कृषि

लेव्ही से समर्थन मूल्य, नजराना से शुकराना तक - भरतचन्द्र नायक

भोपाल(विसंके). एक समय था जब किसान को उम्मीद थी कि जमीदारी के शोषण से छुटकारा मिलेगा। जमीदारी उनमूलन से छुटकारा तो मिल गया लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने किसान की फसल के उत्पादन पर जबरिया लेव्ही लगा दी और लेव्ही न देने वाले किसान को दंड का भागी घोषित कर दिया।..

यहाँ तोहफे में दिए जाते हैं देशी बीज

भोपाल(विसंके). हाल ही में एक वैश्विक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया में जैविक कृषि करने वाला हर तीसरा किसान भारतीय है. यह इस बात का संकेत है कि भारत में जैविक कृषि का चलन तेजी से बढ़ रहा है. दरअसल, हाइब्रिड बीजों की भरमार, रसायनों का अंधाधुंध उपय..

किसानों की मतलब परस्‍ती पर क्‍यों नहीं उनको धिक्‍कारना चाहिए ? डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). कभी देश में अन्‍न कम पैदा हुआ करता था तब देश के तत्‍कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्‍त्रीजी ने जय जवान के साथ जय किसान का नारा देते हुए हर भारतीय को एक दिन का उपवास सप्‍ताह में करने का आग्रह किया था। देश ने उसे माना और हर भ..

किसान सरोकार शीर्ष पर सियासत के राडार पर - -भरतचन्द्र नायक

भोपाल(विसंके). भारत कृषि प्रधान देश है। आर्थिक उदारीकरण में खाद्यान्न को भले ही कमोडिटी मान लिया गया हो लेकिन देश के जनपदीय अंचल में अन्न को दैवीय वरदान माना गया है। अन्न उत्पादक किसानों को अन्नदाता के रूप में सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से देश ने हरित क्रां..

कृषि भूमि सुधार का आधार जैविक खेती - सुरेश हिन्दुस्थानी

वर्तमान में देश में इस बात के लिए गंभीरता पूर्वक चिंतन होने लगा है कि रासायनिक खादों के चलते कृषि भूमि में जो हानिकारक बदलाव आए हैं, उसे कैसे दूर किया जाए। इस बारे में केन्द्र सरकार और राज्यों की सरकारें भी अपने स्तर पर किसानों को इस बात के लिए जागृत कर र..

‘‘ग्रामीण भारत के ख्वाबों की नई इबारत, किसान को सूखा से मुक्ति’’- भरतचन्द्र नायक

भोपाल(विसंके). हमने ग्रामीण भारत की बुनियादी जरूरतों पर बेरूखी बरती. महत्वाकांक्षी योजनाओं को गले लगाया. इनमें उदारीकरण ने तड़का लगा दिया. आर्थिक उदारीकरण के साथ गांव, गरीब और किसान का चेहरा आंकड़ों के जंगल में खो गया. बाजारवाद परवान चढ़ा जिससे गांवों की अर्..

सहजन की खेती में मुनाफा ही मुनाफा

सहजन की खेती लगाने के 10 महीने बाद एक एकड़ में किसान एक लाख रूपए कमा सकते हैं l कम लागत में तैयार होने वाली इस फसल की खासियत ये है कि इसकी एक बार बुवाई के बाद चार साल तक बुवाई नहीं करनी पड़ती है l साथ ही सहजन एक औषधीय फसल है l गुजरात के मोरबी जिले से पूर..

कृषि -धान से खुशहाली की ओर

साभार-पाञ्चजन्य मानसून की आहट यानी धान रोपाई का मौसम। भारत चावल उत्पादन और निर्यात में  अग्रणी देशों में है। आज भारत में चावल की उन्नत किस्में तैयार की जा रही हैं। बाजार की मांग के मुताबिक इनमें खुशबू और स्वाद तो है ही, इनसे किसानों को अच्छी कीमत ..