आध्यात्म

संपूर्ण सृष्टि के पालक हैं देवाधिदेव महादेव

भोपाल(विसंके). शिव की आराधना हमें प्रकृति को पूजना और सहेजना सिखाती है। भौतिक सुखों से दूर आत्मिक सुख और जन कल्याण की सोच के साथ शिव जिस धैर्य और दृढ़ता के साथ प्रकृति की गोद में रमते हैं, वैसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता। प्राकृतिक परिवेश में जीने का सु..

आगामी पूर्ण चंद्रगहण के बारे में दस बातें, जिन्हें जानना है जरूरी

27 जुलाई की आधी रात को लगने वाला पूर्ण चंद्रग्रहण 21वीं शताब्दी का सबसे लंबा चंद्रगहण होगा, जो लगभग 103 मिनट तक रहेगा। पिछली सदी में सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण वर्ष 2000 में 16 जुलाई को हुआ था, जो इस बार के पूर्ण चंद्रग्रहण से चार मिनट अधिक लंबा था। एशिय..

शिव साक्षात् है कैलास में दर्शन मात्र ही रोमांचित और अभिभूत करने वाला है

भोपाल(विसंके). कैलास-मानसरोवर का उल्लेख सुनता था तो मन उन्मादी-सा हो उठता था। लगता था, चलना चाहिए, अभी। दो दशक बंद रहने के बाद 1981 में फिर यात्रा शुरू हुई थी। तब आने-जाने का कुल खर्च 5,000 रुपये पड़ता था। नौ सौ रुपये महीने की नौकरी थी। फिर भी कहीं से जुगा..

संसार में मनोबल से बड़ा कुछ नहीं

भोपाल(विसंके). एक बार की बात है गौतम बुद्ध अपने भिक्षुओं के साथ विहार करते हुए शाल्यवन में एक वटवृक्ष के नीचे बैठ गए। धर्म चर्चा शुरू हुई और उसी क्रम में एक भिक्षु ने उनसे प्रश्न किया "प्रभु! कई लोग दुर्बल और साधनहीन होते हुए भी कठिन से कठिन परिस्थितियों ..

वेद परमात्मा का ज्ञान है

भोपाल(विसंके). सम्पूर्ण विश्व - ब्रहमांड में केवल तीन ही वस्तुएं अपने सत्तात्मक रूप में विद्यमान हैं । यथा ईश्वर, जीव और प्रकृति । इन तीनों में से प्रकृति एक जड़ पदार्थ है, जिसमें ज्ञान गुण का अभाव है । यह प्रकृति न कुछ जान सकती है, न ही कुछ समझ सकती है और..

मूर्ति पूजा क्या है, क्यों करते हैं ? - श्रीश्री रविशंकर

भोपाल(विसंके). मूर्ति क्या है? एक चिन्ह है। ईश्वर जो निराकार है, जिसका विवरण नहीं हो सकता, जिसे देखा या छुआ नहीं जा सकता, उस ईश्वर को देखने और समझने के लिए आपको एक माध्यम की आवश्यकता है और उस माध्यम को आप मूर्ति कहते हैं। भगवान उस मूर्ति में नहीं बसते परन..

अधर्म के लक्षण

भोपाल(विसंके). वेद एक ऐसा महान् दिव्य ग्रन्थ है कि जिसमें मनुष्य मात्र की सर्वांगीण उन्नति हेतु, समस्त लौकिक सुख से लेकर मोक्ष सुख की प्राप्ति तक का विधि-विधान और क्या कर्तव्य है, क्या अकर्तव्य है सब प्रकार का ज्ञान-विज्ञान मन्त्र रूप में वर्णित है । वे..

मोक्ष क्या है ?

भोपाल(विसंके). प्रत्येक मनुष्य की ही नहीं अपितु प्राणी मात्र की यही कामना बनी रहती है कि कभी अपने जीवन में लेश मात्र भी दुःख को प्राप्त न करे किन्तु सदा सुख ही सुख से युक्त रहे। कोई भी प्राणी सदा दुःख को दूर करके नित्य व स्थायी रूप में सुखी रहना चाहता है।..

यज्ञ की आवश्यकता और वैज्ञानिकता

भोपाल(विसंके). सामान्यतः प्रातः जागरण से लेकर रात्रि शयन पर्यन्त हम अनेक कर्मों को करते जाते हैं परन्तु यह विचार नहीं करते कि उन कर्मों में कितना पुण्य हो रहा है अथवा कितना पाप हो रहा है । प्रत्येक क्षण मनुष्य श्वास (ओक्सिजेन) लेता रहता है और प्रश्वास (का..

21 जून / अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस - योग दर्शन के प्रणेता : महर्षि पतंजलि

भोपाल(विसंके). प्राचीन भारत ने हमें गणित बीजगणित, ज्यामिति, त्रिकोणमिति,शून्य दशमलव खगोल विज्ञान ज्योतिष, आयुर्वेद, शल्य चिकित्सा, व्याकरण व दर्शन इत्यादि का महत्वपूर्ण ज्ञान प्रदान किया है। आज भी विश्व भारत प्रदत्त संस्कृत भगवत्गीता और योग से लाभ उठा रहा..

मानव के कर्तव्य पंच महायज्ञ

भोपाल(विसंके). “यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्म” अर्थात् प्रत्येक श्रेष्ठ कर्म यज्ञ कहलाता है अथवा यज्ञ करना सबसे श्रेष्ठ कर्म है । स्वामी दयानन्द जी ने वेदों के आधार पर कहा कि प्रत्येक मनुष्य को प्रतिदिन अपने जीवन में पाँच महायज्ञ जरूर करने चाहिए। ..

चार प्रमुख धामो में से एक बद्रीनाथ मन्दिर की संपूर्ण कथा।

भोपाल(विसंके). बद्रीनाथ मंदिर, जिसे बदरीनारायण मंदिर भी कहते हैं, अलकनंदा नदी के किनारे उत्तराखंड राज्य में स्थित है। यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप बदरीनाथ को समर्पित है। यह हिन्दुओं के चार धाम में से एक धाम भी है। ऋषिकेश से यह २९४ किलोमीटर की दूरी पर उत्त..

वैदिक आश्रम व्यवस्था श्रेष्ठतम सामाजिक व्यवस्था

भोपाल(विसंके). ईश्वर का स्वभाव जीवों के सुख वा फल-भोग के लिए सृष्टि की रचना, पालन व प्रलय करना है। सृष्टि की रचना आदि का यह क्रम प्रवाह से अनादि है अर्थात् न तो कभी इसका आरम्भ हुआ और न कभी अन्त होगा, अर्थात् यह हमेशा चलता रहेगा। अपने इस स्वभाव के अनुसार ह..

वेद में चिकित्सा विज्ञान

भोपाल(विसंके). वेद ज्ञान का भण्डार है , वेद समस्त ज्ञान का स्रोत है । आर्य समाज के नियम में महर्षि दयानन्द जी ने वेद की महत्ता को प्रतिपादित करते हुए कहते हैं कि, वेद सब सत्य विद्याओं का पुस्तक है। वेद को सब सत्य विद्याओं का पुस्तक बता कर ऋषि ने अपनी यह म..

कठ उपनिषद में मृत्यु का भेद जानने के लिए यम के द्वार तक पहुंचने वाला नचिकेता सबसे पहला साधक जानते हैं नचिकेता के प्रश्न और यम के उत्तर के बारे में

भोपाल(विसंके). नचिकेता को दुनिया का पहला जिज्ञासु माना जाता है – कम से कम पहला महत्वपूर्ण जिज्ञासु। एक उपनिषद् भी उस से शुरू होता है। नचिकेता एक छोटा बालक था। उसके पिता ने एक यज्ञ करने की शपथ ली थी। यह एक ऐसा पवित्र अनुष्ठान था, जिसमें उन्हें अपनी स..

उपवास से होता है शरीर का शोधन

भोपाल(विसंके). संसार में अनेकों प्रकार की चिकित्सा पद्धतियाँ हैं। दो सौ वर्ष पूर्व हमारे देशवासी वैद्यक और हकीमी-दो चिकित्सा प्रणालियों का ही नाम सुनते थे। अंग्रेजी का शासन स्थापित हो जाने पर डाक्टरी (एलोपैथी) का नाम भी प्रसिद्ध हो गया। उसके पश्चात् होम्य..

शम्बूक वध - एक बहुत बड़ा झूठ

भोपाल(विसंके). इस पृथ्वी पर जिसे पुण्यभूमि की संज्ञा दी जा सकती है, वह देश है भारतवर्ष. यहाँ क्षमा, धैर्य, दया, शुद्धता आदि सद्वृत्तियों का निरन्तर विकास हुआ है. ये मानव जाति का कल्याण करने वाली सद्वृत्तियां हैं, यहाँ आध्यात्म और आत्मा के बारे खोज की गयी ..

भारतीय दर्शन से ही आएगी विश्व में शांति: दलाई लामा

भोपाल(विसंके).भारतीय दर्शन में सभी प्रश्नों के उत्तर समाहित हैं. पूरी दुनिया में शांति भारतीय दर्शन से ही संभव है. तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा ने यह बात नई दिल्ली में आयोजित ’विश्व शांति में भारत का योगदान’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में कही. उन्..

अमेरिकी पत्रिका का दावा-संस्कृत मंत्रों के उच्चारण से बढ़ती है याददाश्त

भोपाल(विसंके). एक्सपर्ट की इस टीम ने 42 वॉलंटियर्स को चुना, जिनमें 21 प्रशिक्षित वैदिक पंडित (22 साल) थे. इन लोगों ने 7 सालों तक शुक्ला यजुर्वेद के उच्चारण में पारंगत हासिल की थी. ये सभी पंडित दिल्ली के एक वैदिक स्कूल के थे. एक अमेरिकी पत्रिका में दावा क..

आध्यात्म क्या है ? - संत राजिंदर सिंह जी

आम तौर पर ऐसा माना जाता है कि अध्यात्म तर्क-बुद्धि औरविश्लेषण की क्षमता विकसित नहीं करता। हमें यह भी पढ़ाया जाता है कि अध्यात्म और विज्ञान में कोई समानता नहीं है। तोक्या अध्यात्म सिर्फ एक विश्वास है?मेरा मानना है कि अध्यात्म एक संपूर्ण विज्ञान है। विज्ञ..

सूर्य से ॐ की ध्वनि निकल रही है - ब्रजनंदन शर्मा

यह श्रद्धा और विश्वास की बात नहीं बल्कि शत प्रति सत्य और वैज्ञानिक शोध पर आधारित तथ्य है, जो हमारे ऋषिओं के हजारों साल पुराने कहे गए वचनों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है, उन्होंने कहा था कि ब्रह्माण्ड की उत्पति के समय जो ध्वनि निक..