यंग थिंकर्स फोरम द्वारा संविधान हत्या दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित व्याख्यान में इमरजेंसी के ऐतिहासिक, संवैधानिक एवं राजनीतिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पूर्व न्यायाधीश श्री अशोक पाण्डेय रहे।
ग्वालियर। राष्ट्रभक्ति, संगठन, त्याग और विचारों की शक्ति को केंद्र में रखकर प्रस्तुत किए गए महानाट्य ‘युगप्रवर्तक’ ने सोमवार को दर्शकों को भावविभोर कर दिया। जीवाजी विश्वविद्यालय स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागृह में नादब्रह्म नागपुर के 45 कलाकारों द्वारा प्रस्तुत इस भव्य महानाट्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन, संघर्ष, राष्ट्रचिंतन और संगठन निर्माण की यात्रा को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया। लगभग दो घंटे तक चले इस नाट्य प्रदर्शन ने दर्शकों को इतिहास के उन महत्वपूर्
सभी राज्य सरकारें सड़कों पर नमाज़ को सख्ती से रोकें – विश्व हिन्दू परिषद
मंदिर मुक्ति हेतु सर्वोच्च न्यायालय में पुनः शुरू होगी ऐतिहासिक सुनवाई – आलोक कुमार जी
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या सांस्कृतिक संवेदनहीनता
तुलसीदास जी कैसे हुए गोस्वामी तुलसीदास
NCERT में हो शल्यक्रिया : राष्ट्रबोध की पुनर्स्थापना का समय
उम्माह पर भारी पड़ी राष्ट्रीयता: मलेशिया में रोहिंग्या विवाद ने सामने ला दी इस्लामी एकता के दावों की सच्चाई
सनातन की कसौटी पर हमारा वैचारिक आचरण
राम मंदिर का धन, आस्था की कसौटी और जवाबदेही की अनिवार्यता
कुछ दशक पहले तक जब नशे की चर्चा होती थी तो लोगों के मन में शराब, तंबाकू, अफीम, गांजा या अन्य मादक पदार्थों की छवि उभरती थी। नशे को पहचानना आसान था क्योंकि उसके स्पष्ट संकेत दिखाई देते थे। व्यक्ति की चाल बदल जाती थी, व्यवहार असामान्य हो जाता था और उसका स्वास्थ्य तेजी से गिरने लगता था। लेकिन इक्कीसवीं सदी में एक ऐसा नशा जन्म ले चुका है जो न तो बोतल में मिलता है, न किसी पुड़िया में और न ही उसकी कोई गंध होती है। यह नशा हमारी जेब में रखा रहता है, हमारे हाथों में चमकता है और दिन रात हमारी चेतना पर कब्जा करता रहता
25 जून 1975 कि वह रात केवल लोकतंत्र के इतिहास की एक तारीख नहीं थी,वरन् भारतीय गणराज्य की आत्मा पर पड़ी एक ऐसी भयानक काली रात थी, जो अनादि काल तक भावी पीढ़ीयों में भी कटु स्मृति के रुप में विद्यमान रहेगी। 25 जून सन् 1975 को रात ठीक 11बजकर 45 मिनिट पर भारत पर श्रीमती इंदिरा गाँधी अवैधानिक रुप से आपातकाल थोप दिया गया। आपातकाल के नाम पर तानाशाही स्थापित कर लोकतंत्र और संविधान की हत्या कर दी गई।
रामजी का युद्ध सत्ता के लिये नहीं, सत्य की स्थापना के लिये था
आज भी रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधकर उससे आजीवन अपनी रक्षा और सम्मान की प्रतिज्ञा लेती है। भाई भी यह वचन देता है कि वह हर परिस्थिति में अपनी बहन की सुरक्षा करेगा। यही आदर्श हमारी भारतीय संस्कृति की विशिष्टता है, कि यहाँ नारी को मात्र एक व्यक्ति नहीं, संस्कारों की जननी, परिवार की धुरी और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
विनोद जोहरी- संक्रान्ति का अर्थ है, ‘सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण (जाना)’. एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति के बीच का समय ही सौर मास है. पूरे वर्ष में कुल 12 संक्रान्तियां होती हैं. लेकिन इनमें से चार संक्रांति मे
गीता जयंती प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। बताया जाता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण के मुख से गीता के उपदेश निकले थे। पूरे विश्व भर में मात्र श्रीमद भगवत गीता ही एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष
बालासोर: 3 जून ओडिशा के बालासोर में हुई भीषण रेल दुर्घटना के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सैकड़ों स्वयंसेवक राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। संघ के स्वयंसवकों ने करीब 500 यूनिट रक्तदान किया है। बालेश्वर जिले के बाहनगा रेलवे स्टेशन के निक
संघ का सेवा कार्य- दस दिवसीय दन्त चिकित्सा शिविर का आयोजन सैकड़ों की संख्या में नागरिकों ने उठाया लाभ नागरिकों ने संघ के कार्य को सराहा भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सेवा विभाग के द्वारा
सेवागाथा – वैदिक परंपराओं का पुनर्जागरण सुरभि शोध संस्थान (वाराणसी)
सेवागाथा - हर मुश्किल के साथी।
राष्ट्र सेविका समिति ने बनाई कोविड संजीवनी हेल्प लाइन
बालाघाट -अयोध्या में श्री राम लला का मंदिर 500 वर्षों के बाद पुनः बनने को अब तैयार है. सैकड़ों वर्षो के प्रतीक्षा के बाद एक भव्य राम मंदिर के लिए पूरा देश उत्सुक है. देश का हर समाज हर वर्ग हर पंथ इसमें अपना सहयोग देना चाहता है. इसी वजह से श्री राम मंदिर
नेताजी की 125वीं जयंती एवं पराक्रम दिवस के अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई ने आयोजित किया रक्तदान शिविर और विशेष व्याख्यान भोपाल। कोरोना काल
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए देशभर में निधि समर्पण अभियान प्रारंभ हो गया है. मंदिर की नींव को लेकर विशेषज्ञ मंथन कर रहे हैं. जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ होने की आशा है. निधि समर्पण अभियान और श्रीराम मंदिर निर्माण को ले
अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए 15 जनवरी से 14 फरवरी 2021 तक मध्यप्रदेश में जन-जन को जोड़कर निधि समर्पण के अंतर्गत राशि संग्रह की जाएगी, इसके लिए शनिवार राजधानी भोपाल में विस्तृत योजना बनी है। इसमें आम लोग कूपन से भगवान श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण में अपनी श्रद्धा निधि समर्पण राशि दे सकेंगे। जिसके लिए 10 रुपये, 100 रुपये और 1000 रुपये के कूपन तैयार किए गए हैं। इसके अलावा जिन्हें इससे अधिक राशि देनी है वे डीडी, चेक या रसीद-बुक से अपने पेन नंबर के साथ दे सकेंगे।