जननायक टंटया मामा व्यक्ति नही एक विचारधारा हैं- मोहन नारायण

जननायक टंटया मामा व्यक्ति नही एक विचारधारा हैं- मोहन नारायण

अपनी वीरता और अदम्य साहस से शोषण के विरुद्ध बुलंद आवाज़ का नाम ही टंट्या मामा भील है, अपने विद्रोही तेवर और बिजली की तरह तेज तर्रार कदकाठी से मामा ने कई मर्तबा अंग्रेजों को धुल चटाई,  देश की आजादी का इतिहास बिना टंट्या मामा के वैसे ही होगा जैसे किसी हिंदी फ़िल्म का बिना  एक्शन और रोमांच सीन का होना,लेक़िन इतिहासकारों की बेरुख़ी और उदासीनता टंटया मामा के साथ उतना न्याय नही कर पाई जिसके वो हक़दार थे, आज भी उनका इतिहास फ़र्श पर बिखरे मोती की तरह है जिन्हें समेट कर कोई माला बनाने की हिम्मत नही जुटा पाता,

बृजलाल द्विवेदी स्मृति पत्रकारिता सम्मान से अलंकृत किए जाएंगे कमलनयन पाण्डेय

बृजलाल द्विवेदी स्मृति पत्रकारिता सम्मान से अलंकृत किए जाएंगे कमलनयन पाण्डेय

   9 फरवरी, 2020 को ‘मीडिया विमर्श’ के आयोजन में होंगे सम्मानित      भोपाल। पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान इस वर्ष त्रैमासिक पत्रिका ‘युगतेवर&rsquo..

भारत को किसी भी प्रकार के प्रतिबंधों के नाम पर डराया नहीं जा सकता – विहिप

विहिप कार्याध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार जी का प्रेस वक्तव्य विश्व हिन्दू परिषद् ने गृहमंत्री अमित शाह जी को नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 लोकसभा में सफलता पूर्वक पारित कराए जाने पर हार्दिक बधाई दी है. हमें आशा है कि राज्यसभा भी इस विधेयक को इसी प्रकार भारी ब

  • कार्यकर्ताओं के कुशल शिल्पी बाबूलाल जी

    कार्यकर्ताओं के कुशल शिल्पी बाबूलाल जी

    श्री बाबूलाल जी का जन्म उ.प्र. के बुलन्दशहर जिले की स्याना तहसील में हुआ था। उनके पिता पुलिस विभाग में थानेदार थे। चार भाइयों में बाबूलाल जी का क्रमांक तीसरा था। प्रारम्भिक शिक्षा अपने गांव और फिर स्याना में पाकर उन्होंने पीलीभीत के शासकीय आयुर्वेद महाविद

    10 Dec 2019

  • सोनाखान के हुतात्मा वीर नारायण सिंह

    सोनाखान के हुतात्मा वीर नारायण सिंह

    छत्तीसगढ़ भारत का एक वन सम्पदा से भरपूर राज्य है। पहले यह मध्य प्रदेश का ही एक भाग था। अंग्रेजी शासन में जब दत्तक पुत्र को अस्वीकार करने का निर्णय हुआ, तो छत्तीसगढ़ भी अंग्रेजों के अधीन आ गया। रायपुर में अंग्रेजों ने एक कमिश्नरी की स्थापना की थी। वहा

    10 Dec 2019

  • उच्च मनोबल के धनी डा. अन्ना साहब देशपांडे

    उच्च मनोबल के धनी डा. अन्ना साहब देशपांडे

    डा. अन्ना साहब देशपांडे संघ के प्रारम्भिक कार्यकर्ताओं में से एक थे। उनका जन्म सात दिसम्बर, 1890 को वर्धा जिले के आष्टी गांव में हुआ था। प्राथमिक शिक्षा नागपुर में होने से उनकी मित्रता डा. हेडगेवार से हो गयी। उनकी भव्य कद-काठी और बोलने की शैली भी डा. जी स

    07 Dec 2019

  • राष्ट्रीय कलंक का परिमार्जन

    राष्ट्रीय कलंक का परिमार्जन

    भारत में विधर्मी आक्रमणकारियों ने बड़ी संख्या में हिन्दू मन्दिरों का विध्वंस किया। स्वतन्त्रता के बाद सरकार ने मुस्लिम वोटों के लालच में ऐसी मस्जिदों, मजारों आदि को बना रहने दिया। इनमें से श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर (अयोध्या), श्रीकृष्ण जन्मभूमि (मथुरा) और क

    06 Dec 2019

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