सरसंघचालक जी ने किया संघ के नये साहित्य का विमोचन

सरसंघचालक जी ने किया संघ के नये साहित्य का विमोचन

विसंके (जयपुर)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने अपने राजस्थान प्रवास के पांचवे (बीते 17 सितम्बर को) दिन केशव विद्यापीठ जामडोली में चले रहे खण्ड कार्यवाह अभ्यास वर्ग में पूण्य भूमि भारत और संस्कार कथा नामक दो नई पुस्तको का विमोचन

एकात्मता और परिवार भाव ही है भारतीय संस्कृति का वैश्विक अवदान-मुकुल कानिटकर

एकात्मता और परिवार भाव ही है भारतीय संस्कृति का वैश्विक अवदान-मुकुल कानिटकर

एकात्मता और परिवार भाव ही है भारतीय संस्कृति का वैश्विक अवदान। भारतीय शब्द हमारी संस्कृति का परिचायक है। आजादी के समय कुछ लोगों ने देश का नाम आधिकारिक रूप से ‘ भारत ’ रखने के लिए कई प्रयत्न किये लेकिन अंग्रेजपरस्त लोगों ने साथ नहीं दिया। हम हम

अनुशासित स्वयंसेवक अनंत रामचंद्र गोखले जी

नई दिल्ली. अनुशासन के प्रति अत्यन्त कठोर श्री अनंत रामचंद्र गोखले जी का जन्म 23 सितम्बर, 1918 (अनंत चतुर्दशी) को म.प्र. के खंडवा नगर में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था. ‘’ संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी के पिता श्री सदाशिव गोलवलकर जब खंडवा में अध्यापक थे, तब वे उनके घर में ही रहते थे. नागपुर से इंटर करते समय गोखले जी धंतोली सायं शाखा में जाने लगे. एक सितम्बर, 1938 को वहीं उन्होंने प्रतिज्ञा ली. इंटर की प्रयोगात्मक परीक्षा वाले दिन उन्हें सूचना मिली कि डॉ. हेडगेवार ने सब स्वयंसेवकों को तुरंत

  • ममता सरकार के तुष्टीकरण को न्यायालय ने दिखाया आईना-लोकेन्द्र सिंह

    ममता सरकार के तुष्टीकरण को न्यायालय ने दिखाया आईना-लोकेन्द्र सिंह

    माननीय न्यायालय में एक बार फिर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुष्टीकरण की नीति का सच सामने आ गया। ममता बनर्जी समाज को धर्म के नाम पर बाँट कर राजनीति करने वाले उन लोगों/दलों में शामिल हैं, जो अपने व्यवहार और राजनीतिक निर्णयों से घोर सांप्रदायिक हैं लेकिन, तब भी तथाकथित 'सेकुलर जमात' की झंडाबरदार हैं। मुहर्रम का जुलूस निकालने के लिए दुर्गा प्रतिमा विसर्जन पर प्रतिबंध लगाना, क्या यह सांप्रदायिक निर्णय नहीं था? क्या तृणमूल कांग्रेस सरकार के इस फैसले में तुष्टीकरण और वोटबैंक की बदबू नहीं आती? क्या य

    23 Sep 2017

  • देश पर कम होता ऋण भार : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

    देश पर कम होता ऋण भार : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

    ऋण को विकास के लिए जितना अधिक अपरिहार्य माना गया है, उतना ही लगातार इससे डूबे रहने को जनमानस में घोर विपत्‍ति‍कारक स्‍वीकार्य किया गया है। भारत पर आज दुनियाभर का कितना कर्ज है, यह जानकर जितनी अधिक चिंता होती है, वहीं इन दिनों

    16 Sep 2017

  • हिन्दी की अस्मिता का प्रश्न-लोकेन्द्र सिंह

    हिन्दी की अस्मिता का प्रश्न-लोकेन्द्र सिंह

    सर्वसमावेशी  भाषा होना हिन्दी का सबसे बड़ा सौन्दर्य है। हिन्दी ने बड़ी सहजता और सरलता से, समय के साथ चलते हुए कई बाहरी भाषाओं के शब्दों को भी अपने आंचल में समेट लिया है। पहले से ही समृद्ध हिन्दी का शब्द भण्डार और अधिक समृद्ध हो गया है। हिन्दी

    15 Sep 2017

  • आतंकियों के सहयोगी रोहिंग्याइयों के हमदर्द शाही इमाम

    आतंकियों के सहयोगी रोहिंग्याइयों के हमदर्द शाही इमाम

    बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला पूर्व से ही देश के समक्ष एक चुनौती बन कर खड़ा हुआ है. आसाम और अन्य कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में सामाजिक तानेबाने व स्थानीय शांति व्यवस्था के लिए घातक ख़तरा बन चुके ये घुसपैठिये तमाम प्रकार की आपराधिक व आतंकवादी गतिविधियों में

    14 Sep 2017

  • गौरी लंकेश हत्याकांड : जवाब माँगते कुछ सवाल

    गौरी लंकेश हत्याकांड : जवाब माँगते कुछ सवाल

    लोकतंत्र और सभ्य समाज में हत्या के लिए किंचित भी स्थान नहीं है। किसी भी व्यक्ति की हत्या मानवता के लिए कलंक है। चाहे वह सामान्य व्यक्ति हो या फिर लेखक, पत्रकार और राजनीतिक दल का कार्यकर्ता। हत्या और हत्यारों का विरोध ही किया जाना चाहिए। लोकतंत्र कि

    12 Sep 2017

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