बंगाल में हिंसा की राजनीति - डॉ. मयंक चतुर्वेदी

बंगाल में हिंसा की राजनीति - डॉ. मयंक चतुर्वेदी

आगामी 19 मई को लोकसभा चुनाव का अंतिम चरण समाप्त हो जाएगा। इस बार के चुनाव जिस तरह का संदेश पश्चिम बंगाल की राजनीति एवं ममता बनर्जी के शासन को लेकर दे रहे हैं, वह कम से कम देश के लोकतंत्रात्मक परिदृश्य में किसी काले धब्बे से कमतर नहीं है। यही कारण है कि निर्वाचन आयोग को वहां एक दिन पहले ही चुनाव प्रचार पर रोक लगाना पड़ा। भारत के चुनावी इतिहास में यह पहला मामला है। आइये जानते हैं कि आखिर इसका कारण क्या है?     ममता के राज में पश्चिम बंगाल जिस तरह से हिंसा की राजनीति से सुलग रहा है, उससे यह स

जनता को तय करना है किसे वोट दे – इंद्रेश कुमार

जनता को तय करना है किसे वोट दे – इंद्रेश कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार जी ने कहा कि सामाजिक और धार्मिक सौहार्द के साथ-साथ देश की प्रगति के लिए इस सरकार की वापसी जरूरी है. एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा भारत की आजादी में अहम योगदान का द

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निष्ठावान स्वयंसेवक बंसीलाल सोनी

संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री बंसीलाल सोनी का जन्म एक मई, 1930 को वर्तमान झारखंड राज्य के सिंहभूम जिले में चाईबासा नामक स्थान पर अपने नाना जी के घर में हुआ था। इनके पिता श्री नारायण सोनी तथा माता श्रीमती मोहिनी देवी थीं। इनके पुरखे मूलतः राजस्थान के थे, जो

  • आखिर साध्वी जी से परहेज़ क्यों है ?- डॉ. नीलम महेंद्र

    आखिर साध्वी जी से परहेज़ क्यों है ?- डॉ. नीलम महेंद्र

    साध्वी का विरोध करने वाले इस तथ्य को भी नजरअंदाज नहीं कर  सकते कि अगर साध्वी प्रज्ञा को अदालत ने आरोप मुक्त नहीं किया है तो इन 8 सालों में वो दोषी भी नहीं सिद्ध हुई। बल्कि ऐसे कोई सुबूत ही नहीं पाए गए जिससे उन पर मकोका लगे जिसके अंतर्गत उनक

    23 Apr 2019

  • जनता की अदालत में फैसला अभी बाकी है

    जनता की अदालत में फैसला अभी बाकी है

    कुछ समय पहले अमेरिका के एक शिखर के बेस बॉल खिलाड़ी जो कि वहाँ के लोगों के दिल में सितारा हैसियत रखते थे, उन पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप लगा। लेकिन परिस्थिति जन्य साक्ष्य के आभाव में वो अदालत से बरी कर दिए गए जबकि जज पूरी तरह आश्वस्त थे कि

    18 Apr 2019

  • देश-द्रोहियों के मताधिकार?

    देश-द्रोहियों के मताधिकार?

    चुनाव नजदीक आते ही विविध राजनैतिक दलों व नेताओं में वाकयुद्ध प्रारम्भ हो जाता है। एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए अनेक बार, शब्दों की सीमाएं, न सिर्फ संसदीय मर्यादाएं बल्कि, सामान्य आचार संहिता का भी उल्लंघन कर जाती हैं। राजनैतिक दलों के सिद्धांतों,..

    17 Apr 2019

  • चपरासी से राष्ट्रपति तक सब चौकीदार ही चौकीदार - नरेन्द्र सहगल

    चपरासी से राष्ट्रपति तक सब चौकीदार ही चौकीदार - नरेन्द्र सहगल

    एक ऊंचे विशालकाय पेड़ पर शहद से लबालब भरा हुआ मधुमक्खियों का एक बहुत बड़ा छत्ता लटक रहा था। एक अनाड़ी और अधकचरे दिमाग वाले बच्चे के मुंह में शहद की लार टपकने लगी। उसने अपनी औकात देखे बिना ही मधुमक्खियों की चौकीदारी में सुरक्षित शहद के उस छत्ते पर एक पत्थर दे

    28 Mar 2019

  • संघ की प्रतिनिधि सभा, भाग- 4 : संघ साधना का शंखनाद- राष्ट्रहित सर्वोपरि - नरेन्द्र सहगल

    संघ की प्रतिनिधि सभा, भाग- 4 : संघ साधना का शंखनाद- राष्ट्रहित सर्वोपरि - नरेन्द्र सहगल

    अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव मात्र खानापूर्ति की श्रेणी में नहीं आते। एक क्रमबद्ध प्रक्रिया और गहरे विचारमंथन के पश्चात पारित किए जाने वाले इन प्रस्तावों में जनसत्ता और राजसत्ता दोनों के लिए दिशानिर्देश निहित होता है। ये प्रस्ताव

    11 Mar 2019

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