त्रेतायुग के राम और कलयुग की अयोध्या – विजय मनोहर तिवारी

त्रेतायुग के राम और कलयुग की अयोध्या – विजय मनोहर तिवारी

भारत के ज़ख्मों से भरे इतिहास की एक धूलधूसरित कड़ी है अयोध्या। अंधेरे अतीत में एक रोशन मशाल जैसी, जो अपने बीते हुए कल की एक शानदार झलक दिखाती है। अयोध्या की स्मृतियों में क्या-क्या दर्ज होगा? दशरथ के महलों में राम की पहली किलकारी अयोध्या को याद होगी। कौशल्

मेघालय हाईकोर्ट की टिप्पणी – भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित होना चाहिए था, लेकिन यह धर्मनिरपेक्ष रहा

मेघालय हाईकोर्ट की टिप्पणी – भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित होना चाहिए था, लेकिन यह धर्मनिरपेक्ष रहा

नई दिल्ली. मेघालय हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में हिन्दुस्तान के इतिहास और विभाजन तथा उस दौरान सिखों, हिन्दुओं आदि पर हुए अत्याचारों का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने स्वयं को इस्लामिक देश घोषित किया, जबकि भारत का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ था, उस

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14 दिसंबर 1971 - बलिदान दिवस / परमवीर चक्र, फ़्लाइंग ऑफ़िसर निर्मलजीत सिंह सेखों

शौर्य गाथा : परमवीर चक्र फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों ने 1971 में पाकिस्तान के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति पाई. इस युद्ध में भारत विजयी हुआ और पाकिस्तान से टूटकर उसका पूर्वी हिस्सा, बांग्लादेश के नाम से स्वतंत्र राष्ट्र बन गया. उस समय नि

  • वीर शिवाजी गाथा : आने वाली अमावस - सोनाली मिश्र

    वीर शिवाजी गाथा : आने वाली अमावस - सोनाली मिश्र

    पैदल न चल पाने के कारण उन्होंने एक बार पुन: कहारों को इशारा किया और पालकी में बैठ गए.  जैसे जैसे मिर्जा राजे का शिविर और शिवाजी के मध्य दूरी कम हो रही थी, शिवाजी की स्वयं से दूरी बढ़ती जा रही थी. नहीं नहीं, यह तो उनका लक्ष्य नहीं था! उनके कानों में म

    12 Dec 2018

  • वीर शिवाजी गाथा : अफज़ल का जाल - सोनाली मिश्र (लेखमाला : भाग -2)

    वीर शिवाजी गाथा : अफज़ल का जाल - सोनाली मिश्र (लेखमाला : भाग -2)

    भोपाल(विसंके). जून के महीने में एक अजीब सी घुटन शिवाजी के जीवन में छा रही थी, हवाएं स्थिर थीं और उस जून के महीने में शिवाजी अजीब पसीना हो रहे थे। जैसे-जैसे उनका कदम आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे कोई शक्ति उनसे संवाद कर रही थी। बार-बार वह उन्हें धिक्कार रही थी,

    10 Dec 2018

  • मानवाधिकार दिवस समय है आत्ममंथन करने का - डॉ नीलम महेंद्र

    मानवाधिकार दिवस समय है आत्ममंथन करने का - डॉ नीलम महेंद्र

    द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान सम्पूर्ण विश्व में मानव समाज एक बहुत ही बुरे दौर से गुजर रहा था। यह वो समय था जब मानव सभ्यता और मानवता दोनों ही शर्मसार हो रही थीं। क्योंकि युद्ध समाप्त होने के बाद भी गरीब और असहायों पर अत्याचार, जुल्म, हिं..

    10 Dec 2018

  • कोर्ट के कटघरे में हिन्दुओं की आस्था हिन्दुओं के कटघरे में कोर्ट की आस्था - नरेन्द्र सहगल

    कोर्ट के कटघरे में हिन्दुओं की आस्था हिन्दुओं के कटघरे में कोर्ट की आस्था - नरेन्द्र सहगल

    भारत के सम्पूर्ण राष्ट्र जीवन को झकझोर देने वाले, करोड़ों हिन्दुओं की आस्था के साथ जुड़े हुए, गत 490 वर्षों से निरंतर संघर्ष करते चले आ रहे हिन्दू समाज की अस्मिता श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर के पुर्ननिर्माण का ज्वलंत एवं भावुक विषय सर्वोच्

    10 Dec 2018

  • भारत के गौरव का प्रतीक है राम मंदिर

    भारत के गौरव का प्रतीक है राम मंदिर

    आधुनिक भारत के कई राष्ट्र निर्माताओं ने ‘भारत की सामूहिक अंतश्चेतना’ को अपनी वाणी और आचरण से अभिव्यक्त किया है. इस‘सामूहिक अंतश्चेतना’ की इच्छा, आकांक्षा और संकल्प है अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाकर भारत के गौर

    06 Dec 2018

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