वेदमंत्रों एवं शंखध्वनि के साथ हुआ ग्रामोदय मेले का शुभारम्भ

वेदमंत्रों एवं शंखध्वनि के साथ हुआ ग्रामोदय मेले का शुभारम्भ

नानाजी ने किया दीनदयाल जी के सपनों को साकार: रामनाथ कोविद विसंकें (भोपाल) l  चित्रकूट24.02.17 : भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट में आज चार दिवसीय ग्रामोदय मेले का शुभारंभ बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविद के करकमलों से हुआ । उदघाटन समारोह में श्री कोविद

कल 24 फरवरी को होगा चित्रकूट में ग्रामोदय मेला का शुभारम्भ

कल 24 फरवरी को होगा चित्रकूट में ग्रामोदय मेला का शुभारम्भ

पं. दीनदयाल उपाध्याय एवं राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख जन्मशताब्दी वर्ष विसंकें (भोपाल) l  चित्रकूट, 23 फरवरी: एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय एवं राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख जन्मशताब्दी वर्ष पर आयोजित किये जाने वाले बहुप्रतिक्षित ग्रामोदय मेला का शुभारम्भ 24 फरवरी को प्रातः 10 बजे होगा । उद्घाटन समारोह में बिहार के महामहिम राज्यपाल रामनाथ कोविंद, दीनदयाल शोध संस्थान के संरक्षक, मदनदास देवी, भारत सरकार के समाजकल्याण मंत्री, थावर चन्द्र गहलोत, मध्यप्रदेश के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राजेन्द्र शु

'भारत—बोध' सम्मेलन: भारतीय शिक्षा व कलाएं मनुष्य के सर्वांगीण विकास में सहायक

विसंकें(नई दिल्ली), 24 फरवरी— ब्रिटिश शासन काल से पहले भारत कहीं ज्यादा बेहतर शिक्षित था लेकिन अंग्रेजों ने हमारी शिक्षा व्यवस्था का ढांचा ध्वस्त कर दिया। प्राचीन काल में तक्षशिला जैसे ज्ञान के केंद्र सभी प्रमुख सभ्यताओं में आदान—प्रदान का कें

  • सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रति असहिष्णुता सेकुलरवाद का छद्म-भरतचन्द्र नायक

    सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रति असहिष्णुता सेकुलरवाद का छद्म-भरतचन्द्र नायक

    ‘‘सूख हाड़ ले जात सठ स्वान, निरखि मृगराज’’ लंपटीय तासीर सत्ता लोलुपों का स्वभाव आदि काल से व्यवहार में देखा सुना गया । सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से प्रेरित संगठन की प्रेरणा का यहीं जन्म होता है । अंगे्रजों ने बांटो और राज करो की मंशा से भारतीय समाज के विखंडन के बीज बोये । 1925 में राष्ट्र को एकता के सूत्र में गुंथित करने का अनुष्ठान आरंभ हुआ । समय ने करवट ली । भारत को आजादी मिली । लेकिन सत्ता में आने के साथ समाज को फिरकों में बांट कर तुष्टीकरण को परवान चढ़ाना सत्ता मठाध

    20 Feb 2017

  • अरुणाचल प्रदेश में घटती हिन्दू आबादी

    अरुणाचल प्रदेश में घटती हिन्दू आबादी

    अरुणाचल प्रदेश में हिंदू जनसंख्या के सन्दर्भ में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू के बयान पर कुछ लोग विवाद खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि उनका बयान एक कड़वी हकीकत को बयां कर रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि उनके बयान पर वो लोग हायतौबा मचा रहे हैं, जो खुद को पंथनिरपेक्षता का झंडाबरदार बताते हैं। हिंदू आबादी घटने के सच पर विवाद क्यों हो रहा है, जबकि यह तो चिंता का विषय होना चाहिए। जनसंख्या असंतुलन आज कई देशों के सामने गंभीर समस्या है, लेकिन हमारे नेता इस गम्भीर चुनौती को भी क्षुद्र मानसिकता के साथ देख रहे हैं।

    17 Feb 2017

  • सेवा भारती की श्रम साधना : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

    सेवा भारती की श्रम साधना : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

    हिंदू चिंतन या कहें कि प्राचीन सनातन चिंतन के अनुसार सेवा का मतलब निस्वार्थ भाव से, पूजा भाव से, कर्तव्य भाव से उन सभी को सहयोग करना है, जिन्‍हें कि सहायता की आवश्‍यकता है। स्वामी विवेकानंद भी सेवा का यही अर्थ समझाते हैं। वे कहते हैं कि कर्तव्य भाव का होना ही सेवा करना है। दुर्भाग्यवश किसी न किसी वजह से जो लोग पीछे रह गए हैं, उनकी उन्नति के लिये, उन्हें आगे लाने के लिये एक साधन सेवा है। राष्‍ट्रीय स्‍वंयसेवक संघ आज सेवाभारती एवं अपने अन्‍य संगठनों

    15 Feb 2017

  • पाकिस्तान में आधी आबादी पर अत्याचार के अनेक बहाने : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

    पाकिस्तान में आधी आबादी पर अत्याचार के अनेक बहाने : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

    सरहदें दीवार खींच सकती हैं, लेकिन भावनाओं को बहने से नहीं रोक सकतीं, नहीं तो ऐसा कभी नहीं होता कि पाकिस्‍तान में बैठे बच्‍चों से पूछा जाता है तो वे हिन्‍दुस्‍तान को अपने लिए सबसे अच्‍छा देश बताएं और भारत के बच्‍चों की नजर में पाकिस्‍तान हमारा ही है, हम जैसे लोग ही वहाँ रहते हैं, कहा जाए। इसलिए संवेदना के स्‍तर पर जब कोई भावना से जुड़ी घटना हो जाती है तो दर्द सरहदों की सभी हदें पार कर जाता है । अभी हाल ही में पाकिस्‍तान से एक खबर आई हैं, उसे जब से जाना, लगातार यही लग रहा ह

    14 Feb 2017

  • "10 फरवरी माघ पूर्णिमा, संत रविदास जयंती" हिन्दू धर्म के आदि रक्षक संत रैदास- प्रवीण गुगनानी

    लगभग सवा छः सौ वर्ष पूर्व 1398 की माघ पूर्णिमा को काशी के मड़ुआडीह ग्राम में संतोख दास और कर्मा देवी के परिवार में जन्में संत रविदास यानि संत रैदास को निस्संदेह हम भारत में धर्मांतरण के विरोध में स्वर मुखर करनें वाली और स्वधर्म में घर वापसी करानें वाली प्रारम्भिक पीढ़ियों के प्रतिनिधि संत कह सकतें है l संत रैदास संत कबीर के गुरुभाई और स्वामी रामानंद जी के शिष्य थे l उनकें कालजयी लेखन को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि उनकें रचित 40 दोहे गुरु ग्रन्थ साहब जैसे महान ग्रन्थ में सम्मिलित किये गए हैं l भारतीय समाज म

    10 Feb 2017

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