ! बहीं बलीराम रामचंद्र ..

नानाजी देशमुख

ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने को स्वप्न आँखों में सँजोये नाना जी ने अपना जीवन भारत के लोगों और तत्पश्चात मृत शरीर भी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को दान कर दिया ! उन्होने भारत की ऋषि परंपरा का अनुपम उदाहरण हमारे सामने रखा |..

प्रो. राजेन्द्र सिंह उपाख्य "रज्जू भैय्या"

प्रा. राजेन्द्र सिंह जी की जीवन यात्रा आम आदमी को ईमानदारी, प्रामाणिकता, ध्येयनिष्ठा, कर्मठता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाली है | उनकी जीवन सरिता के दो प्रवाह हैं | पहला अध्यापक और दूसरा संघ कार्यकर्ता | 20 वर्ष की तरुणावस्था में वे प्रयाग विश्ववि..

भारतमाता को सर्वस्व समर्पित करने वाले अनन्य देशभक्त वीर सावरकर - मनमोहन आर्य

जब हम देशभक्त महापुरूषों को याद करते हैं तो उनमें से एक अग्रणी नाम वीर विनायक दामोदर सावरकर जी का आता है। सावरकर जी ने देश भक्ति के एक नहीं अनेको ऐसे कार्य किये जिससे यह देश हमेशा के लिए उनका ऋणी है। वह श्रद्धेय माता राधा बाई धन्य है जिसने वीर सावरकर जी..

श्री सुदर्शन जी (पूर्व सरसंघचालक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ)

अंग्रेजों का शासनकाल था | तमिलनाडु और केरल की सीमा पर स्थित कर्नाटक के तिरुनेलवेल्ली जिले के शेन्कोटे नामक स्थान पर कौशिक गोत्र के संकेती तमिल ब्राह्मण परिवार में जन्मे सुदर्शन जी के पूर्वज 250 साल पहले कर्नाटक के कुप्पहर्ली गाँव में आकर बसे थे | इस प्र..